10 दिन बाद खेत में जला मिला युवक का शव, अवैध संबंधों के चलते हत्या की आशंका
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गुलवाजनगर निवासी श्रमिक सुखराम (42) चार जनवरी को बेटी से चाय बनाने की बात कहकर घर से चले गए थे। काफी देर तक वापस न आने पर खोजबीन की गई। अगले दिन छोटे भाई सुरेश ने कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। सोमवार को सुखराम का पुत्र आशीष व रिश्ते के चाचा सुल्तान सिंह, गांव के एक अन्य युवक के साथ गांव नरैनामऊ के पास आम के एक बाग में लकड़ियां तोड़ रहे थे। तभी हेतराम के गन्ने के खेेत में कुछ लोग खड़े दिखाई दिए। आशीष व सुल्तान सिंह गन्ने के खेत में पहुंचे तो वहां सुखराम का शव पड़ा दिखाई दिया। अन्य परिवार वाले भी मौके पर पहुंच गए।
उसके पांच पुत्र विपिन, रतन, आशीष, गोविंद, शोभित हैं जबकि दो पुत्रियां प्रियंका व अंजली हैं। प्रियंका की शादी हो चुकी है। विपिन दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है। कुछ वर्ष पहले पत्नी चंदावती की मौत हो चुकी है। सूचना पर एएसपी त्रिभुवन सिंह, सीओ राजबीर सिंह व इंस्पेक्टर राधेश्याम, कस्बा चौकी प्रभारी बलराज भाटी, एसआई मुनेंद्र सिंह फोर्स के साथ पहुंचे। सुखराम के पैंट की चैन खुली थी। एक जूता पैर में व दूसरा पास ही पड़ा था। कमर के नीचे का हिस्सा बुरी तरह जला हुआ था। उसके कपड़े नहीं जले थे, जिससे अनुमान लगाया गया कि श्रमिक को तड़पा तड़पा कर मारा गया है बाद में कपड़े पहना कर शव गन्ने के खेत में डाला गया है। वहां एक शराब की पुरानी बोतल पड़ी थी।
सुखराम की हत्या कर शव फेंका गया है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। श्रमिक सुखराम की हत्या के मामले में घटनास्थल नरैनामऊ के गन्ने के खेत में लोगों की भीड़ लगी रही। डॉग आस्कर व फील्ड यूनिट की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल पर पड़े मृतक के अंगौछे व मोजे से डॉग आस्कर को सुगंध दिलाई गई। वह उत्तर दिशा की ओर भागता हुआ एक स्कूल तक पहुंचा। वहां एक कार के पहिये के निशान बने हुए थे। वहां चक्कर लगाता रहा। उसके बाद वह भ्रमित हो गया। हैंडलर विपिन व जैवेंद्र ने वहां की मिट्टी का नमूना लिया और मृतक के मोजे में लिपटी हुई मिट्टी का भी नमूना लिया। अनुमान है कि शव को कार से लाकर गन्ने के खेत में फेंका गया।