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‘धरती के भगवान’ नहीं पसीजे, हैरान कर रहीं तस्वीरें...
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 02 Mar 2017 01:14 AM IST
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कार्डियोलॉजी अस्पताल के बाहर रोते-बिलखते मरीजों के घरवाले
- फोटो : अमर उजाला
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अपने मरीज की जान बचाने के लिए घरवाले कभी हाथ जोड़कर आंसू बहाते हुए तो कभी पैरों पर पड़कर ‘धरती के भगवान’ कहे जाने वाले डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ा रहे थे। हॉस्पिटल स्टाफ से बार-बार वो लोग पूछ रहे थे कि देखो कहीं ये मर तो नहीं गए। ये दृश्य था बुधवार को कानपुर के कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल का। कॉर्डियोलॉजी में तीमारदारों की गुंडई के विरोध में बुधवार को कॉर्डियोलॉजी में डॉक्टरों और कर्मचारियों ने ओपीडी, कैथ लैब ठप कर दी। मेन गेट बंद करने से इमरजेंसी प्रभावित हुई। हड़ताल के दौरान दो मरीजों की मौत हो गई, हालांकि उनका इलाज किया जा रहा था। इलाज न मिलने से मौत नहीं हुई। ओपीडी ठप होने से करीब 500 मरीजों को दूसरे अस्पताल जाना पड़ा।
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पेशेंट को लेकर भटके तीमारदार
कानपुर कार्डियोलॉजी का हाल
- फोटो : राहुल शुक्ला
शिवकटरा निवासी हरिशचंद्र चौधरी (66) को मंगलवार रात आठ बजे कॉर्डियोलॉजी में भर्ती कराया गया। निदेशक डॉ. विनय कृष्णा ने बताया कि बेड फुल होने पर इस पेशेंट को ट्राली पर लिटाकर इलाज शुरू किया गया। परिजन इमरजेंसी में तैनात डॉ. लोकेंद्र से तुरंत बेड देने के लिए जोर देनेे लगे। बेड खाली होने पर उन्हें शिफ्ट करने का आश्वासन दिया गया तो वे अभद्रता करने लगे। उन्हें हमला करता देख आउटसोर्सिंग कर्मचारी ऋषभ ने बीचबचाव कराने की कोशिश की। डॉ. लोकेंद्र ने किसी कमरे में घुसकर जान बचाई। इसी बीच तीमारदारों के बुलावे पर आए 20-25 लोगों ने हंगामा कर दिया। बाद में वे अपने मरीज को ले गए।
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डॉक्टर का किया घर तक पीछा
कानपुर कार्डियोलॉजी में परेशान मरीज और तीमारदार
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. लोकेंद्र के अस्पताल के पीछे वाले गेट से घर जाते समय बाइकों से पीछा किया गया। तेज रफ्तार से गाड़ी चलाकर उन्होंने स्वरूप नगर स्थित अपने अपार्टमेंट में घुसकर जान बचाई। अपार्टमेंट के गेट पर गार्डों ने हमलावरों को लौटाया। दूसरी तरफ ऋषभ के शारदा नगर स्थित घर पहुंचते ही हमला किया गया। धमकी देते हुए उसकी मां, पिता और बहन को भी घायल किया।
दो मरीजों की मौत
कानपुर कार्डियोलॉजी में रोते बिलखते मरीज के परिजन
- फोटो : राहुल शुक्ला
हड़ताल के दौरान एचडीयू वार्ड में भर्ती औरैया के जाकिर (56) को बाथरूम में अटैक पड़ गया। हड़ताली कर्मचारी उन्हें इमरजेंसी ले गए। जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर लगाकर इलाज शुरू किया, पर डेढ़ घंटे बाद उनकी मौत हो गई। इसी बीच काकादेव में अटैक पड़ने के बाद लाए गए शैलेंद्र जार्ज (62) को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मकनपुर, बिल्हौर के आफताब आलम (45) ने बताया कि सीने में दर्द की वजह से कार्डियोलॉजी में दिखाने आए हैं, पर यहां गेट बंद है। पर्चा नहीं बना। काकादेव की रईसा ने बताया कि डॉ. एसके सिन्हा का इलाज चल रहा है। बहू रईसा के साथ दिखाने आई थीं, पर यहां हड़ताल है।
सुबह नौ बजे ही काम ठप किया
कानपुर कार्डियोलॉजी का ये था हाल
- फोटो : राहुल शुक्ला
जूनियर डॉक्टरों और कर्मचारियों ने अगले दिन बुधवार सुबह 9 बजे ही हड़ताल कर दी। उस समय तक ओपीडी में 192 पर्चे बन चुके थे। पर्चा बना चुके मरीजों को गेट से बाहर कर दिया गया। ओपीडी में ताला जड़ दिया गया। कैथ लैब (जहां एंजियोप्लास्टी, एंजियोग्राफी होती है) भी बंद करा दी गई। डॉक्टर हमलावरों के खिलाफ एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। निदेशक डॉ. विनय कृष्णा और डॉ. रमेश ठाकुर ने जूनियर डॉक्टरों, कर्मचारियों को कार्रवाई का आश्वासन देकर 12:30 बजे हड़ताल खत्म कराई। आईजी, एसएसपी से बात कर एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने बवाल के दौरान आईसीय, इमरजेंसी और वार्डों में चिकित्सा सेवाएं ठप न होने का दावा किया। कहा दो मार्च से ओपीडी, कैथलैब भी खुलेगी।