ट्रिपल तलाक पर ये क्या बाेल गईं महिला शहरकाजी
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महिला शहरकाजी डॉ. हिना जहीर कहना है कि इस अपराध के लिए किस तरह की सजा होनी चाहिए, इसके पहले सरकार को उलेमा से बातचीत करनी चाहिए थी। साथ ही उलेमा और इस प्रथा से जूझ रही मुस्लिम महिलाओं की राय लेकर सजा तय करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि इस्लाम के खलीफा हजरत उमर फारूक के जमाने में एक बार में तीन तलाक देने वाले को 70 कोड़े मारने की सजा था। यह सजा ठीक थी। अब भारत में संविधान लागू है और भारतीय कानून है। इसके बावजूद भी तलाक, निकाह, वरासत का मामला शरीअत से जुड़ा है।
तीन तलाक की प्रथा खत्म होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे गैरकानूनी बताया है, लेकिन सरकार ने बिना सलाह मशविरा के सजा का प्रावधान कर कैबिनेट बिल को मंजूरी दे दी। यह बेहद गलत है। डॉ. हिना जहीर ने कहा कि सजा किस तरह की होनी चाहिए, यह फैसला मुस्लिम ही करेंगे।
सभी मसलक और फिरके के उलेमा, मुस्लिम महिलाओं की राय के बाद एक मत से जो सजा मुनासिब हो, वैसे ही प्रावधान होना चाहिए। इस बिल में सजा के प्रावधान से नाराजगी है। उन्होेंने आल इंडिया खवातीन बोर्ड को भी इस मामले में पक्षकार बनाने की मांग की है।