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गोशाला से खदेड़े गोवंश, चौपट कर रहे फसलें
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कानपुर देहात। कान्हा गोशाला, नबीपुर से छोड़े गए गोवंश किसानों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। पहले तो गोशाला में ग्रामीणों की तरफ से लाए गए गोवंश अंदर कर लिए गए। अब उन्हें रात में बाहर खदेड़ा जा रहा है। यह क्रम कई दिनों से चल रहा है। गोवंश के झुंड आसपास के गांवों में तबाही मचाए हैं। किसानों के सामने फसलें बचाना चुनौती साबित हो रहा है।
नबीपुर स्थित कान्हा गोशाला करीब 10 से 15 किमी दूर के किसान छुट्टा गोवंश लेकर पहुंचे थे। पांच सौ की क्षमता वाले कान्हा गोशाला में करीब एक हजार गोवंश पहुंच गए। वहां अव्यवस्था हो गई। इसके बाद आश्रय स्थल से कर्मचारी उन्हें बाहर खदेड़ने लगे। आश्रय स्थल में गोवंश लेकर आने वाले किसानों पर कार्रवाई भी शुरू हो गई। पहले लाए गए कुछ गोवंश तो अन्य आश्रय स्थलों में भेजे गए लेकिन अधिकांश गायों को फिर गांवों की तरफ खदेड़ दिया गया।
ये गोवंश अब जलालपुर, नबीपुर, बहवलपुर, मोहाना, विजय नगर कोरारी, जमरेही, कौसम, भदेसा, मंगटा गांवों के किसानों की नींद हराम किए हैं। पहले इन गांवों में गोवंशों की संख्या कम थी, लेकिन दूर के गांवों से एकत्र किए गए गोवंश कान्हा गोशाला से भगाए गए तो वह नजदीक गांवों में डेरा जमाए हैं। किसानों को परेशानी हो रही है। किसानों का कहना है कि अफसर उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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छुट्टा मवेशियों की समस्या पर बोले किसान
कटेठी गांव किसान राजकुमार ने बताया कि गांव में पहले तो गोवंश कम थे लेकिन अब तो दूर के गांवों के गोवंश भी आ गए हैं। फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। गेहूं की फसल तो पूरी तरह से चौपट हो रही है।
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भदेसा गांव के किसान पप्पू पांडेय ने बताया कि गोवंशों को कान्हा गोशाला में छोड़ने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि अफसर कोई व्यवस्था करेंगे। गोशाला से गोवंश छोड़कर नई मुसीबत पैदा कर दी गई। कार्रवाई के डर से किसानों के मन में डर हो गया है।
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विजय नगर के किसान गोरे सिंह ने बताया कि छुट्टा गोवंश की समस्या बरकरार है। रातदिन फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। छुट्टा मवेशियों से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। समस्या को देखने के लिए न तो जनप्रतिनिधि आ रहे हैं, और अफसर तो पुलिस बुलाकर कार्रवाई कराने की धमकी देते हैं।
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मोहाना गांव के किसान अरविंद ने बताया कि भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। जिम्मेदार छुट्टा गोवंश की समस्या निराकरण के लिए गंभीर नहीं हैं। चार से पांच गांव के बीच एक आश्रय स्थल बनवा कर गोवंश वहां रखे जाए तो समस्या खत्म हो सकती है।
कान्हा गोशाला में लाए गए गोवंश अन्य आश्रय स्थलों में भेजे जा रहे हैं। जिन गांवों में समस्या अधिक है, वहां कि किसान सीवीओ से संपर्क कर सकते हैं। ग्रामीणों की मदद से गोवंश पकड़ कर किसी आश्रय स्थल में भेज दिए जाएंगे।
-राजीव राज, एसडीएम
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नबीपुर स्थित कान्हा गोशाला करीब 10 से 15 किमी दूर के किसान छुट्टा गोवंश लेकर पहुंचे थे। पांच सौ की क्षमता वाले कान्हा गोशाला में करीब एक हजार गोवंश पहुंच गए। वहां अव्यवस्था हो गई। इसके बाद आश्रय स्थल से कर्मचारी उन्हें बाहर खदेड़ने लगे। आश्रय स्थल में गोवंश लेकर आने वाले किसानों पर कार्रवाई भी शुरू हो गई। पहले लाए गए कुछ गोवंश तो अन्य आश्रय स्थलों में भेजे गए लेकिन अधिकांश गायों को फिर गांवों की तरफ खदेड़ दिया गया।
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ये गोवंश अब जलालपुर, नबीपुर, बहवलपुर, मोहाना, विजय नगर कोरारी, जमरेही, कौसम, भदेसा, मंगटा गांवों के किसानों की नींद हराम किए हैं। पहले इन गांवों में गोवंशों की संख्या कम थी, लेकिन दूर के गांवों से एकत्र किए गए गोवंश कान्हा गोशाला से भगाए गए तो वह नजदीक गांवों में डेरा जमाए हैं। किसानों को परेशानी हो रही है। किसानों का कहना है कि अफसर उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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छुट्टा मवेशियों की समस्या पर बोले किसान
कटेठी गांव किसान राजकुमार ने बताया कि गांव में पहले तो गोवंश कम थे लेकिन अब तो दूर के गांवों के गोवंश भी आ गए हैं। फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। गेहूं की फसल तो पूरी तरह से चौपट हो रही है।
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भदेसा गांव के किसान पप्पू पांडेय ने बताया कि गोवंशों को कान्हा गोशाला में छोड़ने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि अफसर कोई व्यवस्था करेंगे। गोशाला से गोवंश छोड़कर नई मुसीबत पैदा कर दी गई। कार्रवाई के डर से किसानों के मन में डर हो गया है।
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विजय नगर के किसान गोरे सिंह ने बताया कि छुट्टा गोवंश की समस्या बरकरार है। रातदिन फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। छुट्टा मवेशियों से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। समस्या को देखने के लिए न तो जनप्रतिनिधि आ रहे हैं, और अफसर तो पुलिस बुलाकर कार्रवाई कराने की धमकी देते हैं।
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मोहाना गांव के किसान अरविंद ने बताया कि भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। जिम्मेदार छुट्टा गोवंश की समस्या निराकरण के लिए गंभीर नहीं हैं। चार से पांच गांव के बीच एक आश्रय स्थल बनवा कर गोवंश वहां रखे जाए तो समस्या खत्म हो सकती है।
कान्हा गोशाला में लाए गए गोवंश अन्य आश्रय स्थलों में भेजे जा रहे हैं। जिन गांवों में समस्या अधिक है, वहां कि किसान सीवीओ से संपर्क कर सकते हैं। ग्रामीणों की मदद से गोवंश पकड़ कर किसी आश्रय स्थल में भेज दिए जाएंगे।
-राजीव राज, एसडीएम