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उपभोक्ता जागे, फोरम में बढ़े मामले, अब लगेगी एक और बेंच
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:29 AM IST
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उपभोक्ताओं में जागरूकता और फोरम के प्रति विश्वसनीयता बढ़ी
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कानपुर में उपभोक्ता फोरम की एक और बेंच जल्द खोली जाएगी। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है। इसे मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा जा रहा है। यह जानकारी जिला उपभोक्ता फोरम के निरीक्षण के लिए शहर आए स्टेट चेयरमैन जस्टिस एएच खान ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में दी।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं में जागरूकता और फोरम के प्रति विश्वसनीयता बढ़ी है, इसलिए मुकदमों की संख्या में इजाफा हो रहा है। तीन माह में मुकदमे का निस्तारण का समय होता है लेकिन पेडेंसी के कारण इससे ज्यादा समय लग रहा है। तेजी से निस्तारण के बावजूद कानपुर फोरम में मुकदमों की पेंडेंसी बढ़ रही है। अभी यह संख्या करीब 3900 है। तकनीकी दिक्कतों के कारण कानपुर के अतिरिक्त जिला उपभोक्ता फोरम को बंद करना पड़ा था। बार एसोसिएशन और वकीलों ने इसे फिर से खोलने की मांग उठाई थी। इस पर अतिरिक्त पीठ खोलने के बजाय एक और बेंच खोलने का प्रस्ताव तैयार कराया गया है। उन्होंने बताया कि हर जिला उपभोक्ता फोरम को महीने में कम से कम 80 मुकदमों के निस्तारण का लक्ष्य दिया गया है। स्टेट फोरम में प्रति दिन पांच-छह मुकदमों का निस्तारण हो रहा है। जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश के खिलाफ अपील पर अंकुश लगाने के लिए ही कम से कम 25 हजार या मुकदमे के फैसले में सुनाए गए जुर्माने की पचास फीसदी राशि जमा कराने का प्रावधान है। पीठासीन अधिकारियों से आदेश का अनुपालन न करने पर रिकवरी वारंट और तीन साल तक की सजा सुनाने के अधिकार का प्रयोग करने को कहा गया है, जिससे उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिल सके। स्टेट चेयरमैन के साथ रजिस्ट्रार मो. रईस सिद्दीकी और जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष डॉ. आरएन सिंह मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं में जागरूकता और फोरम के प्रति विश्वसनीयता बढ़ी है, इसलिए मुकदमों की संख्या में इजाफा हो रहा है। तीन माह में मुकदमे का निस्तारण का समय होता है लेकिन पेडेंसी के कारण इससे ज्यादा समय लग रहा है। तेजी से निस्तारण के बावजूद कानपुर फोरम में मुकदमों की पेंडेंसी बढ़ रही है। अभी यह संख्या करीब 3900 है। तकनीकी दिक्कतों के कारण कानपुर के अतिरिक्त जिला उपभोक्ता फोरम को बंद करना पड़ा था। बार एसोसिएशन और वकीलों ने इसे फिर से खोलने की मांग उठाई थी। इस पर अतिरिक्त पीठ खोलने के बजाय एक और बेंच खोलने का प्रस्ताव तैयार कराया गया है। उन्होंने बताया कि हर जिला उपभोक्ता फोरम को महीने में कम से कम 80 मुकदमों के निस्तारण का लक्ष्य दिया गया है। स्टेट फोरम में प्रति दिन पांच-छह मुकदमों का निस्तारण हो रहा है। जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश के खिलाफ अपील पर अंकुश लगाने के लिए ही कम से कम 25 हजार या मुकदमे के फैसले में सुनाए गए जुर्माने की पचास फीसदी राशि जमा कराने का प्रावधान है। पीठासीन अधिकारियों से आदेश का अनुपालन न करने पर रिकवरी वारंट और तीन साल तक की सजा सुनाने के अधिकार का प्रयोग करने को कहा गया है, जिससे उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिल सके। स्टेट चेयरमैन के साथ रजिस्ट्रार मो. रईस सिद्दीकी और जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष डॉ. आरएन सिंह मौजूद रहे।
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