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आईआईटी प्रशासन ने बंद कराया ट्विटर व फेसबुक पेज, ये है वजह
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 22 Nov 2018 01:00 PM IST
सार
- वॉक्स पॉपुली मैगजीन, पेज पर भी लगी रोक, आर्थिक मदद रोकी गई
- सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ टिप्पणी कर रहे छात्र-छात्राएं
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आईआईटी कानपुर
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विस्तार
आईआईटी कानपुर में दलित उत्पीड़न मामले में चार प्रोफेसरों पर हुई एफआईआर के बाद छात्र-छात्राएं सोशल मीडिया साइट्स पर अपनी-अपनी बातें लिख रहे हैं। संस्थान में कई व्हाट्सएप ग्रुप भी बन गए हैं। एक में आरक्षण समर्थक और दूसरे में आरक्षण विरोधी लिख रहे हैं। सभी डॉ. सडरेला मामले में भी अपनी-अपनी बातें रख रहे हैं। यहां तक कि अब कक्षाओं में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।
छात्रों के बीच जातिगत भेदभाव न बढ़े, इसके लिए इंस्टीट्यूट प्रशासन ने आईआईटी कानपुर का कन्फेशन पेज और स्टूडेंट मीडिया पेज वॉक्स पॉपुली पर फौरी तौर पर रोक लगा दी है। कन्फेशन पेज पर छात्र-छात्राएं बगैर अपने नाम का खुलासा किए अपनी बातें लिख सकते थे। इस पेज पर आरक्षण के विरोध और पक्ष में काफी बड़ी बहस शुरू हो गई थी। इसको देखते हुए तत्काल प्रभाव से इंस्टीट्यूट प्रशासन ने इसपर रोक लगा दी है।
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छात्रों के बीच जातिगत भेदभाव न बढ़े, इसके लिए इंस्टीट्यूट प्रशासन ने आईआईटी कानपुर का कन्फेशन पेज और स्टूडेंट मीडिया पेज वॉक्स पॉपुली पर फौरी तौर पर रोक लगा दी है। कन्फेशन पेज पर छात्र-छात्राएं बगैर अपने नाम का खुलासा किए अपनी बातें लिख सकते थे। इस पेज पर आरक्षण के विरोध और पक्ष में काफी बड़ी बहस शुरू हो गई थी। इसको देखते हुए तत्काल प्रभाव से इंस्टीट्यूट प्रशासन ने इसपर रोक लगा दी है।
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आईआईटी कानपुर
इंस्टीट्यूट के छात्रों की ओर से प्रकाशित की जाने वाली पत्रिका वॉक्स पॉपुली पर भी इंस्टीट्यूट प्रशासन ने रोक लगा दी है। इसकी आर्थिक मदद भी रोक दी गई है। बताया जाता है कि यह मुद्दा शांत होने के बाद ही इसे दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
इंस्टीट्यूट प्रशासन ने छात्रों पर बढ़ाई निगरानी
संस्थान में जातिगत मुद्दों पर चर्चाएं शुरू हुईं तो इंस्टीट्यूट प्रशासन ने भी छात्रों पर निगरानी बढ़ा दी है। डीन एकेडमिक्स और डीन स्टूडेंट अफेयर्स के कुछ लोगों को विशेष तौर पर लगाया गया है ताकि प्रोफेसरों की यह लड़ाई कहीं छात्रों के बीच भी न शुरू हो जाए।
इंस्टीट्यूट प्रशासन ने छात्रों पर बढ़ाई निगरानी
संस्थान में जातिगत मुद्दों पर चर्चाएं शुरू हुईं तो इंस्टीट्यूट प्रशासन ने भी छात्रों पर निगरानी बढ़ा दी है। डीन एकेडमिक्स और डीन स्टूडेंट अफेयर्स के कुछ लोगों को विशेष तौर पर लगाया गया है ताकि प्रोफेसरों की यह लड़ाई कहीं छात्रों के बीच भी न शुरू हो जाए।