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इस पेड़ के नीचे भोजन करो तो होगी इच्छा पूरी
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 08 Nov 2016 07:55 PM IST
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अभी तक आपने केवल पेड़ों की पूजा होते देखी होगी। लेकिन क्या कभी ऐसा पेड़ देखा है जिसके नीचे लोग बैठकर भोजन करते हैं। चित्रकूट में कई साल से एक पेड़ के नीचे रोजाना सैंकड़ों श्रृद्धालू जुटते हैं। उनकी मान्यता है कि यह ऐसा अनोखा पेड़ है जिसके नीचे बैठकर भोजन करो तो मन की सभी इच्छा पूरी होती है...
और तो और पेड़ की पूजा करने और पेड़ के फल का सेवन करने से भी शरीर के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। चित्रकूट की धर्म नगरी स्थित इस पेड़ के संबंध में आयुर्वेदाचार्य डा. मदन गोपाल बाजपेयी, डा विष्णु दत्त बुधौलिया बताते हैं कि इच्छा नवमी के दिन से शीत ऋतु शुरू हो जाती है। जाडे़ में लोगों के शरीर में कफ, पित्त अधिक बनता है। इसलिए इन दिनों में लोगों का हुजूम ज्यादा जुटने लगता है।
जो लोग यहां आते हैं वे इस पेड़ के फल का सेवन कर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। साथ ही साथ शरीर में बल, तेज, ओज, स्मृति की क्षमता बढ़ती है। लाभ मिलता देख लोगों ने पेड़ को पूजना शुरू कर दिया।
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यह एक आंवले का पेड़ है। आयुर्वेदाचार्य बताते हैं हमारे पूर्वज आंवले के पेड़ को बचाने के लिए इच्छा नवमी पर्व में इनकी पूजा पाठ का विधान सदियों से रखते आ रहे हैं। वहीं धर्म नगरी में आंवले के पेड़ का इतना महत्व बढ़ गया कि श्रद्धालुओं के लिए समाजसेवियों ने धर्मनगरी सहित विभिन्न स्थानों में आंवले के पेड़ लगाना ही शुरू कर दिया।
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और तो और पेड़ की पूजा करने और पेड़ के फल का सेवन करने से भी शरीर के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। चित्रकूट की धर्म नगरी स्थित इस पेड़ के संबंध में आयुर्वेदाचार्य डा. मदन गोपाल बाजपेयी, डा विष्णु दत्त बुधौलिया बताते हैं कि इच्छा नवमी के दिन से शीत ऋतु शुरू हो जाती है। जाडे़ में लोगों के शरीर में कफ, पित्त अधिक बनता है। इसलिए इन दिनों में लोगों का हुजूम ज्यादा जुटने लगता है।
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जो लोग यहां आते हैं वे इस पेड़ के फल का सेवन कर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। साथ ही साथ शरीर में बल, तेज, ओज, स्मृति की क्षमता बढ़ती है। लाभ मिलता देख लोगों ने पेड़ को पूजना शुरू कर दिया।
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यह एक आंवले का पेड़ है। आयुर्वेदाचार्य बताते हैं हमारे पूर्वज आंवले के पेड़ को बचाने के लिए इच्छा नवमी पर्व में इनकी पूजा पाठ का विधान सदियों से रखते आ रहे हैं। वहीं धर्म नगरी में आंवले के पेड़ का इतना महत्व बढ़ गया कि श्रद्धालुओं के लिए समाजसेवियों ने धर्मनगरी सहित विभिन्न स्थानों में आंवले के पेड़ लगाना ही शुरू कर दिया।