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एएमयू के पूर्व शोधार्थी यूसुफ को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से नवाजा

Thu, 25 Oct 2018 10:45 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 25 Oct 2018 10:45 PM IST
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CM Yogi Adityanath awarded Youth Scientific Award to Yusuf former Researcher of AMU
डॉ. यूसुफ कमाल को सम्मानित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
कानपुर: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान के पूर्व शोधार्थी डॉ. यूसुफ कमाल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से गुरुवार को लखनऊ के लोकभवन में हुए कार्यक्रम में नवाजा। उन्हें यह पुरस्कार मिलने से जाजमऊ निवासी परिजनों ने खुशी का इजहार किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश ने प्रदूषण की वजह से प्रभावित हुई मिट्टी में भी फसल की पैदावार को बढ़ाने के लिए किए गए शोध पर यूसुफ को पुरस्कार के लिए चुना है। इस श्रेणी में प्रदेश के पांच युवा वैज्ञानिक चुने गए हैं। 
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डॉ. यूसुफ के वनस्पति विज्ञान पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय 50 से अधिक शोध पत्रिका और कई शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। प्रदेश सरकार ने उन्हें यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) से बुलाकर सम्मानित किया। यूसुफ अभी यूएई यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर हैं। यूसुफ कमाल के चाचा फैयाज अहमद हलीम मुस्लिम पीजी कॉलेज में एकाउंटेंट पद से रिटायर हुए हैं। एएमयू ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन के सहायक सचिव और हलीम कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. तनवीर अख्तर ने बताया कि यूसुफ कमाल रहने वाले तो बिहार के सीवान जिले के हैं। उनकी ससुराल और परिवार के अधिकतर लोग जाजमऊ में रहते हैं। मुबारकबाद देने वालों में कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. शकील अहमद, मेजर शाहिद जफर, डॉ. शोएब अंसारी, फैयाज अहमद आदि शामिल हैं।
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ब्रेस्नोस्टीरॉयड से बढ़ाई उत्पादकता
डॉ. युसुफ कमाल ने अपने शोध में प्रदूषित जमीन के आसपास की मिट्टी और कम सिंचाई वाली सूखी मिट्टी में भी फसल को लगभग दोगुना कर दिया है। इसके लिए उन्होंने पांच मिलीलीटर प्लांट हारमोन (ब्रेस्नोस्टीरॉयड) को 20 लीटर पानी में घोलकर फसल की बोआई के वक्त प्रयोग किया। इसके बाद फसल की प्राकृतिक तौर पर उत्पादकता बढ़ी। डॉ. यूसुफ ने बताया कि गोदरेज कंपनी का कृषि विभाग इसका इस्तेमाल यूपी में कर रहा है और किसानों को उपलब्ध करा रहा है। इसके बेहतर नतीजे सामने आए हैं। कानपुर में फैक्ट्रियों और नाले के गंदे पानी की वजह से मिट्टी प्रभावित होती है। इससे खेती की पैदावार कम होती है। इस विधि से फसल की पैदावार बढ़ी है।
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