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जागा उपभोक्ता जागा: चेक पेमेंट न करने पर बैंक भरे रकम
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:36 PM IST
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कानपुर की जिला उपभोक्ता फोरम ने खाते में रुपये होने के बावजूद चेक का पेमेंट न करने पर खाताधारक को हुए दो हजार रुपये के नुकसान की भरपाई का आदेश दिया है। आठ प्रतिशत ब्याज और पांच हजार मुकदमा खर्च भी देना होगा।
विनायकपुर निवासी यतींद्र नाथ भार्गव ने बैंक मैनेजर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा पी रोड के खिलाफ मुकदमा दाखिल किया था। इसमें कहा गया था कि इस बैंक में उनका खाता 40 साल से है। उनके खाते में छह अगस्त 2014 को 54 हजार छह रुपये थे। शेयर मार्केट से आलोक इंडस्ट्रियल के एक हजार शेयर खरीदे थे। इसका भुगतान छह अगस्त 2014 को चेक से 11 हजार 920 रुपये किया था। खाते में पैसा होने के बावजूद बैंक ने चेक बिना भुगतान के वापस कर दिए थे। इस कारण कंपनी ने खरीदे गए शेयरों का भुगतान न होने से निरस्त कर दिए।
इस कारण उसे दो हजार रुपये का नुकसान हुआ। बैंक ने फोरम में अपना पक्ष रखा कि केवाईसी प्रमाणपत्र न दिए जाने के कारण उनके खाते में आटो होल्ड लगे होने से मानीटर पर बैलेंस नहीं दिखाया गया। इस कारण चेक वापस किए गए। फोरम अध्यक्ष डॉ. आरएन सिंह, सदस्य पुरुषोत्तम सिंह और सुधा यादव ने फैसला सुनाते हुए बैंक की दलील खारिज कर दी। कहा कि बैंक ने केवाईसी दाखिल करने के लिए वादी को भेजा पत्र बतौर सबूत नहीं रखा है। इसलिए यह बात नहीं मानी जा सकती।
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विनायकपुर निवासी यतींद्र नाथ भार्गव ने बैंक मैनेजर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा पी रोड के खिलाफ मुकदमा दाखिल किया था। इसमें कहा गया था कि इस बैंक में उनका खाता 40 साल से है। उनके खाते में छह अगस्त 2014 को 54 हजार छह रुपये थे। शेयर मार्केट से आलोक इंडस्ट्रियल के एक हजार शेयर खरीदे थे। इसका भुगतान छह अगस्त 2014 को चेक से 11 हजार 920 रुपये किया था। खाते में पैसा होने के बावजूद बैंक ने चेक बिना भुगतान के वापस कर दिए थे। इस कारण कंपनी ने खरीदे गए शेयरों का भुगतान न होने से निरस्त कर दिए।
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इस कारण उसे दो हजार रुपये का नुकसान हुआ। बैंक ने फोरम में अपना पक्ष रखा कि केवाईसी प्रमाणपत्र न दिए जाने के कारण उनके खाते में आटो होल्ड लगे होने से मानीटर पर बैलेंस नहीं दिखाया गया। इस कारण चेक वापस किए गए। फोरम अध्यक्ष डॉ. आरएन सिंह, सदस्य पुरुषोत्तम सिंह और सुधा यादव ने फैसला सुनाते हुए बैंक की दलील खारिज कर दी। कहा कि बैंक ने केवाईसी दाखिल करने के लिए वादी को भेजा पत्र बतौर सबूत नहीं रखा है। इसलिए यह बात नहीं मानी जा सकती।
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