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Kanpur News: कागजों में अभियान, वाहनों में ठूंसकर बिठा रहे बच्चे
Thu, 29 Oct 2026 01:38 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:38 AM IST
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कानपुर देहात। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस भले ही सेफ फ्यूचर अभियान चलाने का दावा कर रहा है लेकिन इसका असर सड़कों पर होता नजर नहीं आ रहा है। स्कूली बच्चों को घर से लाने व वापस लेकर जाने में उपयोग होने वाले वाहनों में मानकों की अनदेखी की जा रही है और बच्चों की जान से खिलवाड़ हो रहा है।
जनपद के सहायक संभागीय परिवहन विभाग कार्यालय में 610 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 426 बस व 184 मैक्सी कैब हैं लेकिन सड़कों पर इससे कहीं अधिक वाहन इस कार्य में लगे हुए हैं। चालक निजी वाहनों में बच्चों को घर से लेकर स्कूल पहुंचाते हैं और छुट्टी होने पर वापस पहुंचाते हैं। परिवहन आयुक्त ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेफ फ्यूचर अभियान चलाए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत मानकों की अनदेखी कर संचालित स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की जानी है। ऐसा नहीं है कि विभाग इसका पालन नहीं कर रहे हैं लेकिन सिर्फ कागजों तक।
बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो हाईवे हो या नगर की सड़क सभी जगह कुछ वाहन तो सभी मानकों को पूरा कर निकलते दिखाई दिए, जबकि कई चालक निजी वाहनों को स्कूली वाहन के रूप में चलाते मिले। उनमें न तो खिड़कियों पर सुरक्षा जाली लगी नजर आई और न ही उनमें अन्य मानक पूरे होते दिखाई दिए। वह सभी मुख्य चौराहों व मार्ग से होते हुए निकलते रहे, लेकिन चौराहों पर तैनात यातायात कर्मियों ने इन्हें रोकने की जहमत उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। शायद इन्हें किसी हादसे के होने का इंतजार है।
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रनियां, समय दोपहर 12:30 बजे
राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर रनियां में एक लोडर शेरपुर तरौंदा मार्ग की तरफ से आता नजर आया। वह तेजी से बिना रुके हाईवे पर पहुंचा और अकबरपुर की तरफ मुड़ गया। चालक ने उसमें पीछे स्कूली बच्चों को ठूस-ठूस कर बैठा रखा था, मानों जैसे वह भेड़-बकरियां हों। थोड़ी दूर उसका पीछा किया, तो वह आगे जाकर सरवनखेड़ा मार्ग पर मुड़ गया और तेजी से निकल गया। उसमें बैठे बच्चे खतरों से अनजान हंसते रहे, जबकि ऐसे में कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है।
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बाराजोड़, समय दोपहर 1:10 बजे
रनियां से आगे बढ़ने पर बाराजोड़ पहुंचते ही एक वैन अकबरपुर की तरफ से उल्टी दिशा में आता हुआ नजर आया। चालक ने उसमें स्कूली बच्चों को बैठा रखा था। वाहन की खिड़की में न तो सुरक्षा जाली ही लगी हुई थी और न ही वह पीले रंग से पेंट थी। कानपुर-इटावा हाईवे होने की वजह से मार्ग पर भारी व हल्के वाहन तेज गति से निकलते रहते हैं, लेकिन बेपरवाह चालक नियमों की अनदेखी करते हुए माती की तरफ जाने वाले हाईवे पर निकल गया।
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निष्क्रिय हैं विद्यालय सुरक्षा समितियां
हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने सभी स्कूलों में विद्यालय और परिवहन सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने और उनकी नियमित बैठकें सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं। इसके तहत हर तीन महीने में बच्चों की सुरक्षा संबंधी बैठक की जाती है। इसके प्रधानाचार्य अध्यक्ष व थाने का एसएचओ, चौकी प्रभारी, नायब तहसीलदार, बीईओ, डीआईओएस से नामित व्यक्ति और नगर निकाय से एक व्यक्ति सदस्य होते हैं। इनके निष्क्रिय होने का फायदा वाहन चालक उठा रहे हैं। एआरटीओ प्रवर्तन ने बताया कि सड़क से गुजरने वाले वाहनों पर विभाग से कार्रवाई की जाती है लेकिन इसमें सबसे बड़ी भूमिका स्कूल प्रबंधन की होती है। स्कूल आने व जाने के दौरान बच्चे किस वाहन से जा रहे हैं, यह उनकी जिम्मेदारी होती है। इसके लिए नोटिस भी भेजी जाती है।
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बयान.....
नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रहे स्कूली वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए अभिभावकों को भी जागरूक होने की जरूरत है। स्कूल लेकर जाने वाले वाहनों में सुरक्षा की दृष्टि से मानक पूरे हैं कि नहीं, इसकी जांच जरूर करनी चाहिए। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए प्रयोग किए जाने वाले वाहनों में मानक पूरे कराने के निर्देश दिए गए हैं। - रोहित राजपूत, एआरटीओ, प्रवर्तन
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जनपद के सहायक संभागीय परिवहन विभाग कार्यालय में 610 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 426 बस व 184 मैक्सी कैब हैं लेकिन सड़कों पर इससे कहीं अधिक वाहन इस कार्य में लगे हुए हैं। चालक निजी वाहनों में बच्चों को घर से लेकर स्कूल पहुंचाते हैं और छुट्टी होने पर वापस पहुंचाते हैं। परिवहन आयुक्त ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेफ फ्यूचर अभियान चलाए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत मानकों की अनदेखी कर संचालित स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की जानी है। ऐसा नहीं है कि विभाग इसका पालन नहीं कर रहे हैं लेकिन सिर्फ कागजों तक।
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बुधवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो हाईवे हो या नगर की सड़क सभी जगह कुछ वाहन तो सभी मानकों को पूरा कर निकलते दिखाई दिए, जबकि कई चालक निजी वाहनों को स्कूली वाहन के रूप में चलाते मिले। उनमें न तो खिड़कियों पर सुरक्षा जाली लगी नजर आई और न ही उनमें अन्य मानक पूरे होते दिखाई दिए। वह सभी मुख्य चौराहों व मार्ग से होते हुए निकलते रहे, लेकिन चौराहों पर तैनात यातायात कर्मियों ने इन्हें रोकने की जहमत उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। शायद इन्हें किसी हादसे के होने का इंतजार है।
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रनियां, समय दोपहर 12:30 बजे
राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर रनियां में एक लोडर शेरपुर तरौंदा मार्ग की तरफ से आता नजर आया। वह तेजी से बिना रुके हाईवे पर पहुंचा और अकबरपुर की तरफ मुड़ गया। चालक ने उसमें पीछे स्कूली बच्चों को ठूस-ठूस कर बैठा रखा था, मानों जैसे वह भेड़-बकरियां हों। थोड़ी दूर उसका पीछा किया, तो वह आगे जाकर सरवनखेड़ा मार्ग पर मुड़ गया और तेजी से निकल गया। उसमें बैठे बच्चे खतरों से अनजान हंसते रहे, जबकि ऐसे में कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है।
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बाराजोड़, समय दोपहर 1:10 बजे
रनियां से आगे बढ़ने पर बाराजोड़ पहुंचते ही एक वैन अकबरपुर की तरफ से उल्टी दिशा में आता हुआ नजर आया। चालक ने उसमें स्कूली बच्चों को बैठा रखा था। वाहन की खिड़की में न तो सुरक्षा जाली ही लगी हुई थी और न ही वह पीले रंग से पेंट थी। कानपुर-इटावा हाईवे होने की वजह से मार्ग पर भारी व हल्के वाहन तेज गति से निकलते रहते हैं, लेकिन बेपरवाह चालक नियमों की अनदेखी करते हुए माती की तरफ जाने वाले हाईवे पर निकल गया।
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निष्क्रिय हैं विद्यालय सुरक्षा समितियां
हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने सभी स्कूलों में विद्यालय और परिवहन सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने और उनकी नियमित बैठकें सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं। इसके तहत हर तीन महीने में बच्चों की सुरक्षा संबंधी बैठक की जाती है। इसके प्रधानाचार्य अध्यक्ष व थाने का एसएचओ, चौकी प्रभारी, नायब तहसीलदार, बीईओ, डीआईओएस से नामित व्यक्ति और नगर निकाय से एक व्यक्ति सदस्य होते हैं। इनके निष्क्रिय होने का फायदा वाहन चालक उठा रहे हैं। एआरटीओ प्रवर्तन ने बताया कि सड़क से गुजरने वाले वाहनों पर विभाग से कार्रवाई की जाती है लेकिन इसमें सबसे बड़ी भूमिका स्कूल प्रबंधन की होती है। स्कूल आने व जाने के दौरान बच्चे किस वाहन से जा रहे हैं, यह उनकी जिम्मेदारी होती है। इसके लिए नोटिस भी भेजी जाती है।
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बयान.....
नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रहे स्कूली वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए अभिभावकों को भी जागरूक होने की जरूरत है। स्कूल लेकर जाने वाले वाहनों में सुरक्षा की दृष्टि से मानक पूरे हैं कि नहीं, इसकी जांच जरूर करनी चाहिए। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए प्रयोग किए जाने वाले वाहनों में मानक पूरे कराने के निर्देश दिए गए हैं। - रोहित राजपूत, एआरटीओ, प्रवर्तन