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Buddha Purnima 2018: यूपी की इस ऐतिहासिक धरती पर 'स्वर्ग से उतरकर' आए थे महात्मा गौतम बुद्ध
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 30 Apr 2018 04:14 PM IST
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बुद्ध पूर्णिमा 2018 विशेष
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महात्मा गौतम बुद्ध ने देश और दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाया। उत्तर प्रदेश में भगवान बुद्ध से जुड़े अनेक स्थल हैं, जिसमें कुशीनगर, श्रावस्ती और संकिसा (फर्रुखाबाद) प्रमुख हैं। बुद्ध पूर्णिमा 2018 के मौके पर आज हम आपको संकिसा के बारे में बताने जा रहे हैं। संकिसा ही वही जगह जहां के लिए कहा जाता है कि भगवान गौतम बुद्ध यहां स्वर्ग की सीढ़ी से उतरकर धरती पर आए थे।
संकिशा अथवा संकिसा भारतवर्ष के उत्तर प्रदेश राज्य के फर्रूख़ाबाद जिले के पखना रेलवे स्टेशन से सात मील दूर काली नदी के तट पर बसा बौद्ध-धर्म स्थान है। इसका प्राचीन नाम संकाश्य है। कहते हैं बुद्ध भगवान स्वर्ग से उतर कर यहीं पर आये थे, बौद्ध धर्म के अनुयायी इसे अपना तीर्थ स्थान मानते है। तेरहवें तीर्थंकर विमलनाथजी का यह ज्ञान स्थान माना जाता है। वर्तमान में संकिसा एक टीले पर बसा छोटा सा गांव है। टीला बहुत दूर तक फैला हुआ है यह किला कहलाता है। किले के भीतर ईंटों के ढेर पर बिसहरी देवी का मन्दिर है, पास ही अशोक स्तम्भ का शीर्ष है जिस पर हाथी की मूर्ति निर्मित है, अराजकतत्वों ने हाथी की सूंड को तोड़ डाला है। भौगोलिक रूप से यह जनपद एटा जिले में आता है। कनिंघम ने अपनी कृति 'द एनशॅंट जिऑग्राफी ऑफ़ इण्डिया' में संकिसा का विस्तार से वर्णन किया है। संकिसा का उल्लेख महाभारत में किया गया है। उस समय यह नगर पांचाल की राजधानी कांपिल्य से अधिक दूर नहीं था। महाजनपद युग में संकिसा पांचाल जनपद का प्रसिद्ध नगर था। बौद्ध अनुश्रुति के अनुसार यह वही स्थान है जहां बुद्ध, इन्द्र एवं ब्रह्मा सहित स्वर्ण अथवा रत्न की सीढ़ियों से त्रयस्तृन्सा स्वर्ग से पृथ्वी पर आये थे। इस प्रकार गौतम बुद्ध के समय में भी यह एक ख्याति प्राप्त नगर था।
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संकिशा अथवा संकिसा भारतवर्ष के उत्तर प्रदेश राज्य के फर्रूख़ाबाद जिले के पखना रेलवे स्टेशन से सात मील दूर काली नदी के तट पर बसा बौद्ध-धर्म स्थान है। इसका प्राचीन नाम संकाश्य है। कहते हैं बुद्ध भगवान स्वर्ग से उतर कर यहीं पर आये थे, बौद्ध धर्म के अनुयायी इसे अपना तीर्थ स्थान मानते है। तेरहवें तीर्थंकर विमलनाथजी का यह ज्ञान स्थान माना जाता है। वर्तमान में संकिसा एक टीले पर बसा छोटा सा गांव है। टीला बहुत दूर तक फैला हुआ है यह किला कहलाता है। किले के भीतर ईंटों के ढेर पर बिसहरी देवी का मन्दिर है, पास ही अशोक स्तम्भ का शीर्ष है जिस पर हाथी की मूर्ति निर्मित है, अराजकतत्वों ने हाथी की सूंड को तोड़ डाला है। भौगोलिक रूप से यह जनपद एटा जिले में आता है। कनिंघम ने अपनी कृति 'द एनशॅंट जिऑग्राफी ऑफ़ इण्डिया' में संकिसा का विस्तार से वर्णन किया है। संकिसा का उल्लेख महाभारत में किया गया है। उस समय यह नगर पांचाल की राजधानी कांपिल्य से अधिक दूर नहीं था। महाजनपद युग में संकिसा पांचाल जनपद का प्रसिद्ध नगर था। बौद्ध अनुश्रुति के अनुसार यह वही स्थान है जहां बुद्ध, इन्द्र एवं ब्रह्मा सहित स्वर्ण अथवा रत्न की सीढ़ियों से त्रयस्तृन्सा स्वर्ग से पृथ्वी पर आये थे। इस प्रकार गौतम बुद्ध के समय में भी यह एक ख्याति प्राप्त नगर था।
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संकिसा का उल्लेख सेंग-क्यि-शी नाम से किया गया है
बुद्ध पूर्णिमा 2018 विशेष
महात्मा बुद्ध अपने प्रिय शिष्य आनन्द के कहने पर यहां आये व संघ में स्त्रियों की प्रवृज्या पर लगाई गई रोक को तोड़ा था और भिक्षुणी उत्पलवर्णा को दीक्षा देकर बौद्ध संघ का द्वार स्त्रियों के लिए खोल दिया गया था। बौद्ध ग्रंथों में इस नगर की गणना उस समय के बीस प्रमुख नगरों में की गयी है। प्राचीनकाल में यह नगर निश्चय ही काफी बड़ा रहा होगा क्योंकि इसकी नगर भित्ति के अवशेष जो आज भी हैं लगभग चार मील (लगभग 6.4 कि.मी.) की परिधि में हैं। चीनी यात्री फ़ाह्यान पाँचवीं शताब्दी के पहले दशक में यहां मथुरा से चलकर आया था और यहाँ से कान्यकुब्ज, श्रावस्ती आदि स्थानों पर गया था। उसने संकिसा का उल्लेख सेंग-क्यि-शी नाम से किया है। उसने यहां हीनयान और महायान सम्प्रदायों के एक हज़ार भिक्षुओं को देखा था। कनिंघम को यहाँ से स्कन्दगुप्त का एक चांदी का सिक्का मिला था। विशाल 'सिंह' प्रतिमा सातवीं शताब्दी में युवानच्वांग ने यहां 70 फुट ऊंचाई स्तम्भ देखा था, जिसे सम्राट अशोक ने बनवाया था। उस समय भी इतना चमकदार था कि जल से भीगा-सा जान पड़ता था। स्तम्भ के शीर्ष पर विशाल सिंह प्रतिमा थी। उसने अपने विवरण में इस विचित्र तथ्य का उल्लेख किया है कि यहाँ के विशाल मठ के समीप निवास करने वाले ब्राह्मणों की संख्या कई हज़ार थी।
विदेशी होटलों में ठहरते है
Buddha Purnima 2018
पर्यटन स्थल संकिसा से विदेशों तक फर्रुखाबाद जिले की पहचान है। इस स्थान पर हर महीने विदेशियों का आना जाना रहता है। इनके ठहरने के लिए बनवाए गए पर्यटन आवास गृह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इसका करीब एक साल से बकाएदारी में बिजली कनेक्शन कटा हुआ है। देखभाल न होेने से आवास गृह का बुरा हाल हो गया है। इस कारण विदेशी होटलों में ठहरते है। संकिसा में बौद्ध स्थल होने से इसकी ख्याति विदेशों तक है। इस धार्मिक स्थल पर लंका, वर्मा, इंडोनेशिया, जापान, चीन, सिंघापुर, थाईलैंड से लोग आते है। सरकार ने इसको पर्यटन स्थल घोषित किया है। विदेशियों को ठहराने के लिए पर्यटन विभाग ने करीब 16 कमरों का राही पर्यटक आवास गृह का निर्माण कराया था। इसके प्रत्येक कमरे में एसी लगाई गई थी। यहां पर सभी प्रकार की सुविधाएं थी, ताकि विदेशियों को ठहरने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। पर्यटन विभाग की अनदेखी के कारण आज पर्यटक आवास गृह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां कमरों में लगी एसी को वर्ष 2007 में हटा दिया गया। उनको कानपुर के रनिया और कन्नौज के पर्यटक आवास गृह में लगवा दिया गया।
यहां का विकास अभी भी अधूरा
बुद्ध पूर्णिमा 2018 विशेष
बिजली का बकाया होने पर विभाग ने करीब एक साल पूर्व कनेक्शन काट दिया था। जो भुगतान न होने के कारण अभी तक नहीं जुड़ा है। जनरेटर से यदा कदा बिजली की व्यवस्था होती है। इस आवास गृह की देखभाल को तीन कर्मचारी तैनात है। जो विदेशी आते है, वह पर्यटन विभाग के आवास गृह में ठहरने की बजाए होटलों में रूकते है। संकिसा तिराहे पर पीडब्लूडी विभाग का निरीक्षण भवन बना है। यहां सिर्फ अधिकारी आते और जाते है। फर्रुखाबाद पर्यटन स्थल संकिसा में विकास कराने का नेता दावा तो करते है, लेकिन उनको कभी पूरा नहीं करते है। इस कारण इसका विकास लटका हुआ है।
विदेशियों का आना-जाना लगा रहता है
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सपा सरकार ने अखिलेश यादव, भाजपा सरकार में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विकास कराने का दावा किया। यहां कब विकास की कवायद होगी, इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को तक नहीं है। पर्यटन स्थल संकिसा, जहां विदेशियों का आना जाना रहता है। इस क्षेत्र को गांव के रोस्टर के अनुसार बिजली मिलती है। कभी एक सप्ताह तक रात में, तो कभी एक सप्ताह तक दिन में बिजली की सप्लाई मिलती है। ग्रामीण रोस्टर से बिजली के कारण संकिसा क्षेत्र में स्थित होटल अधिकांश समय जनरेटर की लाइट से जगमगाते है।
पर्यटन अधिकारी भगवान दास बताते हैं कि संकिसा पर्यटन स्थल है। यहां राही पर्यटक आवास गृह बना हुआ है। जिसकी रंगाई पुताई करीब 2007 से नहीं हुई है। इसके लिए प्रदेश सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बिजली कनेक्शन जोड़ने के लिए बिजली विभाग के अफसरों को बिल सही करने के लिए पत्र लिखा है। प्रदेश सरकार संकिसा में विकास कराने की तैयारी कर रही है, लेकिन अभी कोई प्रस्ताव नहीं मांगा गया है।
पर्यटन अधिकारी भगवान दास बताते हैं कि संकिसा पर्यटन स्थल है। यहां राही पर्यटक आवास गृह बना हुआ है। जिसकी रंगाई पुताई करीब 2007 से नहीं हुई है। इसके लिए प्रदेश सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बिजली कनेक्शन जोड़ने के लिए बिजली विभाग के अफसरों को बिल सही करने के लिए पत्र लिखा है। प्रदेश सरकार संकिसा में विकास कराने की तैयारी कर रही है, लेकिन अभी कोई प्रस्ताव नहीं मांगा गया है।