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UP election 2022: भाजपा में सीटों को लेकर सियासी मंथन जारी, कई मंत्री-विधायकों का कट सकता है टिकट
Tue, 18 Jan 2022 05:11 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 18 Jan 2022 05:11 PM IST
सार
भाजपा में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की एक दर्जन विधानसभा सीटों पर लगातार मंथन जारी है। महानगर जनपद की दस विधानसभा सीटों में से छह सबसे अधिक चर्चा में हैं। इनमें से पांच विधानसभा सीटें शहरी और एक ग्रामीण क्षेत्र की है। जिनमें कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जहां के विधायक प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं।
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विधानसभा सीटों को लेकर भाजपा में सियासी मंथन जारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूपी विधानसभा चुनाव के दंगल में सियासी दल जिस तरह एक-दूसरे को लेकर उलझे हैं, ठीक उसी तरह से पार्टियों के अंदर भी शीतयुद्ध चल रहा है। सत्ताधारी दल भाजपा की बात की जाए तो कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की एक दर्जन विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जो इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इसे लेकर पार्टी के अंदर सबसे ज्यादा मंथन चल रहा है। इनमें कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जहां के विधायक प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं।
सूत्रों के अनुसार तमाम आकलन और सर्वे के आधार पर कमजोर मिली सीटों पर जीत हासिल करने के लिए पार्टी अपनी रणनीति को लगातार धार दे रही है। तीसरे चरण के प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद इन सीटों का समीकरण क्या होगा, यह अभी तक सामने नहीं आया है। वर्तमान में यही सीटें हैं, जो चर्चा का विषय बनी हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार महानगर जनपद की दस विधानसभा सीटों में से छह सबसे अधिक चर्चा में हैं। इनमें से पांच विधानसभा सीटें शहरी और एक ग्रामीण क्षेत्र की है। ग्रामीण क्षेत्र की सीट बिल्हौर पर वैसे तो वहां के विधायक ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उस स्थान पर कौन आएगा, यह बड़ा सवाल है।
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शहर की तीन सीटें ऐसी हैं, जो इस समय सत्ताधारी पार्टी के कब्जे में नहीं हैं। इन सीटों को जीतने के लिए पार्टी गुणा-भाग लगा रही है। इसके अलावा कानपुर देहात की चार में से तीन विधानसभा सीटें भी पार्टी के सीधे निशाने पर हैं।
इसी तरह कन्नौज की दो और औरैया व बांदा जिले की एक-एक विधानसभा सीटों पर भी बदलाव की चर्चा है। इनमें से किस सीट पर पार्टी किस तरह का फेरबदल करेगी, यह अभी तय नहीं हो पाया है। हालांकि, जिस तरह मंथन चल रहा है, उससे साफ है कि कुछ न कुछ नया करने कोशिश है।
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सूत्रों के अनुसार तमाम आकलन और सर्वे के आधार पर कमजोर मिली सीटों पर जीत हासिल करने के लिए पार्टी अपनी रणनीति को लगातार धार दे रही है। तीसरे चरण के प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद इन सीटों का समीकरण क्या होगा, यह अभी तक सामने नहीं आया है। वर्तमान में यही सीटें हैं, जो चर्चा का विषय बनी हैं।
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पार्टी सूत्रों के अनुसार महानगर जनपद की दस विधानसभा सीटों में से छह सबसे अधिक चर्चा में हैं। इनमें से पांच विधानसभा सीटें शहरी और एक ग्रामीण क्षेत्र की है। ग्रामीण क्षेत्र की सीट बिल्हौर पर वैसे तो वहां के विधायक ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उस स्थान पर कौन आएगा, यह बड़ा सवाल है।
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शहर की तीन सीटें ऐसी हैं, जो इस समय सत्ताधारी पार्टी के कब्जे में नहीं हैं। इन सीटों को जीतने के लिए पार्टी गुणा-भाग लगा रही है। इसके अलावा कानपुर देहात की चार में से तीन विधानसभा सीटें भी पार्टी के सीधे निशाने पर हैं।
इसी तरह कन्नौज की दो और औरैया व बांदा जिले की एक-एक विधानसभा सीटों पर भी बदलाव की चर्चा है। इनमें से किस सीट पर पार्टी किस तरह का फेरबदल करेगी, यह अभी तय नहीं हो पाया है। हालांकि, जिस तरह मंथन चल रहा है, उससे साफ है कि कुछ न कुछ नया करने कोशिश है।