सवालों के घेरे में पुलिस विभाग: ड्रग्स माफिया का करीबी रहा है मोहम्मद आसिफ, निलंबित दरोगा को लेकर बड़े खुलासे
अभी कुछ दिन पहले ही क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर मोहम्मद आसिफ की गैंगस्टर के साथ तस्वीर वायरल होने पर उसे निलंबित कर दिया गया था। ऐसे में पुलिस विभाग की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। वहीं, अब निलंबित दरोगा को लेकर एक बड़ा तथ्य उजागर हुआ है।
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टॉप-टेन अपराधी अंकित लाला से सांठगांठ में नपे क्राइम ब्रांच के दरोगा मोहम्मद आसिफ को लेकर एक और खुलासा हुआ है। ड्रग्स माफिया सुशील बच्चा का भी वह कारखास था। जब सुशील के खिलाफ सवा साल पहले पुलिस ने कार्रवाई की थी, तो कई पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच भी हुई थी। इसमें मोहम्मद आसिफ की मिलीभगत उजागर हुई थी। हैरानी की बात ये है कि उसके बाद भी उस पर अफसरों की मेहरबानी बरकरार रही। कमिश्नरी लागू होने के बाद क्राइम ब्रांच में तैनाती के साथ उसको सर्विलांस प्रभारी भी बना दिया गया।
काकादेव निवासी सुशील बच्चा बड़े पैमाने पर ड्रग्स की तस्करी करता था। पूरा खेल पुलिस की शह पर होता था। पिछले साल तत्कालीन डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने उस पर शिकंजा कसा था। गैंगस्टर के तहत कार्रवाई करते हुए उसके मकान पर बुलडोजर चलवाया था। ये मकान सेना की जमीन पर बना था। इस दौरान एक गोपनीय जांच कराई गई थी। जांच एसीपी बाबूपुरवा आलोक कुमार सिंह ने की थी, इसमें पाया गया था कि तत्कालीन स्वाट टीम की सुशील से मिलीभगत रही है, जिसके प्रभारी इंस्पेक्टर दिनेश यादव थे। दरोगा आसिफ भी उसमें शामिल था। इससे एक बात स्पष्ट है कि दरोगा की अपराधियों से सांठगांठ हमेशा से रही है।
हटाया, मगर फिर जमा ली धाक
डीआईजी प्रीतिंदर सिंह ने उस दौरान पूरी स्वाट टीम भंग कर दी थी, लेकिन, कुछ ही दिन बाद कमिश्नरी प्रणाली लागू हो गई थी। लिहाजा क्राइम ब्रांच में दरोगा की दोबारा एंट्री हो गई और उसको सबसे महत्वपूर्ण पद सर्विलांस प्रभारी का दे दिया गया। सवा साल से लगातार वह बतौर सर्विलांस प्रभारी के पद पर रहते हुए गुडवर्क कम अपराधियों के लिए ज्यादा काम करता रहा। सवाल है कि जब उस पर दाग लग चुका था, तो इस पर तैनाती क्यों की गई।
पैरवी करवा रहा, बहाली का प्रयास
सूत्रों के अनुसार एक शातिर अपराधी शहर के एक विधायक का करीबी है। ये अपराधी दरोगा का भी बेहद खास है, इसलिए वह विधायक के जरिये अफसरों से उनकी पैरवी करवा रहा है, जिससे वह बहाल हो सके। अब देखना होगा कि उच्चाधिकारी इस मामले में क्या करते हैं।