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बीडीएस डॉक्टरों को एमबीबीएस कराने की कवायद
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 10 Dec 2016 07:37 AM IST
सार
डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार को भेजा तीन वर्षीय ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव
इंडियन सोसाइटी फॉर डेंटल रिसर्च (आईएसडीआर) का 29वां वार्षिक सम्मेलन
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विस्तार
बीडीएस डिग्री वाले डॉक्टर एमबीबीएस की पढ़ाई भी करेंगे। डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई) ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया है कि तीन साल का एक ब्रिज कोर्स शुरू किया जाए, जिसे पूरा करने के बाद डेंटिस्ट को एमबीबीएस की डिग्री दी जाएगी। इस पर सरकार की शुरुआती सहमति मिल गई है। हालांकि अभी यह लंबी प्रक्रिया है। यह बात इंडियन सोसाइटी फॉर डेंटल रिसर्च(आईएसडीआर) के 29वें वार्षिक सम्मेलन में आए डीसीआई के चेयरमैन डॉ. डी मजूमदार ने शुक्रवार को कही।
डॉ. मजूमदार ने कहा कि जनवरी 2017 में मुंबई में होने वाली कार्यशाला में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद इसे फिर से भारत सरकार को भेजा जाएगा। सरकार से अनुमति मिली तो एक साल के अंदर ब्रिज कोर्स शुरू कर दिया जाएगा। इससे डेंटिस्ट को दोनों डिग्री मिल जाएंगी और वह सभी मरीजों का इलाज कर सकेंगे। ब्रिज कोर्स करने के बाद डेंटल सर्जन कम फिजीशियन डॉक्टर माना जाएगा। इससे एमबीबीएस चिकित्सकों की कमी पूरी होगी और ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने की मंशा भी पूरी हो सकेगी।
डॉ. मजूमदार ने बताया कि सभी डेंटल कॉलेजों को गांवों और मलिन बस्तियों के लोगों को दांतों का इलाज उपलब्ध कराने के लिए सेटेलाइट सेंटर खोलने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा प्रत्येक मेडिकल कॉलेज को दो गांवों में दंत चिकित्सा की सुविधा शुरू करने के लिए कहा गया है। अधिकतर डेंटल कॉलेजों ने इस लक्ष्य को पूरा किया है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को भी दांतों की बीमारियों से बचाना है। दांतों की बीमारियां ही दिल, माइग्रेन या फिर गंभीर संक्रमण का कारण बनती हैं।
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डेंटल कॉलेजों को कम्युनिटी सर्विसेज को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि दांत का मवाद केवल दांत तक ही सीमित नहीं रहता है। ज्यादा दिन रहने पर इसका संक्रमण खून के जरिये कई बीमारियों का कारण बनता है। दांतों के अंदर का मवाद एंटीबायोटिक से नहीं जाता है। इसके लिए रूट कैनाल व फिलिंग करनी पड़ती है। उत्तर प्रदेश में 32 व देश में 308 डेंटल कॉलेज हैं। अधिकतर ने दो-दो गांवों में दंत चिकित्सा की सुविधा शुरू कर दी है। इसे और बढ़ाया जाएगा।
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डॉ. मजूमदार ने कहा कि जनवरी 2017 में मुंबई में होने वाली कार्यशाला में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद इसे फिर से भारत सरकार को भेजा जाएगा। सरकार से अनुमति मिली तो एक साल के अंदर ब्रिज कोर्स शुरू कर दिया जाएगा। इससे डेंटिस्ट को दोनों डिग्री मिल जाएंगी और वह सभी मरीजों का इलाज कर सकेंगे। ब्रिज कोर्स करने के बाद डेंटल सर्जन कम फिजीशियन डॉक्टर माना जाएगा। इससे एमबीबीएस चिकित्सकों की कमी पूरी होगी और ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने की मंशा भी पूरी हो सकेगी।
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डॉ. मजूमदार ने बताया कि सभी डेंटल कॉलेजों को गांवों और मलिन बस्तियों के लोगों को दांतों का इलाज उपलब्ध कराने के लिए सेटेलाइट सेंटर खोलने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा प्रत्येक मेडिकल कॉलेज को दो गांवों में दंत चिकित्सा की सुविधा शुरू करने के लिए कहा गया है। अधिकतर डेंटल कॉलेजों ने इस लक्ष्य को पूरा किया है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को भी दांतों की बीमारियों से बचाना है। दांतों की बीमारियां ही दिल, माइग्रेन या फिर गंभीर संक्रमण का कारण बनती हैं।
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डेंटल कॉलेजों को कम्युनिटी सर्विसेज को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि दांत का मवाद केवल दांत तक ही सीमित नहीं रहता है। ज्यादा दिन रहने पर इसका संक्रमण खून के जरिये कई बीमारियों का कारण बनता है। दांतों के अंदर का मवाद एंटीबायोटिक से नहीं जाता है। इसके लिए रूट कैनाल व फिलिंग करनी पड़ती है। उत्तर प्रदेश में 32 व देश में 308 डेंटल कॉलेज हैं। अधिकतर ने दो-दो गांवों में दंत चिकित्सा की सुविधा शुरू कर दी है। इसे और बढ़ाया जाएगा।