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पुलिसवाले बोले, ‘ ये लो अपनी मां का कटा हाथ, जाओ इसी का करा लो क्रियाकर्म’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 03 Feb 2017 08:33 PM IST
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मजदूरों की तलाश में उनके परिजन भटक रहे हैं
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कहावत है कि पुलिस कुछ भी कर सकती है। बिना पोस्टमार्टम और डीएनए टेस्ट के दावा करने वाले किसी को भी डेड बॉडी सौंप सकती है। ऐसा ही काम कानपुर पुलिस ने शुक्रवार को किया और जाजमऊ हादसे के बाद मलबे में मिले हाथ को एक युवक सौंप दिया। कहा कि पकड़ो यह तुम्हारी मां का हाथ है। युवक ने भी पुलिस की बात सच मानकर हाथ का क्रिया कर्म कर दिया। जबकि अभी कई मजदूर गुम हैं।
जाजमऊ के गज्जूपुरवा में बुधवार को सपा नेता महताब आलम की अवैध निर्माणाधीन सात मंजिला इमारत ढह गई थी। हादसे में 10 मजदूरों की मौत हो गई थी। 21 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। राहत और बचाव कार्य के लिए जिला प्रशासन को सेना और एनडीआरएफ को बुलाना पड़ा था। बृहस्पतिवार को एनडीआरफ टीम को मलबे में मजदूर कृष्णा वैष्णवी का शव मिला था। उनका एक हाथ गायब था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। रात में मलबे में एक हाथ मिला। इसे पुलिस को सौंप दिया। शुक्रवार सुबह पुलिस ने कृष्णा के बेटे भूपेंद्र को बुलाया और कहा कि यह पकड़ो अपनी मां का हाथ। भूपेंद्र ने मां का हाथ पहचानने के इनकार भी किया, लेकिन पुलिस ने उसकी नहीं सुनी। दोपहर बाद भूपेंद्र ने जाजमऊ स्थित सिद्वनाथ घाट में मां के शव के साथ हाथ का भी क्रिया-कर्म कर दिया। भूपेंद्र का कहना है कि पुलिस ने जो हाथ दिया, उसकी मां का था और किसी और का। उसे नहीं मासूम। जबकि नियमानुसार लावारिस मिले शरीर के किसी भी अंग का पोस्टमार्टम और डीएनए टेस्ट कराया जाना जरूरी है। चकेरी पुलिस ने इस निमय की अनदेखी कर मलबे में मिले हाथ को निर्मला का बता उसके बेटे को सौंप दिया।
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जाजमऊ के गज्जूपुरवा में बुधवार को सपा नेता महताब आलम की अवैध निर्माणाधीन सात मंजिला इमारत ढह गई थी। हादसे में 10 मजदूरों की मौत हो गई थी। 21 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। राहत और बचाव कार्य के लिए जिला प्रशासन को सेना और एनडीआरएफ को बुलाना पड़ा था। बृहस्पतिवार को एनडीआरफ टीम को मलबे में मजदूर कृष्णा वैष्णवी का शव मिला था। उनका एक हाथ गायब था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। रात में मलबे में एक हाथ मिला। इसे पुलिस को सौंप दिया। शुक्रवार सुबह पुलिस ने कृष्णा के बेटे भूपेंद्र को बुलाया और कहा कि यह पकड़ो अपनी मां का हाथ। भूपेंद्र ने मां का हाथ पहचानने के इनकार भी किया, लेकिन पुलिस ने उसकी नहीं सुनी। दोपहर बाद भूपेंद्र ने जाजमऊ स्थित सिद्वनाथ घाट में मां के शव के साथ हाथ का भी क्रिया-कर्म कर दिया। भूपेंद्र का कहना है कि पुलिस ने जो हाथ दिया, उसकी मां का था और किसी और का। उसे नहीं मासूम। जबकि नियमानुसार लावारिस मिले शरीर के किसी भी अंग का पोस्टमार्टम और डीएनए टेस्ट कराया जाना जरूरी है। चकेरी पुलिस ने इस निमय की अनदेखी कर मलबे में मिले हाथ को निर्मला का बता उसके बेटे को सौंप दिया।
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