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सेना की पांच हजार करोड़ की जमीन पर कब्जा, सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा

Wed, 22 May 2019 12:51 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 22 May 2019 12:51 PM IST
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Army land occupy of five thousand crores in kanpur
विराट नगर में सेना की जमीन पर सालों से कब्जा है। - फोटो : अमर उजाला
सेना की कानपुर के कैंट क्षेत्र के अलावा अलग-अलग हिस्सों में करीब 68 एकड़ ए वन लैंड (जो जमीन सिर्फ सेना की होती है) पर अवैध कब्जा है। इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 4-5 हजार करोड़ है। सेना की ओर से कराए गए सर्वे में यह खुलासा हुआ है। वहीं सेना अपनी इन जमीनों को बचाने के लिए तेजी से कार्रवाई कर रही है।
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इन जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे करीब ढाई हजार लोगों को नोटिस भेजा गया है। पीपी (लोक परिसर अनाधिकृत अधिभोगी बेदखल अधिनियम 1971) एक्ट के तहत भेजे गए नोटिस में कब्जेदारों को सेना की ए वन लैंड से हटने के लिए कहा गया है। सूत्रों ने बताया कि कैंट क्षेत्र के ही भगवत दास घाट, भज्जा पुरवा, अग्रसेन व्यायाम शाला के आसपास, गुप्तार घाट, बंगला नंबर 87, कर्मचारी भवन, विराट नगर, उदय नगर, मछरिया आदि पर हजारों लोगों ने कब्जा कर रखा है। इनमें से अग्रसेन व्यायामशाला के आसपास स्थित क्षेत्र व बंगला नंबर 87 में अवैध कब्जाधारियों को तेजी से हटाया जा रहा है।
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सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि सेना की ए वन लैंड पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को जल्द से जल्द हटाकर रिपोर्ट दी जाए। बता दें कि सोमवार को मध्य कमान पीआरओ बीबी पांडेय ने कहा था कि सेना कानपुर छावनी स्थित अपनी जमीनों के अवैध कब्जे से मुक्त कराएगी। इस बाबत सेना ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। अवैध कब्जाधारियों को पूरी तरह से सेना की ए वन लैंड से हटाया जाएगा।
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लखनऊ में रहता सेना की जमीन का रिकार्ड
कानपुर। लखनऊ स्थित रक्षा संपदा विभाग के पास सेना की भूमि संबंधी दस्तावेज होते हैं। यहां पर विभाग से जुड़े अधिकारी जमीनों का चिन्हांकन करते हैं। दरअसल ग्राउंड लेवल रजिस्टर (जीएलआर) में जमीनों का ब्योरा दर्ज रहता है। सेना के पास यह जीएलआर आजादी से पूर्व और आजादी के बाद तक के हैं। इसी आधार पर सेना अपनी जमीनों का चिन्हांकन करता है।

15 साल पहले यहां शिफ्ट होनी थी मौरंग मंडी
केडीए ने वर्ष 2005-06 में केशव नगर से उदय नगर और विराट नगर में मौरंग मंडी शिफ्ट करने का प्लान किया था। प्लान पर तत्कालीन केडीए सचिव के हस्ताक्षर भी है, लेकिन उचित जगह न होने पर मौरंग कारोबारियों ने यहां आने से इनकार कर दिया था। इसके बाद बिनगवां में मौरंग मंडी शिफ्ट किए जाने का प्लान हुआ था।

नगर निगम, केडीए की भूमिका भी संदिग्ध
सूत्रों ने बताया कि इस क्षेत्र में बने आलीशान लॉन में नगर निगम और केडीए अफसरों की भी मिली भगत है। नक्शा आदि पास कराने में विभाग के अफसरों को यह जानकारी थी कि जमीन सेना की ए वन लैंड है। इसके बाद भी नक्शा आदि पास कर दिए गए। जो कई तरह के सवाल खड़े करता है।

जल्दी-जल्दी बदल जाते हैं सेना के अफसर
सेना की कैंट यूनिट में आने वाले अधिकारी बहुत अधिक समय के लिए तैनात नहीं किए जाते हैं। तीन साल या उससे कम समय में अफसरों को अलग-अलग यूनिटों में भेजा जाता है। सेना के बाद स्थानीय स्तर पर जमीन के रिकार्ड न होने से भी सेना को इस तरह होने वाले कब्जों की जानकारी नहीं हो पाती है।
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