{"_id":"6a9dd3c56cb434dab20a7c37","slug":"aradhya-a-helper-of-the-needy-honored-in-udaipur-kanpur-news-c-12-1-knp1051-1642330-2026-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: जरूरतमंदों की मददगार आराध्या को उदयपुर में मिला सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: जरूरतमंदों की मददगार आराध्या को उदयपुर में मिला सम्मान
विज्ञापन
कानपुर। महज छह साल की उम्र में कोरोना संक्रमण से पिता को खोने वाली आराध्या त्रिपाठी जरूरतमंदों का सहारा बनी हैं। इंस्टाग्राम पर उनकी मदद के वीडियो देखने के बाद नारायण सेवा संस्थान उदयपुर ने उन्हें दो सितंबर को ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवार्ड 2026 से सम्मानित किया। सोशल क्रिएटर आराध्या वहां मुख्य अतिथि के रूप में भी आमंत्रित की गई थीं।
आराध्या ऑक्सफोर्ड स्कूल श्याम नगर में कक्षा पांच की छात्रा है। मां आरती त्रिपाठी कहती हैं कि कोरोना में आराध्या के पिता की मौत हुई थी। उस समय घर की स्थिति ठीक नहीं थी। कई लोगों से मदद मांगी, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। आराध्या को उस दौरान का संघर्ष याद रहा। बेटी जैसे-जैसे बड़ी हुई, उसमें जरूरतमंदों की मदद करने का जज्बा बढ़ता गया। जब भी किसी रिक्शा चालक, फेरी वाले या मंदिर में बैठे जरूरतमंद को देखती तो उन्हें अपने पास से कुछ न कुछ दान कर देती। उसके मामा मनीष चतुर्वेदी ने पूरा सहयोग किया। परिस्थितियां कितनी भी विपरीत रही हो बेटी ने हिम्मत बनाए रखी और जरूरतमंदों की मदद की।
विज्ञापन
आराध्या ऑक्सफोर्ड स्कूल श्याम नगर में कक्षा पांच की छात्रा है। मां आरती त्रिपाठी कहती हैं कि कोरोना में आराध्या के पिता की मौत हुई थी। उस समय घर की स्थिति ठीक नहीं थी। कई लोगों से मदद मांगी, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। आराध्या को उस दौरान का संघर्ष याद रहा। बेटी जैसे-जैसे बड़ी हुई, उसमें जरूरतमंदों की मदद करने का जज्बा बढ़ता गया। जब भी किसी रिक्शा चालक, फेरी वाले या मंदिर में बैठे जरूरतमंद को देखती तो उन्हें अपने पास से कुछ न कुछ दान कर देती। उसके मामा मनीष चतुर्वेदी ने पूरा सहयोग किया। परिस्थितियां कितनी भी विपरीत रही हो बेटी ने हिम्मत बनाए रखी और जरूरतमंदों की मदद की।
विज्ञापन