स्नान, दान और तर्पण के लिए अमावस्या की तिथि का बहुत महत्व होता है। इस बार भाद्रपद मास की स्नान, श्राद्ध और दान की अमावस्या नौ सितंबर को है। इस दिन गंगा स्नान करना विशेष फलदायी है।
आचार्य पवन तिवारी और आचार्य गौरव शुक्ला ने बताया कि प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि का अपना विशेष महत्व होता है। भाद्रपद मास की अमावस्या की भी अपनी खासियत है। इस माह की अमावस्या पर धार्मिक कार्यों के लिए कुश एकत्रित की जाती है।
मान्यता है कि धार्मिक कार्यों जैसे श्राद्ध, कर्म आदि में इस्तेमाल की जाने वाली कुश यदि इस दिन एकत्रित की जाए तो वह वर्ष भर तक फलदायी होती है। यदि भाद्रपद अमावस्या सोमवार के दिन हो तो इस कुश का प्रयोग 12 सालों तक किया जा सकता है। कुश एकत्रित करने के कारण ही इसे कुशग्रहणी अमावस्या कहा जाता है।
आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि कुश एकत्रित करने के लिहाज से ही भाद्रपद मास की अमावस्या का महत्व तो है ही, साथ ही इस दिन को पिथौरा अमावस्या भी कहा जाता है। पिथौरा अमावस्या को देवी दुर्गा की पूजा की जाती है।
इस बारे में पौराणिक मान्यता भी है कि इस दिन माता पार्वती ने इंद्राणी को इस व्रत का महत्व बताया था। विवाहित स्त्रियां संतान प्राप्ति एवं अपनी संतान के कुशल मंगल के लिए उपवास करती हैं और देवी दुर्गा सहित अन्य देवियों की पूजा की जाती है।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- अमावस्या को भूलकर भी न करें ये काम...