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एचडीएफसी गोल्ड लोन घोटाला के मामले में बैंक अधिकारियों ने लिया एक और बड़ा फैसला

Sat, 05 Jan 2019 05:27 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 05 Jan 2019 05:27 PM IST
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All gold kept in HDFC will be examined
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कानपुर के एचडीएफसी बैंक की सिविल लाइंस और गोविंद नगर शाखा में नकली सोना रखकर गोल्ड लोन लेने का खुलासा होने के बाद बैंक में रखे सभी बंधक सोने की जांच होगी। बैंक ने सभी शाखाओं में गोल्ड लोन का स्पेशल ऑडिट कराने का फैसला लिया है। फिलहाल जांच सिविल लाइंस और गोविंद नगर शाखाओं पर केंद्रित है।
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एचडीएफसी बैंक के सूत्र बताते हैं कि इन दोनों शाखाओं में अब तक 35 गोल्ड लोन खाते संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें से 30 खातों की जांच की जा चुकी है। इसमें करीब सवा दो करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। पांच-छह खातों की और जांच होनी है। इन लोन खातों के मालिक बैंक के बुलाने पर भी नहीं आए। इस वजह से इनके बंधक सोने का पैकेट नहीं खोला जा सका है। बैंक के अधिकारियों का मानना है कि सभी गोल्ड लोन खातों में फर्जीवाड़ा हुआ तो फर्जीवाड़े की वास्तविक रकम ढाई करोड़ रुपये के आसपास होगी।
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लोन लेने के बाद जमा नहीं कीं किस्तें

बैंक के सूत्र बताते हैं सिविल लाइंस और गोविंद नगर शाखा के करीब एक दर्जन गोल्ड लोन खाताधारकों ने लोन लेने के बाद बैंक में एक भी किस्त जमा नहीं की। पूरा साल बीतने तक बैंक ने इन खाताधारकों से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया। नोटिस भेजे। बैंक में बंधक रखे आभूषणों को नीलाम करके लोन की रकम वापस लेने की बात कही। इस सब के बावजूद खाताधारक लोन की किस्तें जमा करने नहीं आए।

इस पर बैंक के अफसरों को संदेह हुआ। अभी दिसंबर के अंत में बैंक में आंतरिक ऑडिट शुरू हुआ तो बैंक के अफसरों ने इस बात की जानकारी ऑडिटर को दी। ऑडिटर की मौजूदगी में बंधक रखे आभूषणों को खोलकर देखा गया तो असलियत सामने आई। बंधक रखे आभूषण नकली थे। इस पर बैंक के अफसरों को समझने में देर न लगी कि किन कारणों से लोन की एक भी किस्त जमा नहीं की गई।
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थर्ड पार्टी के दखल की वजह से होते हैं वैल्यूअर

बैंकिंग की व्यवस्था है कि जमीन या अन्य कीमती वस्तु गिरवी रखकर लोन लेने के मामले में थर्ड पार्टी का दखल बना रहे ताकि बैंक पर यह आरोप न लग सके कि अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी से लोन खारिज कर दिया या स्वीकार कर दिया। इसी कारण होम लोन मामले में संपत्ति का कानूनी पक्ष देखने का जिम्मा वकीलों के पास होता है। इसी तरह गोल्ड लोन मामले में कीमत और शुद्धता परखने का जिम्मा वैल्यूअर का होता है।

बैंक उन्हीं वैल्यूअर को नियुक्त करता है जो सरकार से मान्यता प्राप्त (गवर्नमेंट अप्रूव्ड) होते हैं। इसके बदले में बैंक इन्हें कमीशन देता है। बैंकिंग की यह व्यवस्था एचडीएफसी बैंक में कारगर साबित नहीं हुई। सरकार से मान्यता प्राप्त वैल्यूअर ने ही बैंक को चपत लगा दी।
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