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जिंदा किसान को मृत दिखा हड़पी 14 बीघा जमीन
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 08 Oct 2016 12:30 AM IST
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महोबा में जालसाजी के चलते एक युवक ने अपने पिता की जगह जिंदा पड़ोसी को मुर्दा दिखाकर किसान की 14 बीघा जमीन की वरासत करा ली। वहीं, जमीन का असली हकदार जिंदा होने का प्रमाण लेकर अधिकारियों की चौखट के चक्कर लगा रहा है। शुक्रवार को किसान ने मुख्यमंत्री और डीएम को शिकायती पत्र भेज न्याय की गुहार लगाई है। किसान ने न्याय न मिलने पर आमरण अनशन का ऐलान किया है।
मामला सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम सिरसीकला का है। यहां हरीशंकर पुत्र जगन्नाथ यादव रहते हैं। जगन्नाथ यादव के पिता चेता की मृत्यु 30 वर्ष पहले हो गई थी। इन्हीं के पड़ोस में 14 बीघा जमीन के मालिक जगन्नाथ पुत्र सुक्खा यादव रहते हैं। हरीशंकर ने इस जमीन को हथियाने के लिए अभिलेखी जालसाजी की, और एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया।
इस मृत्यु प्रमाण पत्र में उसने अपने पिता जगन्नाथ पुत्र चेता के स्थान पर पड़ोसी किसान जगन्नाथ पुत्र सुक्खा यादव का नाम दर्ज कराया। इसके बाद हरीशंकर ने स्वयं को जमीन का वारिस बताया। उसने आवश्यक कूटरचित अभिलेख राजस्व विभाग में भी दाखिल कर दिए। तहसीलदार के आदेश पर पांच मार्च 2016 को जगन्नाथ पुत्र सुक्खा को मृतक बताकर 14 बीघा जमानी की वरासत करा ली।
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मामले की जानकारी जगन्नाथ पुत्र सुक्खा को तब हुई जब वह खरीफ की बुआई के लिए खेत जोतने पहुंचा। जहां हरीशंकर आ धमका और जमीन पर अपना हक बताते हुए खेत जोतने से मना कर दिया। किसान अपने नाती के साथ तहसील पहुंचा और अभिलेखों की नकल ली तो जालसाजी के सहारे उसे मृत दर्शाकर वरासत कराए जाने की जानकारी हुई। तीन माह से जगन्नाथ पुत्र सुक्खा स्वयं के जीवित होने का प्रमाणपत्र और जमीनी अभिलेख लेकर अफसरों की चौखट पर भटक रहा है।
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मामला सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम सिरसीकला का है। यहां हरीशंकर पुत्र जगन्नाथ यादव रहते हैं। जगन्नाथ यादव के पिता चेता की मृत्यु 30 वर्ष पहले हो गई थी। इन्हीं के पड़ोस में 14 बीघा जमीन के मालिक जगन्नाथ पुत्र सुक्खा यादव रहते हैं। हरीशंकर ने इस जमीन को हथियाने के लिए अभिलेखी जालसाजी की, और एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया।
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इस मृत्यु प्रमाण पत्र में उसने अपने पिता जगन्नाथ पुत्र चेता के स्थान पर पड़ोसी किसान जगन्नाथ पुत्र सुक्खा यादव का नाम दर्ज कराया। इसके बाद हरीशंकर ने स्वयं को जमीन का वारिस बताया। उसने आवश्यक कूटरचित अभिलेख राजस्व विभाग में भी दाखिल कर दिए। तहसीलदार के आदेश पर पांच मार्च 2016 को जगन्नाथ पुत्र सुक्खा को मृतक बताकर 14 बीघा जमानी की वरासत करा ली।
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मामले की जानकारी जगन्नाथ पुत्र सुक्खा को तब हुई जब वह खरीफ की बुआई के लिए खेत जोतने पहुंचा। जहां हरीशंकर आ धमका और जमीन पर अपना हक बताते हुए खेत जोतने से मना कर दिया। किसान अपने नाती के साथ तहसील पहुंचा और अभिलेखों की नकल ली तो जालसाजी के सहारे उसे मृत दर्शाकर वरासत कराए जाने की जानकारी हुई। तीन माह से जगन्नाथ पुत्र सुक्खा स्वयं के जीवित होने का प्रमाणपत्र और जमीनी अभिलेख लेकर अफसरों की चौखट पर भटक रहा है।