कार्रवाई या मजाक: 26 करोड़ की टैक्स बकायेदारी पर जेड स्क्वायर में सील का ड्रामा, अधिकारियों की मिलीभगत...?
मॉल के अंदर और बाहर मौजूद न तो नगर निगम अधिकारियों को यह खेल नजर आया और न ही पुलिस अधिकारियों को। मतलब सीलिंग की कार्रवाई के नाम पर ड्रामा ही चलता रहा।
विस्तार
मॉल के अंदर और बाहर मौजूद न तो नगर निगम अधिकारियों को यह खेल नजर आया और न ही पुलिस अधिकारियों को। मतलब सीलिंग की कार्रवाई के नाम पर ड्रामा ही चलता रहा। कार्रवाई के बाद हकीकत जानने के लिए संवाददाता जब मौके पर पहुंचा तो हालात दावे से एकदम उलट थे। मॉल के भीतर के सभी शोरूम, दुकानें, रेस्टोरेंट आदि खुले थे। बड़ी बात यह है कि सभी जगह ग्राहक भी नजर आए। मॉल में चप्पे चप्पे पर बाउंसर तैनात थे, जो फोटो खींचने से मना कर रहे थे।
कर्मचारियों के लिए खुला छोड़ा गेट, मिलती रही सभी को एंट्री
अपर नगर आयुक्त रोली गुप्ता और अरविंद राय मॉल के बाहर पहुंचे और पुलिस बल को बुलाया। मॉल के अंदर से कर्मचारियों को बाहर निकाला और सभी गेट सील कर दिए। गेट नंबर छह कर्मचारियों के बाहर निकलने के लिए खुला छोड़ा गया। यहां नोटिस भी चस्पा था कि बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित है। एक पत्र कोतवाली के एसीपी और इंस्पेक्टर को भी दिया गया। हालांकि यह सब दिखावा ही रहा। चर्चा रही कि कार्रवाई के चंद घंटों बाद अधिकारियों के पास पैकेट पहुंच गए और पूरे मामले को कम से कम पैसों में निपटाने की सेटिंग भी चलती रही।
मॉल को सील किया गया है। सील होने के बाद भी मॉल खुला होने की जानकारी मिली है। कर्मचारियों को भेजकर सबूत लाने को कहा गया है। पुलिस को सुबह ही पत्र दे दिया गया था।
रोली गुप्ता, अपर नगर आयुक्त
नगर निगम के अधिकारियों ने मॉल को सील किया है। नियम के विरुद्ध अगर कोई काम हो रहा है तो नगर निगम के अधिकारी बताएं, कार्रवाई की जाएगी।
वृज नारायण, एसीपी कोतवाली