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‘एलर्जी की सही पहचान के बाद ही करें इलाज’
Kanpur
Updated Sat, 22 Nov 2014 05:30 AM IST
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कानपुर। ‘बच्चों में एलर्जी की सही पहचान के बाद ही डॉक्टर्स को इलाज करना चाहिए क्योंकि आमतौर पर डॉक्टर एलर्जी के कारणों की पहचान किए बिना सबको एक ही तरह की दवाएं देते हैं। इससे न तो मरीज को एलर्जी के कारणों का पता चल पाता है और न ही वह पूरी तरह ठीक हो पाता है।’ ये बातें शुक्रवार को यूपी पेडिकॉन 2014 में शामिल होने सेवन एयरफोर्स हॉस्पिटल आए अपोलो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल चेन्नई के हेड, सविता मेडिकल कॉलेज चेन्नई के डायरेक्टर, वीएन एलर्जी अस्थमा रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर और पीडियाट्रिक एलर्जी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मेजर डॉ. के नागराजू ने ‘अमर उजाला’ ने बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि बच्चों में बढ़ती एलर्जी और अस्थमा का मुख्य कारण शहरीकरण हैं। घर में सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पा रही है। नाक की एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नाक बहने से रोकने को डॉक्टर एंटीबायोटिक्स और कुछ अन्य दवाओें का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इसका कारण नहीं पता लगाते। डॉ. के नागराजू ने कहा कि विशेष तकनीक से एलर्जी के कारकों को बच्चे के स्किन पर रखकर पहचान की जाती है। पहचान के बाद एलर्जी के उपचार की संबंधित दवा निर्धारित मात्रा में तैयार कर ड्राप के माध्यम से बच्चे को दी जाती है। साथ ही बच्चे व उसके परिजनों को एलर्जी के कारणों को बताकर उससे बचने की सलाह दी जाती है। बच्चों में एलर्जी और अस्थमा के स्पेशलिस्ट डॉ. के नागराजू इन दिनों हर जिले में दो बाल रोग विशेषज्ञों को एलर्जी की पहचान और उसके लिए दवाओं के डोज की ट्रेनिंग दे रहे हैं। अब तक डॉ. नागराजू 80 वर्कशॉप कर चुके हैं। उनका लक्ष्य कम से कम 500 वर्कशॉप कर डॉक्टरों को इससे जोड़ने का है।
एलर्जी के कारण
चॉकलेट, दूध, काक्रोच, धूल, धुआं, क्वायल, पोलन ग्रेन, खाना, दवा आदि।
सलाह
कमरे में सूरज की रोशनी पहुंचने दें, भीगे कपड़े से फर्श को साफ करें, कारपेट न रखें तो ही बेहतर, बेडशीट्स को सूरज की रोशनी में सुखा कर ही इस्तेमाल करें, जिस चीज से एलर्जी हो उसे बचकर रहें।
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उन्होंने कहा कि बच्चों में बढ़ती एलर्जी और अस्थमा का मुख्य कारण शहरीकरण हैं। घर में सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पा रही है। नाक की एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नाक बहने से रोकने को डॉक्टर एंटीबायोटिक्स और कुछ अन्य दवाओें का इस्तेमाल करते हैं लेकिन इसका कारण नहीं पता लगाते। डॉ. के नागराजू ने कहा कि विशेष तकनीक से एलर्जी के कारकों को बच्चे के स्किन पर रखकर पहचान की जाती है। पहचान के बाद एलर्जी के उपचार की संबंधित दवा निर्धारित मात्रा में तैयार कर ड्राप के माध्यम से बच्चे को दी जाती है। साथ ही बच्चे व उसके परिजनों को एलर्जी के कारणों को बताकर उससे बचने की सलाह दी जाती है। बच्चों में एलर्जी और अस्थमा के स्पेशलिस्ट डॉ. के नागराजू इन दिनों हर जिले में दो बाल रोग विशेषज्ञों को एलर्जी की पहचान और उसके लिए दवाओं के डोज की ट्रेनिंग दे रहे हैं। अब तक डॉ. नागराजू 80 वर्कशॉप कर चुके हैं। उनका लक्ष्य कम से कम 500 वर्कशॉप कर डॉक्टरों को इससे जोड़ने का है।
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एलर्जी के कारण
चॉकलेट, दूध, काक्रोच, धूल, धुआं, क्वायल, पोलन ग्रेन, खाना, दवा आदि।
सलाह
कमरे में सूरज की रोशनी पहुंचने दें, भीगे कपड़े से फर्श को साफ करें, कारपेट न रखें तो ही बेहतर, बेडशीट्स को सूरज की रोशनी में सुखा कर ही इस्तेमाल करें, जिस चीज से एलर्जी हो उसे बचकर रहें।
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