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कूटा का गतिरोध खत्म, इस्तीफे वापस
Kanpur
Updated Wed, 23 Apr 2014 05:32 AM IST
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कूटा का गतिरोध खत्म, इस्तीफे वापस
- अब हर तीसरे महीने होगी कार्यकारिणी की मीटिंग
- अध्यक्ष, महामंत्री ने गलती स्वीकारी, कार्यकाल पूरा होगा
अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर। कार्यकारिणी की मीटिंग न बुलाए जाने और टीचर्स की समस्याओं को लेकर गंभीर न होने को लेकर चल रहा कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) का गतिरोध रविवार को खत्म हो गया है। कार्यकारिणी की मीटिंग के बाद वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. बीडी पांडेय सहित 26 पदाधिकारी, सदस्यों ने अपने इस्तीफे वापस ले लिए हैं। तय हुआ है कि हर तीसरे महीने कूटा कार्यकारिणी की मीटिंग होगी। इसमें टीचर्स की समस्याओं पर चर्चा और उसके निराकरण की रणनीति बनाई जाएगी। कूटा के रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के महामंत्री और मीडिया प्रभारी डॉ. एमपी सिंह को दी गई है।
डीबीएस पीजी कॉलेज हाल में रविवार को कूटा कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण मीटिंग हुई है। फुपुक्टा महामंत्री डॉ. विवेक द्विवेदी, कूटा अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह और महामंत्री डॉ. देवेंद्र अवस्थी की अध्यक्षता वाली मीटिंग हंगामेदार रही है। कई सदस्यों ने मीटिंग न बुलाए जाने को लेकर नाराजगी जताई। इस पर अध्यक्ष, महामंत्री ने गलती मानी और भरोसा दिलाया कि अब मीटिंग बुलाने में देरी नहीं होगी। सहमति बनने के बाद सभी सदस्यों ने इस्तीफा वापस ले लिया है। इसी दौरान टीचर्स के टीए, डीए का मसला भी उठाया गया। कहा गया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन कॉपी जांचने वाले टीचर्स को परेशान करने पर आमादा है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कूटा कार्यकारिणी ने ग्रेजुएशन के छह पेपर को आब्जेक्टिव किए जाने का विरोध किया। कहा कि आब्जेक्टिव पेपर से शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित हुई है। यह व्यवस्था समाप्त की जानी चाहिए। इस मौके पर डॉ. श्यामजी श्रीवास्तव, डॉ. विजय खरे, डॉ. आनंद शुक्ला, डॉ. लाल चंद्र शर्मा सहित तमाम शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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- अब हर तीसरे महीने होगी कार्यकारिणी की मीटिंग
- अध्यक्ष, महामंत्री ने गलती स्वीकारी, कार्यकाल पूरा होगा
अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर। कार्यकारिणी की मीटिंग न बुलाए जाने और टीचर्स की समस्याओं को लेकर गंभीर न होने को लेकर चल रहा कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) का गतिरोध रविवार को खत्म हो गया है। कार्यकारिणी की मीटिंग के बाद वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. बीडी पांडेय सहित 26 पदाधिकारी, सदस्यों ने अपने इस्तीफे वापस ले लिए हैं। तय हुआ है कि हर तीसरे महीने कूटा कार्यकारिणी की मीटिंग होगी। इसमें टीचर्स की समस्याओं पर चर्चा और उसके निराकरण की रणनीति बनाई जाएगी। कूटा के रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के महामंत्री और मीडिया प्रभारी डॉ. एमपी सिंह को दी गई है।
डीबीएस पीजी कॉलेज हाल में रविवार को कूटा कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण मीटिंग हुई है। फुपुक्टा महामंत्री डॉ. विवेक द्विवेदी, कूटा अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह और महामंत्री डॉ. देवेंद्र अवस्थी की अध्यक्षता वाली मीटिंग हंगामेदार रही है। कई सदस्यों ने मीटिंग न बुलाए जाने को लेकर नाराजगी जताई। इस पर अध्यक्ष, महामंत्री ने गलती मानी और भरोसा दिलाया कि अब मीटिंग बुलाने में देरी नहीं होगी। सहमति बनने के बाद सभी सदस्यों ने इस्तीफा वापस ले लिया है। इसी दौरान टीचर्स के टीए, डीए का मसला भी उठाया गया। कहा गया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन कॉपी जांचने वाले टीचर्स को परेशान करने पर आमादा है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कूटा कार्यकारिणी ने ग्रेजुएशन के छह पेपर को आब्जेक्टिव किए जाने का विरोध किया। कहा कि आब्जेक्टिव पेपर से शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित हुई है। यह व्यवस्था समाप्त की जानी चाहिए। इस मौके पर डॉ. श्यामजी श्रीवास्तव, डॉ. विजय खरे, डॉ. आनंद शुक्ला, डॉ. लाल चंद्र शर्मा सहित तमाम शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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