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शहर में राशन कार्ड बनाने में बड़ा खेल
Updated Wed, 25 Oct 2017 11:26 PM IST
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फर्रुखाबाद। शहर में पात्र गृहस्थी राशनकार्ड बनाने में बड़ा खेल किया गया है। आबादी के अनुपात में 64 फीसदी के अधिक लोगों को राशन दिया जा रहा है । खाद्य सुरक्षा अधिनियम के मानक में 64.74 नागरिकों को ही सस्ता राशन दिया जा सकता है। दो माह पूर्व हुए सत्यापन में हजारों पात्रों के नाम सूची से हटा दिए गए। अब वह पूर्ति विभाग से लेकर डीएम कार्यालय तक के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनका नाम नहीं जोड़ा जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि गरीबों की जगह साधन संपन्न लोगों को सस्ता राशन दिया जा रहा है।
2011 की जनगणना के अनुसार फर्रुखाबाद शहर की आबादी लगभग 275754 है। जनगणना विभाग के मानक के अनुसार प्रतिवर्ष दो फीसदी आबादी में वृद्धि होती है। इस लिहाज से अक्तूबर 2017 में शहर की आबादी लगभग 308500 होनी चाहिए। इस आबादी के आधार पर शहर में लगभग 200550 लोगों को ही अधिनियम के तहत राशन दिया जा सकता है। पूर्ति विभाग की
वेबसाइट पर इस समय पात्र गृहस्थी राशन कार्ड में 197140 और अंत्योदय कार्डों में 3021 लाभार्थी दर्ज हैं। विभाग हर महीने 200161 लोगों के लिए सस्ता अनाज दे रहा है। यानी 64 फीसदी से अधिक आबादी को सस्ता राशन दिया जा रहा है। इसके बावजूद हजारों की संख्या में गरीब अभी भी राशन के लिए भटक रहे हैं। इनमें किसी का कार्ड ही नहीं बना है तो किसी का राशन चार-पांच महीने से बंद है। अगर छूटे लोगों को भी योजना में शामिल कर लिया जाए तो गरीबों का
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आंकड़ा 75 फीसदी से ऊपर पहुंच जाएगा। इससे स्पष्ट होता है कि राजनीतिक दबाव में अधिकारियों से राशनकार्ड बनाने में बड़ा खेल किया है। लोगों का आरोप है कि दो महीने पहले हुए सत्यापन में गरीबों के नाम कटकर संभ्रांत लोगों के नाम सूची में जोड़ दिए गए हैं।
पूर्ति विभाग में रोज पहुंचते हैं सैकड़ों लोग
फतेहगढ़ भूसा मंडी निवासी शायदा खातून पत्नी नईम बक्श का राशन सितंबर से बंद कर दिया गया है। कोटेदार का कहना है कि आनलाइन सूची में उनका नाम नहीं है। पति के विकलांग होने से परिवार की जिम्मेदारी शायदा पर ही है। दो महीने से वह पूर्ति विभाग के चक्कर लगा रही हैं। खटकापुरा इज्जतखां नगर की रोशनजहां पत्नी अली अकबर का राशन भी दो महीने से बंद कर दिया गया है। रोशनजहां ने बताया कि कोटेदार का कहना है कि ईपॉश मशीन उनका अंगूठा नहीं ले रही है। बढ़पुर की मीरादेवी पत्नी घनश्याम ने बताया कि पांच बार फार्म भरकर जमा कर चुकी हैं, लेकिन अभी तक आन लाइन फीडिंग नहीं की गई। भूमिहीन मीरा के पति
मजदूरी कर सात लोगों का परिवार पालते हैं। कुछ ऐसा ही हाल नेकपुर कला की रामकिशोरी पत्नी अवधेश का है। वह भी दो साल से राशनकार्ड बनवाने को भटक रही हैं। भोपतपुर शांति नगर की विमला पत्नी जयंत सिंह और भोलेपुर की शारदा पत्नी रामभरोसे के परिवार गरीबी में जी रहे हैं। फिर एक साल से लगातार आवेदन करने के बावजूद कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। राजकुमारी पत्नी उत्तमचंद शर्मा, भीकमपुरा की शमा परवीन पत्नी जमीन, नवादिया मोहल्ले की सुशीला पत्नी कृपा शंकर, कमला देवी पत्नी स्व. प्यारेलाल, भूरी देवी पत्नी श्रीराम, नीतू शर्मा पत्नी विजय शर्मा, भीकमपुरा की रानी देवी पत्नी तिवारी लाल, इसी मोहल्ले की ममता
देवी पत्नी पिंटू, मुनीशा पत्नी सिराजुद्दीन, भोपतपुरा की निर्मला पत्नी जयंत सिंह, भोलेपुर की शारदा देवी पत्नी रामभरोसे भी कई-कई महीने से राशन के लिए भटक रही हैं। इन लोगों का सूची में नाम ही नहीं है जबकि शुरू में कुछ महीने राशन दिया भी गया। नाम कटने और राशनकार्ड न बनने वाले सैकड़ों लोगों की भीड़ रोज पूर्ति कार्यालय पहुंचती है। लोग डीएम से लेकर पूर्ति अधिकारी तक को प्रार्थना पत्र दे चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हो रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला पूर्ति अधिकारी आमिर खान का कहना है कि दो महीने पहले घर-घर सर्वे कराया गया था। उसमें जो लोग अपात्र मिले उनके नाम काट दिए गए हैं। अभी सुधार किया जा रहा है, जो लोग छूट गए हैं उनके नाम जोड़ लिए जाएंगे। जहां तक आबादी के अनुपात में अधिक राशनकार्ड बनने की बात है तो अगर ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। अपात्रों के नाम हटाकर सभी पात्रों का राशन दिया जाएगा।
क्या कहते हैं विधायक
सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी का कहना है कि भाजपा सरकार में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी। अगर गरीबों के नाम काटकर अपात्रों को राशन दिया जा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। ‘मैं खुद पूर्ति अधिकारी से बात करूंगा। किसी भी हालत में पात्रों को योजना से वंचित नहीं होने दिया जाएगा’।
शहर में राशनकार्ड बनाने में हुआ बड़ा खेल
64 फीसदी से अधिक लाभार्थी फिर भी भटक रहे हजारों गरीब
दो महीने पहले कराए गए सत्यापन में काट दिए गए पात्रों के नाम
नियमानुसार 64.74 फीसदी आबादी को ही मिल सकता है राशन
विपिन शुक्ला
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2011 की जनगणना के अनुसार फर्रुखाबाद शहर की आबादी लगभग 275754 है। जनगणना विभाग के मानक के अनुसार प्रतिवर्ष दो फीसदी आबादी में वृद्धि होती है। इस लिहाज से अक्तूबर 2017 में शहर की आबादी लगभग 308500 होनी चाहिए। इस आबादी के आधार पर शहर में लगभग 200550 लोगों को ही अधिनियम के तहत राशन दिया जा सकता है। पूर्ति विभाग की
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वेबसाइट पर इस समय पात्र गृहस्थी राशन कार्ड में 197140 और अंत्योदय कार्डों में 3021 लाभार्थी दर्ज हैं। विभाग हर महीने 200161 लोगों के लिए सस्ता अनाज दे रहा है। यानी 64 फीसदी से अधिक आबादी को सस्ता राशन दिया जा रहा है। इसके बावजूद हजारों की संख्या में गरीब अभी भी राशन के लिए भटक रहे हैं। इनमें किसी का कार्ड ही नहीं बना है तो किसी का राशन चार-पांच महीने से बंद है। अगर छूटे लोगों को भी योजना में शामिल कर लिया जाए तो गरीबों का
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आंकड़ा 75 फीसदी से ऊपर पहुंच जाएगा। इससे स्पष्ट होता है कि राजनीतिक दबाव में अधिकारियों से राशनकार्ड बनाने में बड़ा खेल किया है। लोगों का आरोप है कि दो महीने पहले हुए सत्यापन में गरीबों के नाम कटकर संभ्रांत लोगों के नाम सूची में जोड़ दिए गए हैं।
पूर्ति विभाग में रोज पहुंचते हैं सैकड़ों लोग
फतेहगढ़ भूसा मंडी निवासी शायदा खातून पत्नी नईम बक्श का राशन सितंबर से बंद कर दिया गया है। कोटेदार का कहना है कि आनलाइन सूची में उनका नाम नहीं है। पति के विकलांग होने से परिवार की जिम्मेदारी शायदा पर ही है। दो महीने से वह पूर्ति विभाग के चक्कर लगा रही हैं। खटकापुरा इज्जतखां नगर की रोशनजहां पत्नी अली अकबर का राशन भी दो महीने से बंद कर दिया गया है। रोशनजहां ने बताया कि कोटेदार का कहना है कि ईपॉश मशीन उनका अंगूठा नहीं ले रही है। बढ़पुर की मीरादेवी पत्नी घनश्याम ने बताया कि पांच बार फार्म भरकर जमा कर चुकी हैं, लेकिन अभी तक आन लाइन फीडिंग नहीं की गई। भूमिहीन मीरा के पति
मजदूरी कर सात लोगों का परिवार पालते हैं। कुछ ऐसा ही हाल नेकपुर कला की रामकिशोरी पत्नी अवधेश का है। वह भी दो साल से राशनकार्ड बनवाने को भटक रही हैं। भोपतपुर शांति नगर की विमला पत्नी जयंत सिंह और भोलेपुर की शारदा पत्नी रामभरोसे के परिवार गरीबी में जी रहे हैं। फिर एक साल से लगातार आवेदन करने के बावजूद कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। राजकुमारी पत्नी उत्तमचंद शर्मा, भीकमपुरा की शमा परवीन पत्नी जमीन, नवादिया मोहल्ले की सुशीला पत्नी कृपा शंकर, कमला देवी पत्नी स्व. प्यारेलाल, भूरी देवी पत्नी श्रीराम, नीतू शर्मा पत्नी विजय शर्मा, भीकमपुरा की रानी देवी पत्नी तिवारी लाल, इसी मोहल्ले की ममता
देवी पत्नी पिंटू, मुनीशा पत्नी सिराजुद्दीन, भोपतपुरा की निर्मला पत्नी जयंत सिंह, भोलेपुर की शारदा देवी पत्नी रामभरोसे भी कई-कई महीने से राशन के लिए भटक रही हैं। इन लोगों का सूची में नाम ही नहीं है जबकि शुरू में कुछ महीने राशन दिया भी गया। नाम कटने और राशनकार्ड न बनने वाले सैकड़ों लोगों की भीड़ रोज पूर्ति कार्यालय पहुंचती है। लोग डीएम से लेकर पूर्ति अधिकारी तक को प्रार्थना पत्र दे चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हो रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला पूर्ति अधिकारी आमिर खान का कहना है कि दो महीने पहले घर-घर सर्वे कराया गया था। उसमें जो लोग अपात्र मिले उनके नाम काट दिए गए हैं। अभी सुधार किया जा रहा है, जो लोग छूट गए हैं उनके नाम जोड़ लिए जाएंगे। जहां तक आबादी के अनुपात में अधिक राशनकार्ड बनने की बात है तो अगर ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। अपात्रों के नाम हटाकर सभी पात्रों का राशन दिया जाएगा।
क्या कहते हैं विधायक
सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी का कहना है कि भाजपा सरकार में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी। अगर गरीबों के नाम काटकर अपात्रों को राशन दिया जा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। ‘मैं खुद पूर्ति अधिकारी से बात करूंगा। किसी भी हालत में पात्रों को योजना से वंचित नहीं होने दिया जाएगा’।
शहर में राशनकार्ड बनाने में हुआ बड़ा खेल
64 फीसदी से अधिक लाभार्थी फिर भी भटक रहे हजारों गरीब
दो महीने पहले कराए गए सत्यापन में काट दिए गए पात्रों के नाम
नियमानुसार 64.74 फीसदी आबादी को ही मिल सकता है राशन
विपिन शुक्ला