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Kanpur News: 50 प्रतिशत युवाओं में बढ़ा मिला एलपीए, आनुवंशिक कारणों से हार्ट अटैक का खतरा
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कानपुर। युवा अवस्था में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के बीच कार्डियोलॉजी में हुए एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हार्ट अटैक के 100 युवा मरीजों पर किए गए अध्ययन में 50 प्रतिशत में लाइपोप्रोटीन लिटिल ए (एलपीए) का स्तर 50 से अधिक पाया गया। खास बात यह रही कि इनमें कई युवा फिटनेस का ध्यान रखते थे और धूम्रपान व शराब का सेवन भी नहीं करते थे। जांच में एलपीए बढ़ने का कारण आनुवंशिक पाया गया। इसके बाद विशेषज्ञों ने युवाओं को जीवन में कम से कम एक बार एलपीए की जांच कराने की सलाह दी है।
प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार शर्मा और उनकी टीम ने यह अध्ययन किया। इसका उद्देश्य 30 से 45 वर्ष की आयु के स्वस्थ दिखने वाले युवाओं में अचानक हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाओं के पीछे छिपे जोखिमों का पता लगाना था। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य लिपिड प्रोफाइल में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य होने के बावजूद एलपीए बढ़ा हो सकता है। ऐसे में धमनियों में ब्लॉकेज और हृदय रोग का खतरा बना रहता है। डॉ. शर्मा के अनुसार एलपीए का स्तर 30 से कम होना चाहिए। इसका स्तर बढ़ा होने पर सतर्क रहने और चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।
एलपीए मुख्य रूप से आनुवंशिक कारकों से प्रभावित होता है, इसलिए केवल फिटनेस, खानपान या धूम्रपान से दूरी बनाकर इसके जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि एलपीए कम करने के लिए फिलहाल दवाओं के विकल्प सीमित हैं। इसे कम करने में मदद करने वाला इंजेक्शन भी उपलब्ध है लेकिन उपचार के विकल्पों पर विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है। समय रहते जांच से जोखिम का आकलन कर खानपान में सुधार, नियमित व्यायाम और जरूरत के अनुसार दवाओं के जरिये हृदय रोग की रोकथाम की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
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प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार शर्मा और उनकी टीम ने यह अध्ययन किया। इसका उद्देश्य 30 से 45 वर्ष की आयु के स्वस्थ दिखने वाले युवाओं में अचानक हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाओं के पीछे छिपे जोखिमों का पता लगाना था। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य लिपिड प्रोफाइल में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य होने के बावजूद एलपीए बढ़ा हो सकता है। ऐसे में धमनियों में ब्लॉकेज और हृदय रोग का खतरा बना रहता है। डॉ. शर्मा के अनुसार एलपीए का स्तर 30 से कम होना चाहिए। इसका स्तर बढ़ा होने पर सतर्क रहने और चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।
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एलपीए मुख्य रूप से आनुवंशिक कारकों से प्रभावित होता है, इसलिए केवल फिटनेस, खानपान या धूम्रपान से दूरी बनाकर इसके जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि एलपीए कम करने के लिए फिलहाल दवाओं के विकल्प सीमित हैं। इसे कम करने में मदद करने वाला इंजेक्शन भी उपलब्ध है लेकिन उपचार के विकल्पों पर विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है। समय रहते जांच से जोखिम का आकलन कर खानपान में सुधार, नियमित व्यायाम और जरूरत के अनुसार दवाओं के जरिये हृदय रोग की रोकथाम की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
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