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जनवरी बीती, नहीं बन पाए गो आश्रय स्थल

Fri, 01 Feb 2019 01:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 Feb 2019 01:06 AM IST
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जनवरी बीती, नहीं बन पाए गो आश्रय स्थल

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अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। जनवरी बीत गई लेकिन जिला प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में गो आश्रय स्थल नहीं बना पाया है। शासन को मनगढ़ंत रिपोर्ट भेजकर अधिकारी अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन हकीकत इसकी बहुत उलट है। जिन 10 आश्रय स्थलों को प्रशासन चालू बता रहा है वहां छाया, चारे और पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। निगरानी न होने से भूखे, प्यासे मवेशी बाड़ तोड़कर भाग रहे हैं। छुट्टा मवेशी खेतों में फसलें बर्बाद कर रहे हैं और प्रशासन आंकड़ों की बाजीगरी में लगा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन को 10 जनवरी तक गोआश्रय स्थल बनाकर छुट्टा मवेशियों को बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने सभी 10 ब्लॉकों के 23 गांवों में भूमि चिह्नित कर बीडीओ को 15 जनवरी तक गो आश्रय स्थल (अस्थायी गोशाला) बनाने के लिए के निर्देश दिए थे। आधी अधूरा व्यवस्थाओं के बीच प्रशासन 31 जनवरी तक केवल करसा, बिलसरायां, असालतगंज, असवी, रसधान, राजपुर, बुधेराडेरापुर, सिलौला समेत 10 गो आश्रय स्थल ही चालू कर पाया है। प्रशासन इन आश्रय स्थलों छाया और चारा व पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
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देखरेख के लिए कर्मचारी भी नहीं लगाए गए हैं। इससे मवेशी बाड़ा तोड़कर भाग निकलते हैं। दो दिन पहले संदलपुर ब्लाक के असवी के आश्रय स्थल से 16 मवेशी बाड़ तोड़कर भाग निकले थे। औरंगाबाद झड़ा गांव के आश्रय स्थल से भी 100 मवेशी भाग गए थे। जसापुर के आश्रय स्थल में अभी तक खंभे ही खड़े हो पाए हैं, वहां छाया तक की व्यवस्था नहीं है। डेरापुर ब्लाक के नंदपुर व खल्ला गांव में काम चल रहा है। खल्ला के अधूरे आश्रय स्थल में बंद 13 मवेशियों के लिए भी छाया नहीं है। आश्रय स्थल निर्माण में प्रगति और क्रियान्वयन की रिपोर्ट नियमित शासन को भेजी रही है। ये रिपोर्ट पशु चिकित्सा विभाग और एडीएम प्रशासन अलग-अलग भेज रहे हैं। पशु चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट में सभी 23 आश्रय स्थल अधूरे बताए गए हैं जबकि एडीएम की रिपोर्ट 10 आश्रय स्थलों को संचालित बताया गया है।
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एडीएम प्रशासन पंकज वर्मा ने कहा कि पशु चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट गलत है, दस आश्रय स्थल तैयार हो गए हैं वहां मवेशियों को रखा गया है। व्यवस्थाओं करने के लिए तहसील स्तर की समिति काम कर रही है। सभी आश्रय स्थलों के संचालन के लिए 35-35 हजार रुपये दिए गए हैं। अधूरे आश्रय स्थलों में काम चल रहा है।



जनवरी बीती, नहीं बन पाए गो आश्रय स्थल
10 ब्लॉकों में 31 जनवरी तक बनाए जाने थे 23 आश्रय स्थल
10 आश्रय स्थल आधी अधूरी व्यवस्था कर चालू करने का दावा
13 आश्रय स्थलों में अभी तक चौथाई काम भी नहीं हो पाया
संख्या-31 एकेबीपी-4 जसापुर का अधूरा पड़ा गोवंश आश्रय स्थल
फोटो संख्या-31 एकेबीपी-5 आश्रय स्थल की घेराबंदी के लिए लगाए कांटे
फोटो संख्या-31 एकेबीपी-6 आश्रय स्थल में नहीं हो सकी छाया
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