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शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी...
Updated Tue, 26 Sep 2017 12:27 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज।
नवदुर्गा पंचमी पर शहर के प्रमुख मंदिरों में मां स्कंदमाता के पूजन को भक्ताें की भारी भीड़ उमड़ी। माता फूलमती, मां सिंह वाहिनी, मां छेमकली, मकरंदनगर स्थित मां काली देवी व सरायमीरा के माता काली देवी दुर्गा मंदिर में शाम की महाआरती के संपन्न होने तक दर्शन कर आशीष मांगा। शहर के मां सिंहवाहिनी मंदिर में माता स्कंदमाता के स्वरूप की पूजा होती है। माता सिंहवाहिनी में माता के दर्शन को भक्ताें की कतार लगी रही।
वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि माता के पांचवें स्वरूप का नाम स्कंदमाता है। माता के इस स्वरूप की पूजा करने से भक्त को सुख-शांति की प्राप्ति होती है। देव सेनापति बनकर तारकासुर का वध करने व मयूर को वाहन के रूप में अपनाने वाले स्कंद की माता होने से उन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। कहा सिंह वाहन की सवारी करने वाली माता की पूजा करने वाले साधक को मृत्यु लोक में भी परम शांति की प्राप्ति होती है। माता की पूजा कर साधकों ने माता से असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाने, स्वस्थ रखने व गृहक्लेशों से मुक्ति की कामना की।
मां कात्यायनी की पूजा से योग्य वर की होगी प्राप्ति
कन्नौज(ब्यूरो)। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति के रूप में उनकी पुत्री के रूप में माता ने जन्म लिया। इसीलिए माता के पांचवें स्वरूप को कात्यायनी के नाम से जाना जाता है। वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि माता की आराधना से साधक को समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। बताया कि नवरात्रि के छठवें दिन माता की पूजा की जाती है। मां का ध्यान गोधूलि बेला में किया जाता है। वेदों में लिखा है कि अविवाहित कन्याएं यदि मां के छठवें स्वरूप की पूजा करती है तो विवाह का योग शीघ्र ही बन जाता है। साथ ही कन्या को योग्य वर की प्राप्ति होती है। शहद का भोग लगाकर मां को प्रसन्न किया जा सकता है।
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शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी...
-शहर में भक्तों ने की माता के पांचवें स्वरूप की आराधना
-गृहक्लेश से मुक्ति व असाध्य रोगों से मुक्ति की कामना की
कन्नौज।
नवदुर्गा पंचमी पर शहर के प्रमुख मंदिरों में मां स्कंदमाता के पूजन को भक्ताें की भारी भीड़ उमड़ी। माता फूलमती, मां सिंह वाहिनी, मां छेमकली, मकरंदनगर स्थित मां काली देवी व सरायमीरा के माता काली देवी दुर्गा मंदिर में शाम की महाआरती के संपन्न होने तक दर्शन कर आशीष मांगा। शहर के मां सिंहवाहिनी मंदिर में माता स्कंदमाता के स्वरूप की पूजा होती है। माता सिंहवाहिनी में माता के दर्शन को भक्ताें की कतार लगी रही।
वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि माता के पांचवें स्वरूप का नाम स्कंदमाता है। माता के इस स्वरूप की पूजा करने से भक्त को सुख-शांति की प्राप्ति होती है। देव सेनापति बनकर तारकासुर का वध करने व मयूर को वाहन के रूप में अपनाने वाले स्कंद की माता होने से उन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। कहा सिंह वाहन की सवारी करने वाली माता की पूजा करने वाले साधक को मृत्यु लोक में भी परम शांति की प्राप्ति होती है। माता की पूजा कर साधकों ने माता से असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाने, स्वस्थ रखने व गृहक्लेशों से मुक्ति की कामना की।
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मां कात्यायनी की पूजा से योग्य वर की होगी प्राप्ति
कन्नौज(ब्यूरो)। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति के रूप में उनकी पुत्री के रूप में माता ने जन्म लिया। इसीलिए माता के पांचवें स्वरूप को कात्यायनी के नाम से जाना जाता है। वैदिक आचार्य पंडित पवन शुक्ला ने बताया कि माता की आराधना से साधक को समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। बताया कि नवरात्रि के छठवें दिन माता की पूजा की जाती है। मां का ध्यान गोधूलि बेला में किया जाता है। वेदों में लिखा है कि अविवाहित कन्याएं यदि मां के छठवें स्वरूप की पूजा करती है तो विवाह का योग शीघ्र ही बन जाता है। साथ ही कन्या को योग्य वर की प्राप्ति होती है। शहद का भोग लगाकर मां को प्रसन्न किया जा सकता है।
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शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी...
-शहर में भक्तों ने की माता के पांचवें स्वरूप की आराधना
-गृहक्लेश से मुक्ति व असाध्य रोगों से मुक्ति की कामना की