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Kannauj News: यूपी सिडको के एक्सीएन निलंबित, जेई बर्खास्त
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कन्नौज। भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप में यूपी सिडको के अधिशासी अभियंता (एक्सीएन) संजय गंगवार को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, रिश्वत लेने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर संविदा पर तैनात जूनियर इंजीनियर कमल बाबू को बर्खास्त किया गया है। मामले में एसपी बिनोद कुमार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराने के आदेश दिए गए हैं।
टेंडर प्रक्रिया में हुए खेल की खबर को अमर उजाला ने 14 अक्तूबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसके बाद समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। मंत्री ने बताया कि कन्नौज में सिडको की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। मामला एकीकृत विकास योजना के तहत करीब 3.50 करोड़ रुपये के सात टेंडरों से जुड़ा है।
आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और ठेकेदारों को गुमराह कर एक ही फर्म को सभी ठेके दे दिए गए। जांच में सामने आया कि टेंडर आमंत्रित करने से लेकर आवंटन तक नियमों की अनदेखी की गई। स्वीकृत लागत और टेंडर राशि में नाम मात्र का अंतर रखा गया ताकि प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाए और चहेती फर्म को ही काम मिल जाए। जेई पर रिश्वत लेने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
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इनसेट
एक ही ठेकेदार को बार-बार लाभ पहुंचाया
अधिशासी अभियंता संजय गंगवार पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर एक ही ठेकेदार को बार-बार लाभ पहुंचाया। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर उन्हें तत्काल निलंबित किया गया।
इनसेट
ठेकेदारों से रिश्वत मांगी
जूनियर इंजीनियर कमल बाबू पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। जांच में पता चला कि उसने चैट और वॉयस कॉल के माध्यम से ठेकेदारों से रिश्वत और धनराशि की मांग की। इसके इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्य भी जांच टीम को मिले हैं।
वर्जन
प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जनता के पैसे का दुरुपयोग या टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सिडको जैसे विभाग में जहां गरीबों और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए निर्माण कार्य कराए जाते हैं, वहां भ्रष्टाचार सीधे तौर पर जनता के हितों पर कुठाराघात है। -असीम अरुण, समाज कल्याण राज्य मंत्री
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टेंडर प्रक्रिया में हुए खेल की खबर को अमर उजाला ने 14 अक्तूबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसके बाद समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। मंत्री ने बताया कि कन्नौज में सिडको की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। मामला एकीकृत विकास योजना के तहत करीब 3.50 करोड़ रुपये के सात टेंडरों से जुड़ा है।
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आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और ठेकेदारों को गुमराह कर एक ही फर्म को सभी ठेके दे दिए गए। जांच में सामने आया कि टेंडर आमंत्रित करने से लेकर आवंटन तक नियमों की अनदेखी की गई। स्वीकृत लागत और टेंडर राशि में नाम मात्र का अंतर रखा गया ताकि प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाए और चहेती फर्म को ही काम मिल जाए। जेई पर रिश्वत लेने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
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एक ही ठेकेदार को बार-बार लाभ पहुंचाया
अधिशासी अभियंता संजय गंगवार पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर एक ही ठेकेदार को बार-बार लाभ पहुंचाया। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर उन्हें तत्काल निलंबित किया गया।
इनसेट
ठेकेदारों से रिश्वत मांगी
जूनियर इंजीनियर कमल बाबू पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। जांच में पता चला कि उसने चैट और वॉयस कॉल के माध्यम से ठेकेदारों से रिश्वत और धनराशि की मांग की। इसके इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्य भी जांच टीम को मिले हैं।
वर्जन
प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जनता के पैसे का दुरुपयोग या टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सिडको जैसे विभाग में जहां गरीबों और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए निर्माण कार्य कराए जाते हैं, वहां भ्रष्टाचार सीधे तौर पर जनता के हितों पर कुठाराघात है। -असीम अरुण, समाज कल्याण राज्य मंत्री