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Kannauj News: सरसों की बोआई में जल्दबाजी न करें किसान

Thu, 08 Oct 2026 11:40 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 11:40 PM IST
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Farmers should not rush into mustard sowing.
तालग्राम। पिछले दिनों बारिश के बाद क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान खाली खेतों में सरसों की बोआई की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि, कृषि तकनीकी सहायक ने अभी बोआई में जल्दबाजी न करने की सलाह दी है। अच्छा जमाव और उत्पादन के लिए अनुकूल तापमान का इंतजार कर लें, जबकि बारिश से पहले बोई गई सरसों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।
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कृषि तकनीकी सहायक प्रबंधक शिवपाल सिंह ने बताया कि सरसों की अच्छी फसल के लिए बोआई के समय तापमान का अनुकूल होना जरूरी है। इस समय मौजूदा तापमान सरसों के जमाव और पौधों के विकास के अनुकूल नहीं है। तापमान अनुकूल रहने पर बेहतर उत्पादन मिलता है। इसके लिए अधिकतम तापमान 25 और न्यूनतम 15 सेल्सियस होना चाहिए, जबकि मृदा का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस उचित माना जाता है।
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सामान्य तौर पर अक्तूबर के मध्य से नवंबर के प्रथम पखवाड़े के बीच सरसों की बोआई के लिए तापमान अनुकूल होने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि सरसों खेती के लिए उचित जल निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट मिट्टी बेहतर रहती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। बीज के अच्छे जमाव के लिए खेत में पर्याप्त नमी भी जरूरी है। इसलिए किसान खेत की नमी और तापमान की स्थिति देखकर बोआई करें।
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तिलहनी और दलहनी फसलों से बढ़ेगी आमदनी
एडीओ कृषि राजीव कुमार ने किसानों को तिलहनी और दलहनी फसलों की खेती पर भी ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि इन फसलों को नकदी फसल के रूप में अपनाकर किसान आमदनी बढ़ाने के साथ देश और प्रदेश में दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।
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