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कलम की जगह पकड़ा दी झाड़ू
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शौचालय की छत पर रखी टंकी में पानी भरते छात्र।
- फोटो : CHIBRAMAU
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छिबरामऊ(कन्नौज)। विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय नगला भौंसे में परिसर की साफ-सफाई के लिए बच्चों को झाडू़ पकड़ा दी गई। शौचालय की छत पर रखी खाली टंकी में पानी भरने के लिए छात्रों की जान जोखिम में डालते हुए बगैर सीढ़ियों वाली छत पर चढ़ा दिया गया। इन दोनों मामलों में शिक्षकों की लापरवाही सामने आई है।
गांव के छात्र गुरुवार सुबह पढ़ने के लिए विद्यालय पहुंचे। परिसर में इधर-उधर गंदगी देख शिक्षकों ने लड़कियों को झाडू़ पकड़ा दी। शिक्षकों के खौफ के चलते छात्राओं ने परिसर की साफ सफाई शुरू कर दी। वहीं छात्रों को शौचालय के ऊपर रखी पानी की टंकी को भरने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। बगैर सीढ़ियों वाली शौचालय की छत पर दो बच्चे जान जोखिम में डालकर चढ़ गए। टंकी में पानी भरने के लिए भारी भरकम पाइप पकड़ा दिया गया। इस बीच गांव के किसी व्यक्ति ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो को संज्ञान में लेते हुए खंड शिक्षा अधिकारी सुनील दुबे ने कहा कि बच्चे विद्यालय में पढ़ने के लिए आते हैं। झाड़ू लगाने या पानी भरने के लिए नहीं आते। दोषी प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आखिर कहां खर्च होती है आने वाली धनराशि
बीईओ सुनील दुबे ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में लगभग हर साल रंगाई पुताई से लेकर रखरखाव के लिए कंपोजिट ग्रांट भेजी जाती है। 100 से 250 बच्चों वाले विद्यालयों में 50 हजार रुपये भेजे जाते हैं। इस धनराशि को खर्च करने का अधिकार प्रधानाध्यापक को होता है। प्राथमिक विद्यालय नगला भौंसे में 150 से अधिक छात्र पंजीकृत हैं।
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गांव के छात्र गुरुवार सुबह पढ़ने के लिए विद्यालय पहुंचे। परिसर में इधर-उधर गंदगी देख शिक्षकों ने लड़कियों को झाडू़ पकड़ा दी। शिक्षकों के खौफ के चलते छात्राओं ने परिसर की साफ सफाई शुरू कर दी। वहीं छात्रों को शौचालय के ऊपर रखी पानी की टंकी को भरने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। बगैर सीढ़ियों वाली शौचालय की छत पर दो बच्चे जान जोखिम में डालकर चढ़ गए। टंकी में पानी भरने के लिए भारी भरकम पाइप पकड़ा दिया गया। इस बीच गांव के किसी व्यक्ति ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो को संज्ञान में लेते हुए खंड शिक्षा अधिकारी सुनील दुबे ने कहा कि बच्चे विद्यालय में पढ़ने के लिए आते हैं। झाड़ू लगाने या पानी भरने के लिए नहीं आते। दोषी प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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आखिर कहां खर्च होती है आने वाली धनराशि
बीईओ सुनील दुबे ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में लगभग हर साल रंगाई पुताई से लेकर रखरखाव के लिए कंपोजिट ग्रांट भेजी जाती है। 100 से 250 बच्चों वाले विद्यालयों में 50 हजार रुपये भेजे जाते हैं। इस धनराशि को खर्च करने का अधिकार प्रधानाध्यापक को होता है। प्राथमिक विद्यालय नगला भौंसे में 150 से अधिक छात्र पंजीकृत हैं।
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