{"_id":"680bd4f0431d9ef6c80522b2","slug":"became-district-topper-by-studying-under-thatched-roof-kannauj-news-c-214-1-knj1005-129127-2025-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: छप्पर के नीचे पढ़ाई कर बने जिला टॉपर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: छप्पर के नीचे पढ़ाई कर बने जिला टॉपर
विज्ञापन
कन्नौज। कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता। एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों। दुष्यंत कुमार की यह पंक्तियां 10वीं की परीक्षा में जिले में टॉप करने वाले हरेंद्र राजपूत पर सटीक बैठती हैं। गरीबी के बोझ में छप्पर के नीचे पढ़ाई करने वाले हरेंद्र ने साबित कर दिया कि अगर मेहनत और लगन से काम किया जाए तो आसमां में भी सुराख किया जा सकता है।
तिर्वा के ग्राम फतुआपुर के रहने वाले हरिराम के पास तीन बीघा खेत हैं। हरिराम मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। हरिराम की तीन बेटियां और एक बेटा हरेंद्र राजपूत है। हरेंद्र 10 किलोमीटर दूर तिर्वा कस्बे में स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में पढ़ने के लिए जाता है। स्कूल से वापसी में उसे प्रतिदिन 20 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती है। हरेंद्र ने 10वीं की परीक्षा दी, जिसमें जिले की टॉप 10 सूची में हरेंद्र को पहला स्थान मिला।
परीक्षा परिणाम देखते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। हरेंद्र परिवार के साथ कच्चे मकान में रहता है और छप्पर के नीचे बैठकर उसने पढ़ाई की। शिक्षकों और साथियों ने हरेंद्र को मिठाई खिलाकर बधाई दी। बेटे के जिले में टॉप करने पर मां उषा देवी और पिता की आंख से खुशी के आंसू झलकने लगे। अब पिता को हरेंद्र की आगे की पढ़ाई की चिंता सता रही है। गरीबी के बोझ के तले दबे हरिराम बेटे को अफसर बनते देखना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
तिर्वा के ग्राम फतुआपुर के रहने वाले हरिराम के पास तीन बीघा खेत हैं। हरिराम मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। हरिराम की तीन बेटियां और एक बेटा हरेंद्र राजपूत है। हरेंद्र 10 किलोमीटर दूर तिर्वा कस्बे में स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में पढ़ने के लिए जाता है। स्कूल से वापसी में उसे प्रतिदिन 20 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती है। हरेंद्र ने 10वीं की परीक्षा दी, जिसमें जिले की टॉप 10 सूची में हरेंद्र को पहला स्थान मिला।
विज्ञापन
परीक्षा परिणाम देखते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। हरेंद्र परिवार के साथ कच्चे मकान में रहता है और छप्पर के नीचे बैठकर उसने पढ़ाई की। शिक्षकों और साथियों ने हरेंद्र को मिठाई खिलाकर बधाई दी। बेटे के जिले में टॉप करने पर मां उषा देवी और पिता की आंख से खुशी के आंसू झलकने लगे। अब पिता को हरेंद्र की आगे की पढ़ाई की चिंता सता रही है। गरीबी के बोझ के तले दबे हरिराम बेटे को अफसर बनते देखना चाहते हैं।
विज्ञापन