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Kannauj News: सिलाई से आर्थिक स्थिति सुधार रहीं 20 महिलाएं
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कन्नौज। जिले की 20 महिलाओं ने सिलाई को आत्मनिर्भरता का जरिया बना लिया है। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर इन महिलाओं ने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
जिले के छिबरामऊ और तिर्वा क्षेत्र की रामवती, सुषमा, रेखा सहित कई महिलाएं पहले घरेलू कामकाज तक सीमित थीं। लखपति दीदी योजना और एनआरएलएम के तहत उन्हें सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद समूह के माध्यम से उन्हें सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गईं। अब यह महिलाएं स्कूल ड्रेस, ब्लाउज, पेटीकोट और फॉल-पीको जैसे काम कर रही हैं।
तिर्वा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुमन देवी ने बताया कि पहले परिवार चलाने के लिए पति की आय पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब सिलाई से हर महीने आठ से 10 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इससे बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च में मदद मिल रही है। जिला प्रशासन भी इन महिलाओं को बाजार से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। स्थानीय स्तर पर ऑर्डर दिलाने के साथ-साथ प्रदर्शनियों में स्टॉल भी लगवाए जा रहे हैं।
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डीसी एनआरएलएम राजकुमार लोधी ने बताया कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना प्राथमिकता है। सिलाई के अलावा ब्यूटी पार्लर, अचार-पापड़ जैसे कामों में भी महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। इन 20 महिलाओं की सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी जागरूक किया है। अब कई और महिलाएं समूह से जुड़कर सिलाई सीखने के लिए आगे आ रही हैं।
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जिले के छिबरामऊ और तिर्वा क्षेत्र की रामवती, सुषमा, रेखा सहित कई महिलाएं पहले घरेलू कामकाज तक सीमित थीं। लखपति दीदी योजना और एनआरएलएम के तहत उन्हें सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद समूह के माध्यम से उन्हें सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गईं। अब यह महिलाएं स्कूल ड्रेस, ब्लाउज, पेटीकोट और फॉल-पीको जैसे काम कर रही हैं।
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तिर्वा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुमन देवी ने बताया कि पहले परिवार चलाने के लिए पति की आय पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब सिलाई से हर महीने आठ से 10 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इससे बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च में मदद मिल रही है। जिला प्रशासन भी इन महिलाओं को बाजार से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। स्थानीय स्तर पर ऑर्डर दिलाने के साथ-साथ प्रदर्शनियों में स्टॉल भी लगवाए जा रहे हैं।
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डीसी एनआरएलएम राजकुमार लोधी ने बताया कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना प्राथमिकता है। सिलाई के अलावा ब्यूटी पार्लर, अचार-पापड़ जैसे कामों में भी महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। इन 20 महिलाओं की सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी जागरूक किया है। अब कई और महिलाएं समूह से जुड़कर सिलाई सीखने के लिए आगे आ रही हैं।