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Jhansi News: तीन साल से नौकरी को भटक रही बिकरु कांड के शहीद की पत्नी

Sat, 21 Oct 2023 12:01 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 Oct 2023 12:01 AM IST
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Wife of martyr of Bikru incident has been searching for a job for three years
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। पूरे देश में भूचाल ला देने वाले बिकरु कांड को तीन साल बीत चुके हैं। इसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। उनकी शहादत को सम्मान देते हुए सरकार ने शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों की खातिर तमाम घोषणाएं एवं वादे किए लेकिन, इस कांड में शहीद हुए सिपाही सुल्तान सिंह की पत्नी उर्मिला को नौकरी नसीब नहीं हुई। सरकार भी शहीद की पत्नी का दर्द सुनने को राजी नहीं। डीजीपी से गुहार लगाने के बावजूद उनको मदद नहीं मिल सकी है।
दो जुलाई 2020 को कानपुर के बिकरु में सीओ, एसओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। इनमें झांसी के भोजला निवासी सिपाही सुल्तान सिंह भी शामिल थे। सरकार ने शहीदों के परिजनों को तत्काल मृतक आश्रित कोटे में भर्ती करने का एलान किया था। कुछ दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को नौकरी मिल गई लेकिन, इसके बाद शारीरिक एवं लिखित परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया। शहीद सुल्तान सिंह की पत्नी उर्मिला ने एमए एवं बीएड किया है। उनका कहना है उम्र करीब 35 वर्ष हो चुकी। नौ साल की बेटी है। तबीयत भी अक्सर खराब रहती है। ऐसे में पुलिस विभाग के मानक के मुताबिक शारीरिक परीक्षा पास करना मुश्किल है। बीएड उत्तीर्ण होने से उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने की बात कही लेकिन, उनके इस प्रस्ताव को भी सरकार ने ठुकरा दिया। पिछले माह डीजीपी विजय कुमार से उन्होंने मुलाकात की थी। डीजीपी की ओर से भी जल्द ही मदद दिलाए जाने का भरोसा दिलाया गया लेकिन, उर्मिला तक मदद नहीं पहुंची। वहीं, डीआईजी जोगेंद्र कुमार का कहना है कि इस संबंध में शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है।
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मृतक आश्रित को भी पास करनी होती है परीक्षा
पुलिस भर्ती में मृतक आश्रित के तौर पर भर्ती होने वाले को अनिवार्य तौर पर शारीरिक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों के आश्रितों को इससे छूट दी जा सकती है। सिपाही तक भर्ती होने वाले को लिखित परीक्षा से छूट मिलती है जबकि सब इंस्पेक्टर के तौर पर भर्ती होने वाले को लिखित परीक्षा में भी शामिल होना पड़ेगा।
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