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Jhansi News: पारा चढ़ा तो बिगड़ने लगा मानसिक रोगियों का संतुलन
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। गर्मी और बिजली की आवाजाही ने मानसिक रोगियों की दिक्कत बढ़ा दी है। डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और गुस्सा इतना बढ़ गया है कि हमलावर हो रहे हैं। इस वजह से जिला अस्पताल में मानसिक रोगियों की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डाॅ. शिकाफा जाफरीन बताती हैं कि गर्मी की वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती है। जब कभी बिजली चली जाती है, तो बिजली नहीं होने से नींद नहीं आती है। इसका परिणाम यह होता है कि मानसिक रोगियों का चिड़चिड़ापन और गुस्सा काफी बढ़ जाता है। वह न सिर्फ मारपीट कर तोड़फोड़ करने लगते हैं, बल्कि हमलावर भी हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कक्षा आठ में पढ़ने वाले एक बच्चे को तीन दिन पहले स्कूल में प्यास लगी। वह बताती हैं कि गर्मी में मानसिक रोगी मैनिक डिप्रेशन और बाइपोलर डिसऑर्डर के शिकार हो जाते हैं। इसलिए इन रोगियों की कम से कम आठ घंटे की नींद पूरी होनी जरूरी है। यदि नींद पूरी नहीं होती है तो दिक्कत बढ़ जाती है। वह बताती हैं कि गर्मी में रोगी को ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाना चाहिए ताकि पानी की कमी न हो। प्रयास किया जाए कि दोपहर 12 से शाम चार बजे तक घर से बाहर न निकलने दें। यदि बेहद जरूरी हो, तो सिर ढककर घर से बाहर जाएं।
झांसी। गर्मी और बिजली की आवाजाही ने मानसिक रोगियों की दिक्कत बढ़ा दी है। डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और गुस्सा इतना बढ़ गया है कि हमलावर हो रहे हैं। इस वजह से जिला अस्पताल में मानसिक रोगियों की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डाॅ. शिकाफा जाफरीन बताती हैं कि गर्मी की वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती है। जब कभी बिजली चली जाती है, तो बिजली नहीं होने से नींद नहीं आती है। इसका परिणाम यह होता है कि मानसिक रोगियों का चिड़चिड़ापन और गुस्सा काफी बढ़ जाता है। वह न सिर्फ मारपीट कर तोड़फोड़ करने लगते हैं, बल्कि हमलावर भी हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कक्षा आठ में पढ़ने वाले एक बच्चे को तीन दिन पहले स्कूल में प्यास लगी। वह बताती हैं कि गर्मी में मानसिक रोगी मैनिक डिप्रेशन और बाइपोलर डिसऑर्डर के शिकार हो जाते हैं। इसलिए इन रोगियों की कम से कम आठ घंटे की नींद पूरी होनी जरूरी है। यदि नींद पूरी नहीं होती है तो दिक्कत बढ़ जाती है। वह बताती हैं कि गर्मी में रोगी को ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाना चाहिए ताकि पानी की कमी न हो। प्रयास किया जाए कि दोपहर 12 से शाम चार बजे तक घर से बाहर न निकलने दें। यदि बेहद जरूरी हो, तो सिर ढककर घर से बाहर जाएं।