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Jhansi News: 150 किमी तक सहमी रही युवती, रेलवे मेमो-मेमो खेलता रहा
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। रेलवे में सुरक्षित सफर के दावे पर युवती से छेड़खानी की घटना सवालिया निशान है। युवती की शिकायत के बाद भी टीटीई और आरपीएफ मेमो-मेमो खेलते रहे। ग्वालियर से लेकर झांसी तक युवती 135 मिनट तक डरी-सहमी सफर करती रही। 150 किमी के इस सफर में बेखौफ सैन्यकर्मी गंदे इशारे करते रहा।
जीटी एक्सप्रेस से झांसी तक का सफर कर पहुंची युवती ने बताया कि कैसे सैन्यकर्मी ने उससे पूरे सवा दो घंटे और डेढ़ सौ किलोमीटर तक छेड़खानी की। युवती ने बताया कि सैन्यकर्मी ने मुरैना निकलते ही छेड़खानी शुरू कर दी, इससे वह बुरी तरह सहम गई। जब शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आरोपी के हौसले और बुलंद हो गए। इसके बाद वह झांसी तक अपनी हरकतें करता रहा।
युवती बोली... अकेले यात्रा करने में डरूंगी
इस घटना ने युवती को इतना डरा दिया कि वह अब अकेले सेकेंड एसी कोच में भी यात्रा करने में डरेगी। उसने बताया कि ट्रेन मुरैना से निकली तो इसके बाद शराब के नशे में धुत सैन्यकर्मी ने उससे छेड़खानी शुरू कर दी। उसने एक बार उसे नजरंदाज किया लेकिन, वह युवती पर फब्तियां कसने लगा। ट्रेन ग्वालियर पहुंची तो यहां सुरक्षा बल के जवान भी आए और बिना कार्रवाई किए चले गए। इससे आरोपी के हौसले और बुलंद हो गए और वह झांसी आने तक युवती से छेड़खानी करता रहा। पूरी घटना का अंत भी यह हुआ कि झांसी में सुरक्षा बल आए और चले गए। यहां युवती भी अपनी यात्रा पूरी कर उतर गई। लेकिन, इस घटना ने महिला यात्री सुरक्षा के दावों की पोल भी खोल दी है।
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मेमो नहीं है अनिवार्य
एनसीआएमयू के केंद्रीय उपाध्यक्ष और सीटीआई हुकुम सिंह ने बताया कि जीटी एक्सप्रेस की घटना में आरपीएफ और जीआरपी को टीटीई ने कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचित कर दिया था। इसके बाद उन्हें ही आगे की कार्रवाई करनी थी। इसके लिए मेमो का होना अनिवार्य नहीं है। कंट्रोल रूम को सूचना देना ही टीटीई की जिम्मेदारी है।
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झांसी। रेलवे में सुरक्षित सफर के दावे पर युवती से छेड़खानी की घटना सवालिया निशान है। युवती की शिकायत के बाद भी टीटीई और आरपीएफ मेमो-मेमो खेलते रहे। ग्वालियर से लेकर झांसी तक युवती 135 मिनट तक डरी-सहमी सफर करती रही। 150 किमी के इस सफर में बेखौफ सैन्यकर्मी गंदे इशारे करते रहा।
जीटी एक्सप्रेस से झांसी तक का सफर कर पहुंची युवती ने बताया कि कैसे सैन्यकर्मी ने उससे पूरे सवा दो घंटे और डेढ़ सौ किलोमीटर तक छेड़खानी की। युवती ने बताया कि सैन्यकर्मी ने मुरैना निकलते ही छेड़खानी शुरू कर दी, इससे वह बुरी तरह सहम गई। जब शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आरोपी के हौसले और बुलंद हो गए। इसके बाद वह झांसी तक अपनी हरकतें करता रहा।
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युवती बोली... अकेले यात्रा करने में डरूंगी
इस घटना ने युवती को इतना डरा दिया कि वह अब अकेले सेकेंड एसी कोच में भी यात्रा करने में डरेगी। उसने बताया कि ट्रेन मुरैना से निकली तो इसके बाद शराब के नशे में धुत सैन्यकर्मी ने उससे छेड़खानी शुरू कर दी। उसने एक बार उसे नजरंदाज किया लेकिन, वह युवती पर फब्तियां कसने लगा। ट्रेन ग्वालियर पहुंची तो यहां सुरक्षा बल के जवान भी आए और बिना कार्रवाई किए चले गए। इससे आरोपी के हौसले और बुलंद हो गए और वह झांसी आने तक युवती से छेड़खानी करता रहा। पूरी घटना का अंत भी यह हुआ कि झांसी में सुरक्षा बल आए और चले गए। यहां युवती भी अपनी यात्रा पूरी कर उतर गई। लेकिन, इस घटना ने महिला यात्री सुरक्षा के दावों की पोल भी खोल दी है।
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मेमो नहीं है अनिवार्य
एनसीआएमयू के केंद्रीय उपाध्यक्ष और सीटीआई हुकुम सिंह ने बताया कि जीटी एक्सप्रेस की घटना में आरपीएफ और जीआरपी को टीटीई ने कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचित कर दिया था। इसके बाद उन्हें ही आगे की कार्रवाई करनी थी। इसके लिए मेमो का होना अनिवार्य नहीं है। कंट्रोल रूम को सूचना देना ही टीटीई की जिम्मेदारी है।