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अक्तूबर में पोस्ट मानसूनी बरसात के आसार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:08 AM IST
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rain, jhansi news
- फोटो : demo
भले ही मानसूनी बरसात से दगा दे दिया हो, पर अक्तूबर में पोस्ट (मानसून के बाद) मानसूनी बरसात होने की संभावना है। इससे पहले दस साल पूर्व2006-07 में जिले में 336.09 मिलीमीटर पानी बरसा था। इसके अलावा 2007-08 में 342.74 मिलीमीटर, 2009-10 में 539.06, 2010-11 में 558.51 और 2015-16 में 500.30 मिलीमीटर बरसात हुई थी। पानी कम बरसने से सूखा के आसार बहुत पहले से मंडराने लगे थे। जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने फसल ऋण माफी कार्यक्रम के दौरान किसानों को आश्वासन दिया था कि सूखा की आशंका है, इसलिए इस पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी। फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को देने के लिए खरीफ की फसलों का सर्वे किया जा रहा है। उम्मीद है कि जिले का सूखाग्रस्त घोषित करने से पहले फसलों का सर्वे हो जाएगा।
कृषि और मौसम विभाग के वैज्ञानिक डा. मुकेश चंद ने किसानों को सलाह दी है कि मूंग की पकी फलियां टूटने के बाद खेत में हरी खाद देने के लिए फलियों को खेत में ही पलट दें, ताकि खेत को जैविक रसायन मिल सके। सभी खाली खेतों मेें हैरो से जुताई करें। इससे खरपतवार नियंत्रित रहेंगे तथा पानी बरसने की स्थिति में खेत में नमी का सुरक्षित रहेगी। खेत में खीरा, ककड़ी और सब्जी भिंडी, करेला, लौकी व कद्दू की उचित देखभाल करें। सब्जियों का कीड़ों से बचाव करने के लिए मोनोक्रोटोफास एक लीटर को आठ सौ लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें और सब्जियों को सुरक्षित करें। जानवरों को खुरपका, मुंह पका और गलाघोंटू बीमारी से बचाव को टीके लगवाएं। पेट के कीड़े मारने के लिए ऐलबंडाजॉल दवा का प्रयोग करें। जानवरों को छुट्टा न छोड़ें।
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कृषि और मौसम विभाग के वैज्ञानिक डा. मुकेश चंद ने किसानों को सलाह दी है कि मूंग की पकी फलियां टूटने के बाद खेत में हरी खाद देने के लिए फलियों को खेत में ही पलट दें, ताकि खेत को जैविक रसायन मिल सके। सभी खाली खेतों मेें हैरो से जुताई करें। इससे खरपतवार नियंत्रित रहेंगे तथा पानी बरसने की स्थिति में खेत में नमी का सुरक्षित रहेगी। खेत में खीरा, ककड़ी और सब्जी भिंडी, करेला, लौकी व कद्दू की उचित देखभाल करें। सब्जियों का कीड़ों से बचाव करने के लिए मोनोक्रोटोफास एक लीटर को आठ सौ लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें और सब्जियों को सुरक्षित करें। जानवरों को खुरपका, मुंह पका और गलाघोंटू बीमारी से बचाव को टीके लगवाएं। पेट के कीड़े मारने के लिए ऐलबंडाजॉल दवा का प्रयोग करें। जानवरों को छुट्टा न छोड़ें।
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