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बालाबेहट के पार्श्वनाथ हरते हैं भक्तों की पीड़ा

Thu, 01 Sep 2022 12:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 01 Sep 2022 12:09 AM IST
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Parshvanath of Balabehat removes the sufferings of the devotees
झांसी/ललितपुर। बुंदेलखंड के जैन तीर्थों में भगवान पार्श्वनाथ के अतिशय और महिमा की लंबी शृंखला है। इसी शृंखला में एक और क्षेत्र बालाबेहट का भी अहम स्थान है। ललितपुर के बिरधा ब्लॉक में बसे इस तीर्र्थ पर भगवान पार्श्वनाथ ने कई चमत्कार किए हैं। यहां काले पाषाण में स्थापित भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति भक्तों का मन मोहती है। साथ ही यहां आकर भक्तों की पीड़ा दूर होती है।
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बालाबेहट क्षेत्र को लेकर जैन संत स्व. शीतलप्रसाद जी वर्णीे ने लिखा है कि यह क्षेत्र दो सौ वर्ष से चमत्कारों और अतिशयों के लिए विख्यात है। बताया जाता है कि पहले यहां बने दुर्ग में प्राचीन मंदिर था। जिसमें भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति अपने समवशरण के साथ विराजमान थी। किवंदती है कि एक बार एक चोर ने जिन मंदिर से मूर्ति चोरी कर गोबर के ढेर में छिपाकर रख दी। मूर्ति चोरी होने की अगली रात को स्थानीय श्रावक मलेशियाजी को स्वप्न आया कि मैं सुरक्षित हूं। इसके बाद मलेशियाजी ने स्वप्न के आधार पर बताए गए स्थान पर जाकर देखा तो मूर्ति वहां मिली। इसके बाद यहां नवीन जिन मंदिर का निर्माण किया गया।
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मूर्ति पर लिखी प्रशस्ति के आधार पर बताया जाता है कि विक्रम संवत 1446 में भगवान पार्श्वनाथ को यहां प्रतिष्ठित किया गया। इसके बाद मंदिर ढह जाने से यह भूमि में दब गई। करीब 1500 विक्रम संवत में मूर्ति को भूमि से निकालकर पुन: प्रतिष्ठित किया गया। आज भी यहां हर रविवार और मोक्ष सप्तमी पर्व पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं पहुंचते हैं।
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क्षेत्र के अध्यक्ष अभिषेक जैन अनौरा बताते हैं कि बालाबेहट के भगवान पार्श्वनाथ भक्तों की पीड़ा हरते हैं। क्षेत्र पर पहुंचने के लिए ललितपुर से सीधी बसें मिलती हैं। क्षेत्र पर पहुंचने वाली सड़कें जर्जर हैं। जिनके निर्माण और मरम्मत के लिए कई बार प्रशासन से मांग की जा चुकी है।
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