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ऑपरेशन के बजाए सिर्फ इंजेक्शन से दूर हो रहा दर्द
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ऑपरेशन के बजाए सिर्फ इंजेक्शन से दूर हो रहा दर्द
झांसी। पीठ दर्द, कमर दर्द और कुंलगवात् जैसी जटिल समस्याओं का सकल उपचार अब आसान है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के पेन क्लीनिक में ऑपरेशन के बिना ही सिर्फ इंजेक्शन से इन रोगों का बेहतर इलाज हो रहा है। ऐसे में मरीज इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
यह सुविधा हर बुधवार को ओपीडी बिल्डिंग में कमरा नंबर 123 (पेन क्लीनिक) में उपलब्ध है। हर शनिवार को ओटी कॉम्प्लैक्स में इंजेक्शन लगता है। मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. छवि सहगल ने इस विषय में फेलोशिप हासिल की है। बुंदेलखंड में पहली बार इंजेक्शन द्वारा लंबे समय से दर्द में जूझ रहे रोगियों को वह लाभान्वित कर रही हैं। डॉ. छवि ने बताया कि इस थेरेपी से दर्द में जल्दी आराम मिल जाता है। यह सर्जरी की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है। सर्जरी के विभिन्न खतरे जैसे पैरालिसिस, ब्लेडर एवं बोवेल कंट्रोल में क्षति, पैरों में कमजोरी, संक्रमण आदि देखने को मिलता है। जबकि, इस इंजेक्शन में ऐसा कोई भी खतरा नहीं है।
वहीं, डिस्क प्रोलेप्स (गुड़िया खिसकना), लंबर रेडीक्यूलोपैथी (कुलागवात्), डिजनेरेटिव डिस्क, फेसिट ज्वाइंट सिंड्रोम, सर्वाइकल रेडीक्यूलोपैथी जैसी स्थिति में भी इंजेक्शन के जरिए दर्द का उपचार संभव है। डॉ. छवि ने बताया कि यह थेरेपी आर्थिक रूप से भी किफायती है, क्योंकि मरीज तत्काल अपने काम पर जा सकता है। जीर्ण दर्द से जूझ रहे मरीजों की आवश्यक जांच परीक्षण किया जाता है। इसके बाद सीआर्म मशीन में देखकर दर्द पैरा करने वाले (पेन जेनरेटर) को शांत करने के लिए लगाया जाता है। अब तक ऐसा इलाज झांसी में उपलब्ध नहीं था। इसके लिए मरीजों को दिल्ली, लखनऊ और ग्वालियर जाना पड़ता था। अब तक कई रोगियों की जीवन शैली इस पद्धति से बहाल कर उन्हें दर्द से छुटकारा दिया जा चुका है।
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झांसी। पीठ दर्द, कमर दर्द और कुंलगवात् जैसी जटिल समस्याओं का सकल उपचार अब आसान है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के पेन क्लीनिक में ऑपरेशन के बिना ही सिर्फ इंजेक्शन से इन रोगों का बेहतर इलाज हो रहा है। ऐसे में मरीज इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
यह सुविधा हर बुधवार को ओपीडी बिल्डिंग में कमरा नंबर 123 (पेन क्लीनिक) में उपलब्ध है। हर शनिवार को ओटी कॉम्प्लैक्स में इंजेक्शन लगता है। मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. छवि सहगल ने इस विषय में फेलोशिप हासिल की है। बुंदेलखंड में पहली बार इंजेक्शन द्वारा लंबे समय से दर्द में जूझ रहे रोगियों को वह लाभान्वित कर रही हैं। डॉ. छवि ने बताया कि इस थेरेपी से दर्द में जल्दी आराम मिल जाता है। यह सर्जरी की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है। सर्जरी के विभिन्न खतरे जैसे पैरालिसिस, ब्लेडर एवं बोवेल कंट्रोल में क्षति, पैरों में कमजोरी, संक्रमण आदि देखने को मिलता है। जबकि, इस इंजेक्शन में ऐसा कोई भी खतरा नहीं है।
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वहीं, डिस्क प्रोलेप्स (गुड़िया खिसकना), लंबर रेडीक्यूलोपैथी (कुलागवात्), डिजनेरेटिव डिस्क, फेसिट ज्वाइंट सिंड्रोम, सर्वाइकल रेडीक्यूलोपैथी जैसी स्थिति में भी इंजेक्शन के जरिए दर्द का उपचार संभव है। डॉ. छवि ने बताया कि यह थेरेपी आर्थिक रूप से भी किफायती है, क्योंकि मरीज तत्काल अपने काम पर जा सकता है। जीर्ण दर्द से जूझ रहे मरीजों की आवश्यक जांच परीक्षण किया जाता है। इसके बाद सीआर्म मशीन में देखकर दर्द पैरा करने वाले (पेन जेनरेटर) को शांत करने के लिए लगाया जाता है। अब तक ऐसा इलाज झांसी में उपलब्ध नहीं था। इसके लिए मरीजों को दिल्ली, लखनऊ और ग्वालियर जाना पड़ता था। अब तक कई रोगियों की जीवन शैली इस पद्धति से बहाल कर उन्हें दर्द से छुटकारा दिया जा चुका है।
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