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श्रद्धा, भक्ति, जप-तप और उत्साह के नौ दिन आज से शुरू

Thu, 21 Sep 2017 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 21 Sep 2017 01:01 AM IST
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nine days festibal start now
nav durga jhansi news - फोटो : amar ujala
प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, तूने मुझे बुलाया शेरावालिए, दुर्गा है मेरी मां अंबे है मेरी मां और ऐसे ही कई भजनों के कर्णप्रिय स्वर से नौ दिन तक आपकी सुबह होगी। बृहस्पतिवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। महानगर के विभिन्न स्थानों पर मां के दरबार सज चुके हैं। सुबह पूजन के बाद मां की झांकियों को खोल दिया जाएगा। बृहस्पतिवार देर रात तक श्रद्धालु मां की प्रतिमाएं गाजे-बाजे से अपने पंडाल तक चले गए। इसके अलावा घरों में जवारे बोये जाएंगे, श्रद्धालु अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर माता के व्रत रखेंगे।
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शहर के प्राचीन देवी मंदिरों में पंचकुइयां मंदिर, सीपरी स्थित लहर की देवी मंदिर, लक्ष्मी गेट स्थित महाकाली मंदिर, मां लक्ष्मी मंदिर, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय पहाड़ी स्थित कैमासन मंदिर, सदर में काली मंदिर में बुधवार को पूरे दिन साज सजावट को अंतिम रूप दिया गया। इन सभी मंदिरों में माता जगदंबा के दर्शनों के लिए सुबह 4 बजे से भक्तों की भारी भीड़ लगनी प्रारंभ हो जाएगी। इसके अलावा पूरे दिन श्रद्धालुओं द्वारा अनुष्ठान किए जाएंगे। महानगर के कई इलाकों में तैयार दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं का उत्साह नजर आया। बच्चे गुब्बारों से मंच को सजाने में जुटे रहे। वहीं रात में कई पंडालों समितियां ढोल-नगाड़ों की धुनों पर मां की प्रतिमाएं ले जाते रहे। बृहस्पतिवार को वैदिक मंत्रों के बीच प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।
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अखंड ज्योति का विशेष महत्व
मां सिंहवाहिनी की पूजा-अनुष्ठानों में अखंड ज्योति का प्रज्वलन और घट स्थापना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इससे मातारानी तो प्रसन्न होती है, इसके साथ ही शत्रुओं का दमन और भाग्य उदय होता है। जिला धर्माचार्य महंत विष्णु दत्त स्वामी के मुताबिक प्रतिपदा पर पूजन-अनुष्ठान पर अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है, जो पूरे नौ दिन जलनी चाहिए। इस दौरान पूरे परिवार को ब्रह्मचर्य, भूमि पर सोना और व्रत रखना चाहिए। ज्योति का जलाशय में विसर्जन हवन के बाद ही करना चाहिए।
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कलश व दुर्गा पूजा का समय
नवरात्र क ी प्रतिपदा पर घट स्थापना, प्रतिमा स्थापना, पूजन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह आठ बजे से 10 बजे तक और दोपहर 11:30 बजे से 12:15 तक रहेगा। महंत विष्णु दत्त स्वामी के मुताबिक कलश स्थापना में चौकी पर मां गौरी, भगवान गणेश को स्थापित करें। इसके बाद ईशान कोण में दीपक व कलश रखे। कलश के मुख पर आम के सात पत्ते रखकर उस पर कलावा बांधकर नारियल रखे। कलश में रोली से त्रिशूल और स्वास्तिक जरूर बनाए और मां दुर्गा का आह्वान करें।

ये हैं शुभ मुहूर्त
नवरात्र के नौ दिनों में शुभ मुहूर्त में पूजन का भी विशेष महत्व है। 21 सितंबर को शुभ मुहूर्त सुबह आठ बजे से 10 बजे तक और दोपहर 11:30 बजे से 12:15 तक रहेगा। जबकि 22, 23, 24, 25 सितंबर को सुबह 9:15 से दोपहर 12:30 बजे तक, 26 सितंबर को 7:30 बजे से 11:30 बजे तक, दोपहर 12 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक, 28 सितंबर को सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक, फिर दोपहर 1:15 बजे से 2:30 बजे तक, 29 सितंबर को सुबह 7:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा।

प्रतिपदा पर अर्पित करें शुद्ध घी
शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा और प्रसाद में कई प्रकार क ी वस्तुओं का उपयोग किया जाता है, जो श्रद्धालु को सुख शांति प्रदान करते है। ज्योतिषविद् जेपी शुक्ला के मुताबिक प्रतिपदा पर शुद्ध घी का अर्पण, द्वितीया पर शक्कर का प्रसाद लगाने से लंबी आयु मिलती है। तृतीया पर पूूजन में दूध का उपयोग करें, इससे दुखों से मुक्ति मिलती हैं। चतुर्थी पर मालपुआ, पंचमी पर के ला का प्रसाद बुद्धि का विकास करता है। छठी पर शहद, सप्तमी पर गुड़, अष्टमी पर नारियल और नवमी पर काले तिल का पूजन में उपयोग और दान सुंदरता में वृद्धि, अनहोनी घटना से बचाव कराता है।

पुरखोें को किया विदा
बुधवार क ो अमावस्या पर लोगों ने अपने पुरखों को तर्पण कर उन्हें विदा किया। सुबह लोगों ने जलाशयों में जाकर अपने पूर्वजों, नाना पक्ष के पूर्वजों को कुशा द्वारा जल से तर्पण किया। इसके बाद गाय, कुत्ता, कौआ और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान किया गया। महानगर के आंतिया तालाब, लक्ष्मी तालाब, पानी वाली धर्मशाला सहित कई जलाशयों में लोग सुबह जुटने लगे। मंत्रों के आह्वान के बीच अपने पुरखों को जल दिया। यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। वहीं जल तर्पण के बाद लोगों ने गायों, मछलियों को भोजन कराया।

सुआटा की रंगोलियां बनेगी
शहर व गांवों के चबूतरों पर गोबर से लिपे चौक पर सुआटा की रंगोलियां बृहस्पतिवार से बननी शुरू हो जाएगी। यह नवमी तक चलेगा। बुंदेली लोक संस्कृति के जानकार हरगोविंद कुशवाहा के अनुसार लड़कियां प्रतिपदा पर एक, दोज पर दो, तीज पर तीन, चतुर्थी पर चार, पंचमी पर पांच, छठी पर छह, सप्तमी पर सात, अष्टमी पर आठ व नवमी पर नौ रंगोलियां बनाती है। पंचमी पर लड़कियां मामुलिया निकालती है। वहीं नरकासुर राक्षस की पूजा करती है। इस दौरान बुंदेली लोक गीत गाए जाते हैं।

धर्म-संस्कृति के गौरव का एहसास कराती है नवरात्र
नवरात्र सिर्फ पूजा भक्ति ही, नहीं बल्कि हमें अपने प्राचीन धर्म संस्कृति का भी गौरव कराती है। इस अनुभव को बच्चे भी जाने, इसके लिए जरूरी है कि माता जगदंबे की आराधना दिखावा न हो। यह कहना है उन लोगों का, जो नवरात्र पर व्रत, पूजा करेंगे।

आत्मिक बल मिलता है
नवरात्र के व्रत आत्मिक बल प्रदान करते है। माता दुर्गा से कामना करती है कि परिवार और पूरा देश खुशहाल रहे। घर में नवरात्र पर संपूर्ण वातावरण मां की भक्ति में विभोर हो जाता है।
पूनम स्वामी गृहणी स्वामीपुरम् कॉलोनी

सकारात्मक ऊर्जा रहती है
नवरात्र पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा आराधना और व्रत करने से सुख शांति व सौभाग्य की प्राप्ति होती है। माता के समक्ष कलश व अखंड दीप की स्थापना करने से सकारात्मक ऊर्जा घर में रहती है।
प्रियंवदा सेन, गृहणी निवासी गोंदू कंपाउंड।

बुराइयों को त्यागें
इस नवरात्र में तंबाकू, नशा करने, दहेज लेने जैसी बुराइयों का त्याग करने का संकल्प लेना चाहिए। विशेषकर हम सभी युवाओं को। तभी मां की भक्ति सही मायने में सार्थक हो पाएगी।
शिवम नायक निवासी मऊरानीपुर


आल्हा-ऊदल ने की थी लहर की देवी की पूजा
झांसी। महानगर के प्राचीन देवी मंदिरों में सीपरी स्थित लहर की देवी का मंदिर प्रमुख है। ऐसी मान्यता है कि बुंदेली की लोक गाथाओं के वीर नायक आल्हा-ऊदल ने यहां कमल के पुष्प पर विराजी मां की पूजा की थी। यह भी कहा जाता है कि शत्रुओं को हराने के लिए आल्हा के पुत्र इंदल की बलि चाचा ऊदल ने दी थी, जो मां की कृपा से फिर जीवित हो उठा था। मंदिर के महंत मोहन गिरी महाराज ने बताया कि चंदेल काल में निर्मित मंदिर के गर्भगृह में मां की प्रतिमा कमल के पुष्प पर विराजी है। उनके तीन हाथों में खड़ग, खप्पर और चक्र है, जबकि एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में है। मंदिर में नवरात्र के नौ दिन मेला लगता है। मां के दर्शन सुबह चार बजे से रात 10:30 बजे तक होंगे।

बुधवार को फलों ने खाए भाव
झांसी। बृहस्पतिवार से नवरात्र के व्रत शुरू हो जाएंगे। लेकिन फलों के दाम इससे पहले ही भाव खा गए। मंगलवार तक 40 से 50 रुपये किलो बिकने वाला सेब बुधवार को 70 रुपये तक पहुंचा। केला 20 रुपये में 10 से 30 रुपये के एक दर्जन हो गए। फल विक्रेताओं के अनुसार बृहस्पतिवार को दाम और बढ़ेंगे। बड़ाबाजार में फल विक्रेता पप्पू और राम प्रसाद ने बताया कि मंगलवार को अनार 40 रुपये किलो था, जो 50 हो गया है। सुभाष गंज के किराना व्यापारी बलराम साहू ने बताया कि सिंघाडे़ का आटा 120 रुपये किलो, कुट्टू का आटा 120 रुपये किलो, साबूदाना 75 रुपये किलो और मूंगफली का दाना 70 रुपये किलो, सेंधा नमक 20 रुपये किलो चल रहा है।

 तैयारियां पूरीं
बड़ागांव कस्बा के बाजार सहित विभिन्न मोहल्लों में मां दुर्गा जी की प्रतिमाओं की स्थापना हेतु पंडाल तैयार हो चुके हैं। श्रद्धालु तैयारी कर रहे हैं। 21 सितंबर को सभी मूर्ति स्थलों पर मूर्तियों की स्थापना के साथ नवरात्र पर्व का शुभारंभ होगा।


कलश यात्रा आज
बबीना के जलनिगम स्थित सर्वेश्वर महादेव मंदिर मे नवदुर्गा महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। बृहस्पतिवार को कलश यात्रा निकाली जाएगी। शुक्रवार से वृंदावन के अंकित कृष्ण महाराज श्रीमद्भागवत कथा सुनाएंगे। देवी मां की सुबह शाम आरती की जाएगी। नवमी को भागवत कथा के समापन पर मुख्य यजमान मीना देवी और साहब सिंह यादव कन्या भोज कराएंगे।
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