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मददगार और खुशमिजाज कलाकार थे नाना पाटेकर : राज शांडिल्य

Fri, 09 Oct 2026 02:40 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 02:40 AM IST
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Nana Patekar was a helpful and cheerful artist: Raj Shandilya
स्मृति शेष - झांसी निवासी फिल्म निर्देशक बोले-उनके निधन की खबर ने भीतर तक झकझोर दिया
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संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। प्रसिद्ध सिने अभिनेता और रंगमंच कर्मी नाना पाटेकर के निधन की खबर ने झांसी निवासी फिल्म निर्देशक और लेखक राज शांडिल्य को भीतर तक झकझोर दिया। नाना से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए राज ने कहा कि वह सिर्फ बड़े कलाकार नहीं, बल्कि बेहद सहज, खुशमिजाज और मददगार इन्सान थे। उनके भीतर जरा भी अहंकार नहीं था। उनके साथ काम करने और उन्हें करीब से जानने का अवसर मिलना उनके लिए हमेशा खास रहेगा।

खाती बाबा निवासी राज शांडिल्य अब मुंबई के अंधेरी वेस्ट में रहते हैं। वह नाना पाटेकर के लंबे समय से प्रशंसक रहे हैं। वर्ष 2013 में उन्हें नाना पाटेकर अभिनीत फिल्म ‘वेलकम बैक’ के संवाद लिखने का अवसर मिला। फिल्म वर्ष 2015 में रिलीज हुई थी। राज बताते हैं कि इतने बड़े कलाकार के साथ पहली बार काम करने को लेकर शुरुआत में उन्हें संकोच और डर जरूर लगा था, लेकिन नाना के सहज व्यवहार ने जल्द ही यह झिझक दूर कर दी।
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राज के अनुसार, नाना के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी उनका जमीन से जुड़ा होना था। वह कहते हैं, ‘नाना बहुत सहज हृदय इन्सान थे। उनमें रंचमात्र भी अभिमान नहीं था। उनके साथ काम करते हुए ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ कि वह इतने बड़े अभिनेता हैं। उनका स्नेहभाव ही ऐसा था कि उनके साथ काम करने में आनंद आता था।’
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राज ने बताया कि नाना से उन्होंने केवल सिनेमा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने का सलीका भी सीखा। काम के प्रति लगन, अनुशासन और जिम्मेदारी को लेकर नाना बेहद गंभीर रहते थे। उन्होंने कहा कि नाना के साथ बिताए समय ने उन्हें पेशेवर जीवन में बहुत कुछ सिखाया।


झांसी और बुंदेलखंड से था खास लगाव
राज के मुताबिक, नाना पाटेकर का झांसी और बुंदेलखंड से भी विशेष लगाव था। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई और हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की धरती होने के कारण वह झांसी के लोगों का बहुत सम्मान करते थे। हालांकि, नाना कभी झांसी नहीं आ सके, लेकिन यहां के लोगों और इस क्षेत्र के प्रति उनके मन में खास सम्मान था।

राज ने एक दिलचस्प संस्मरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि झांसी में रहते हुए उन्होंने अपने जीवन में कोई फिल्म नहीं देखी थी। बाद में परिवार के साथ उन्होंने ‘वेलकम बैक’ देखी। इसी फिल्म के दौरान नाना के साथ काम करने की उनकी यादें भी उनके जेहन में ताजा हो गईं।


साइबर अपराध के खिलाफ भी साथ आए
राज ने बताया कि इसी वर्ष नाना पाटेकर के साथ एक शॉर्ट फिल्म पर भी काम करने का अवसर मिला। वह फिल्म साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। राज इसके निर्माता और निर्देशक रहे, जबकि नाना पाटेकर ने इसमें अपने अभिनय से संदेश को प्रभावी बनाया। राज के मुताबिक नाना के शानदार काम की वजह से फिल्म को व्यापक दर्शक मिले और इसे अब तक करीब एक करोड़ लोगों ने देखा है।

आखिरी मुलाकात में कहा था- गोवा आ जाना
राज बताते हैं कि पिछले महीने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनकी नाना पाटेकर से मुलाकात हुई थी। दोनों वहां से साथ मुंबई आए थे। इसके बाद नाना गोवा चले गए। विदा होते समय नाना ने राज से कहा था, ‘गोवा आ जाना, वहीं फिल्म के लेखन और निर्देशन पर चर्चा करेंगे।’

राज कहते हैं कि उन्हें क्या पता था कि यह मुलाकात आखिरी होगी। वह नाना से मिलने गोवा जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही उनके निधन की खबर आ गई। ‘ऊपर वाले को शायद कुछ और ही मंजूर था। हम उनसे मिलने के लिए जाने वाले थे और वह हमें हमेशा के लिए छोड़कर चले गए। उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। इसकी भरपाई कर पाना संभव नहीं है।’ यह कहते-कहते राज की आंखें भर आईं।

घंटों जिम और खेतों में मेहनत करते थे नाना
राज शांडिल्य ने नाना पाटेकर की जीवनशैली को याद करते हुए बताया कि वह अपनी फिटनेस को लेकर बेहद सजग रहते थे। घंटों जिम में पसीना बहाने के साथ ही खेती-किसानी में भी रुचि रखते थे। गांव में खेतों में खुद मेहनत करते थे। राज ने कहा कि नाना जैसे अनुशासित और मेहनती व्यक्ति का इस तरह अचानक दुनिया से चले जाना बेहद सदमा पहुंचाने वाला है।
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-जब नाना ने कहा था... बुंदेलखंड में नाना पाटेकर नहीं, इसलिए सूखा है
-समाजसेवी संजय सिंह ने साझा कीं अभिनेता से जुड़ीं यादें, बोले- देश ने सच्चा पर्यावरण साथी खोया
संवाद न्यूज एजेंसी

झांसी। अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर सुनकर समाजसेवी संजय सिंह भावुक हो गए। इन दिनों बुंदेलखंड में ‘युवा जलवायु परिवर्तन संदेश यात्रा’ के तहत साइकिल यात्रा कर रहे संजय सिंह ने नाना पाटेकर से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर केवल एक प्रख्यात अभिनेता नहीं थे, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति गहरी संवेदना रखने वाले व्यक्ति और सच्चे पर्यावरण साथी थे।
फोन पर संजय सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह नाना पाटेकर के निधन की खबर मिली तो मन बहुत भारी हो गया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में जब वर्ष 2014-15 में भीषण सूखा पड़ा था, तब उनकी और योगेंद्र यादव की नाना पाटेकर से मुलाकात हुई थी। महाराष्ट्र में जल संकट और सूखे से निपटने के लिए नाना के किए जा रहे काम से वे बेहद प्रभावित थे।

संजय सिंह के मुताबिक, एक बैठक में नाना पाटेकर ने बुंदेलखंड के सूखे को लेकर बेहद मार्मिक बात कही थी। उन्होंने कहा था, ‘बुंदेलखंड हर साल इसलिए सूखा प्रभावित होता है, क्योंकि यहां नाना पाटेकर नहीं हैं।’ नाना ने महाराष्ट्र में जल संकट और सूखे से निपटने के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा लगाया था। उन्होंने कहा कि नाना हमेशा प्रकृति के बेहद करीब रहे। अपनी बात बेबाकी से कहने के साथ ही वह अपने गहरे कटाक्षों के जरिये समाज और व्यवस्था को आईना दिखाते रहे। उनका व्यक्तित्व उन्हें हमेशा प्रेरित करता रहा।
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