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Jhansi: टीचर ने किया एआई शिक्षक सुमन का आविष्कार, होंठ हिलाकर देती है बच्चों के हर सवाल का जवाब
Fri, 05 Sep 2025 12:50 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 05 Sep 2025 12:50 PM IST
सार
शिक्षक एआई सुमन मैडम बच्चों को पढ़ाती है। उनके प्रश्नों के उत्तर देती है और होंठ हिलाकर बोलती भी है।
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बच्चों को पढ़ातीं एआई मैडम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गरौठा निवासी साधारण परिवार से निकल शिक्षक मोहनलाल सुमन ने अपने नवाचार से विद्यार्थियों को साक्षर बनाने की अनूठी पहल की है। उनके द्वारा विकसित अनूठे नवाचार एआई सुमन मैडम को प्रतिष्ठित पत्रिका फोन्स ने दूसरी बार सराहा है। मात्र 3000 रुपये में बना यह कृत्रिम शिक्षक एआई सुमन मैडम बच्चों को पढ़ाती है। उनके प्रश्नों के उत्तर देती है और होंठ हिलाकर बोलती भी है।
मोहनलाल सुमन ने आर्थिक तंगी के बावजूद सरकारी विद्यालयों से शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1999 में वे बांदा के प्राथमिक विद्यालय लखनपुर में सहायक अध्यापक नियुक्त हुए। स्थानांतरण के बाद अभी वह गुरसराय के प्राथमिक विद्यालय राजापुर में अपनी सेवाएं देने लगे। यहीं से उनके नवाचारों ने अपनी अलग पहचान बना ली। उन्होंने शिक्षा को व्यावहारिक और आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए। चंद्रयान-3 मॉडल को उड़ाकर दिखाया। बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान सरलता से समझाने से लेकर मूर्ति कला, पेंटिंग, रंगोली, मेहंदी जैसी रचनात्मक गतिविधियां भी स्कूल में कराते हैं। संगीत और एंकरिंग का प्रशिक्षण देते हैं।
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मोहनलाल सुमन ने आर्थिक तंगी के बावजूद सरकारी विद्यालयों से शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1999 में वे बांदा के प्राथमिक विद्यालय लखनपुर में सहायक अध्यापक नियुक्त हुए। स्थानांतरण के बाद अभी वह गुरसराय के प्राथमिक विद्यालय राजापुर में अपनी सेवाएं देने लगे। यहीं से उनके नवाचारों ने अपनी अलग पहचान बना ली। उन्होंने शिक्षा को व्यावहारिक और आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए। चंद्रयान-3 मॉडल को उड़ाकर दिखाया। बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान सरलता से समझाने से लेकर मूर्ति कला, पेंटिंग, रंगोली, मेहंदी जैसी रचनात्मक गतिविधियां भी स्कूल में कराते हैं। संगीत और एंकरिंग का प्रशिक्षण देते हैं।
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एआई मैडम के साथ सेल्फी लेते शिक्षक और बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा आत्मरक्षा प्रशिक्षण और लोक संस्कृति संरक्षण की भी जानकारी देते हैं। समाज में जागरूकता लाने के लिए लघु फिल्मों का भी निर्माण करते हैं। मेहनत और नवाचार की बदौलत उन्हें तीन बार केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। तीन बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में विजेता बनने पर राज्य स्तरीय पुरस्कार भी मिला।
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