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मैहर घराने का नाम रोशन कर रहे संगीत रत्न पंडित परशुराम पाठक

Wed, 16 Jun 2021 01:28 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jun 2021 01:28 AM IST
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maihar gharane ka nam roshan kar rahe pandit parasuram
मैहर घराने का नाम रोशन कर रहे संगीत रत्न पंडित परशुराम पाठक
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गुरसराय (झांसी)। संगीत जगत में मैहर घराने का नाम रोशन कर रहे गुरसराय के पंडित परशुराम पाठक के हुनर का सरोवर दूर-दूर तक बहता है। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में अपने सितार वादन से इन्होंने न सिर्फ कई मंचों को झंकृत किया है, इनके सिखाए कई शिष्य भी संगीत के मंचों, टीवी और आकाशवाणी में अपना हुनर दिखा रहे हैं। संगीत रत्न, श्री नटराज और श्री नाद सम्मान से विभूषित पंडित परशुराम आज भी सितार वादन के जरिए युवाओं को संगीत की शिक्षा दे रहे हैं।
82 वर्ष के पंडित परशुराम पाठक का जन्म थाना पनवाड़ी जिला महोबा के गांव सेंवड़ी में हुआ था। छोटी उम्र में अपने पिता की मृत्यु के बाद वह अपने नाना के यहां गरौठा तहसील के गांव खड़ौरा आ गए थे। तब से इनका पालन-पोषण यहीं पर हुआ। इन्होंने गरौठा के निवासी रहे पंडित पन्नालाल जैन से 19-20 वर्ष की उम्र में सितार वादन सीखना शुरू किया था। पंडित पन्नालाल विश्वविख्यात मैहर घराने के अलाउद्दीन खां के शिष्य थे। अपने श्रेष्ठ गुरुजनों की परंपरा के चलते इन्होंने भी गुरुकुल परंपरा अपनाई और अपने शिष्यों को निशुल्क शिक्षा देकर संगीत की सेवा की। लखनऊ,, छतरपुर, अयोध्या, महोत्सव, सवाई महोत्सव आगरा, चित्रकूट महोत्सव के अलावा झांसी महोत्सव समेत कई शहरों में इनके सितार वादन को ख्याति मिली।
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इन्होंनेे गुरसराय में प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से संबद्ध मां शारदा संगीत विद्यालय की स्थापना की। जिसका संचालन उनके पुत्र सितार वादक पं सरजू शरण पाठक कर रहे हैं। वह भी निशुल्क संगीत शिक्षा को बढ़ावा देकर मैहर घराने का नाम बढ़ा रहे हैं। पं सरजू शरण गुरसराय के आत्माराम गोविंद खैर इंटर कॉलेज में संगीत शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।
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पंडित परशुराम पाठक कई वर्षों तक आकाशवाणी में निर्णायक पद पर रहे और बेसिक शिक्षा परिषद में लंबे समय तक अध्यापक रहे। बुंदेलखंड में संगीत को मंच दिया। इन्होंने सितार वादन में भी अनेक रचनाएं दीं। देश के कई मंचों पर उन्होंने एकल वादन एवं संगतकारी की और कई सम्मान प्राप्त किए। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें कई बार सम्मानित किया। वहीं वर्ष 2007 में मुलायम सिंह यादव के द्वारा सम्मानित किए गए। पंडित पाठक जी का मानना है कि संगीत को व्यवसाय नहीं बल्कि गुरुकुल पद्धति से सिखाया जाना चाहिए। संगीत को जूनियर और माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य विषय के रूप में लागू करना चाहिए, इससे सैकड़ों संगीतकारों को रोजगार मिलेगा।
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