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Jhansi: रोडवेज का सफर असुरक्षित... अधिकतर बसों में नहीं हैं फर्स्ट एड बॉक्स,फायर सेफ्टी सिलिंडर भी खाली

Fri, 12 Sep 2025 02:23 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Fri, 12 Sep 2025 02:23 PM IST
सार

अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं हैं। कुछ में हैं तो उनमें दवाई मौजूद नहीं है। फायर सेफ्टी सिलिंडर भी खाली पड़े हैं। कुछ में तो एक्सपायरी तक अंकित नहीं है।

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Jhansi: Roadways travel is unsafe... Most buses do not have first aid boxes, fire safety cylinders are also em
बसस्टैण्ड पर खड़ी रोडवेज बसें - फोटो : संवाद

विस्तार

रोडवेज में सफर के दौरान अचानक आपको कोई चोट लग जाए, खून निकल आए तो आप परेशान हो सकते हैं। कारण अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं हैं। कुछ में हैं तो उनमें दवाई मौजूद नहीं है। फायर सेफ्टी सिलिंडर भी खाली पड़े हैं। कुछ में तो एक्सपायरी तक अंकित नहीं है। अब यदि हादसा या आगजनी हो तो यात्रियों के बचाव की कोई सुविधा नहीं है।
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बृहस्पतिवार को परिवहन निगम की बसों की पड़ताल की तो यह हकीकत सामने आई। परिवहन निगम के सुरक्षित सफर के दावे यहां हवाई नजर आए। दोपहर 1.41 बजे बस क्रमांक यूपी 78 एफएन 7432 एसी बस थी। देखा तो इसमें फर्स्ट एड बॉक्स लगा था लेकिन यह टूटा था। कोई दवाई इसमें मौजूद नहीं थी। ड्राइवर प्रभुल्ल कुमार श्रीवास्तव से पूछा तो बताया कि निगम की ओर से कोई दवाई नहीं दी जाती है। इसी बस में फायर सेफ्टी सिलिंडर गंदगी से घिरा पड़ा था। उठाकर देखा गया तो इसमें न तो कोई ब्यौरा था और न ही यह जानकारी थी कि कब एक्सपायर होगा। इसके अलावा, यूपी-93 बीटी 1695 बस की पड़ताल की गई तो इसमें भी बॉक्स था लेकिन दवाई नहीं। इसके अलावा एक अन्य बस में बॉक्स ही नहीं था। अब ऐसे में यही बात सामने आती है कि सवारियों से टिकट के पैसे वसूलकर रोडवेज केवल उनको गंतव्य तक पहुंचाने का काम करता है। बीच सफर में उनकी जान की कोई परवाह नहीं है।
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यह है नियम

चलती बस में यदि यात्री को कोई चोट आ जाए या खून बहने लगे तो इसके लिए प्रत्येक बस में फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा मुहैया होती है। इसमें रूई, पट्टी, डेटॉल के साथ अन्य उपचार संबंधी मरहम आदि होते हैं ताकि घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देकर उसकी चोट से बह रहे खून को रोका जा सके।
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आम बसों की तरह होती है इनकी भी फिटनेस

रोडवेज बसाें की फिटनेस जांच भी सामान्य वाहनों की तरह ही होती है। जांच के दौरान फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, ब्रेक, हार्न, वाइपर, इंडिकेटर, साफ-सफाई, प्रदूषण, स्टेयरिंग, लाइट, ढांचा (लंबाई व चौड़ाई), वाहन चलने लायक है कि नहीं, शाकर, चेसिस, बाडी, इंजन, स्पीडोमीटर, गेयर, टायर, शीशा, इलेक्ट्रिकल (वायरिंग), डेंट-पेंट, नंबर प्लेट, परवर्ती टेप, टैक्स और बीमा की जांच होती है लेकिन जांच के दौरान इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है।


इन्होंने बताया 

झांसी परिवहन सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक रामदास सोनकर का कहना है कि डिपो से सभी परिचालकों को फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध कराए जाते हैं। समय-समय पर दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। मामले की जांच की जाएगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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