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Jhansi: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 54 क्रशर संचालकों को थमाया नोटिस, एंटी स्मोक गन लगाने की हिदायत

Tue, 16 Sep 2025 09:10 AM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Tue, 16 Sep 2025 09:10 AM IST
सार

पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से सघन पौधरोपण क्षेत्र में होना अनिवार्य है। नियम के तहत स्टोन क्रेशर में सुबह और शाम सिंचाई होना अनिवार्य है, जिससे डस्ट न उड़े।

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Jhansi: Pollution Control Board issued notice to 54 crusher operators, instructing them to install anti-smoke
क्रशर - फोटो : संवाद

विस्तार

शासन के नियमों को ताक पर रखकर क्रशरों का संचालन किया जा रहा है। यहां से उड़ती धूल न केवल आसपास एरिया में वायु को प्रदूषित कर रही है, बल्कि लोगों को परेशानियां पैदा कर रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऐसे 54 क्रशर संचालकों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा है कि धूल से फैल रहे वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए क्या उपाय किए गए हैं। स्टोन क्रेशर संचालकों को अगले एक माह में उपस्थित होकर लिखित जवाब देने के लिए कहा गया है। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनसे प्रतिदिन जुर्माना वसूला जाएगा।
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झांसी जनपद में करीब 200 क्रशर संचालित हैं। प्रमुख रूप से खैलार और गोरामछिया में यह गिट्टी और डस्ट बनाने का कार्य कर रहे हैं। इस कार्य से उड़ रही धूल से जहां फसलों को काफी नुकसान पहुंच रहा है, तो वहीं लोगों को भी सांस लेने में काफी समस्या उत्पन्न हो रही है। राहगीरों को भी आवागमन करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ क्रशर संचालक मानकों का यहां पालन नहीं कर रहे हैं। यह शिकायतें प्रशासन के समक्ष पहुंची। जिसको संज्ञान में लेते हुए मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने इन क्रशरों की जांच करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यहां बड़े पैमाने पर धूल उड़ाने और इस पर नियंत्रण न करने वाले 54 संचालकों को नोटिस जारी किया है। इन्हें निर्देश दिए कि धूल पर नियंत्रण के लिए मानकों का पालन करें, साथ ही एंटी स्मोक गन भी लगाएं। इसमें कुछ ने यहां लगा भी लिए हैं। लेकिन जिन्होंने नहीं लगाए हैं, उन्हें फिर से नोटिस जारी किया है कि वह जल्द ही इसका अनुपालन कर कार्यालय को अवगत करायें। अन्यथा की स्थिति में इनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए जुर्माना तय किया जाएगा।
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ये हैं क्रेशर संचालन के नियम

डस्ट को बाहर जाने से रोकने के लिए डस्ट अरेस्टर होना चाहिए। जहां पर क्रेशर संचालित है उस क्षेत्र के तीन ओर बड़ी दीवार होना चाहिए। पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से सघन पौधरोपण क्षेत्र में होना अनिवार्य है। नियम के तहत स्टोन क्रेशर में सुबह और शाम सिंचाई होना अनिवार्य है, जिससे डस्ट न उड़े। क्रेशर के पास घनी आबादी न हो। नदी के किनारे क्रेशर संचालित करने की अनुमति नहीं है।
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क्या है जुर्माने का प्रावधान

क्रशर संचालकों के लिए प्रदूषण नियंत्रण के लिए मानक तय किए गए हैं। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो पहले उन्हें नोटिस देकर इसका पालन करने की हिदायत दी जाएगी। इसके बाद भी वह ऐसा नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जुर्माना तय किया जाएगा। जुर्माने की राशि 6,250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वसूले जाने का प्रावधान है।


इन्होंने बताया

झांसी उ.प्र.प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी इमरान अली ने बताया कि क्रशर संचालकों की समय-समय पर जांच की जाती है। धूल उड़ने की शिकायत पर इन्हें नियंत्रण के लिए हिदायत देते हुए नेाटिस थमाए गए हैं। यदि वह ऐसा नहीं करेंगे तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्टोन क्रशर पर्यावरण संरक्षण को बेहतर बनाने के लिए कार्य करें।
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