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झांसी: ब्लैक फंगस से मरीज की जान बचाने के लिए निकाला जबड़ा, तीन घंटे तक चली सर्जरी
Fri, 28 May 2021 09:51 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 28 May 2021 09:51 PM IST
सार
झांसी मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को 57 वर्षीय व्यक्ति भर्ती हुआ था। जांच पड़ताल के दौरान उसमें ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। यह फंगस नाक से होते हुए जबड़े से लेकर दिमाग की नीचे हड्डी तक पहुंच गई थी। जबड़े के ऊपरी हिस्से की हड्डी को गला दिया था। ऐसे में तत्काल डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन करने का फैसला लिया।
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ब्लैक फंगस की एक्सरे जांच करते डॉक्टर
- फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
ब्लैक फंगस से मरीज की जान बचाने के लिए मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को जबड़ा तक निकालना पड़ गया। दंत रोग विभाग के चिकित्सकों ने गल चुके जबड़े के ऊपरी हिस्से को निकाला। लगभग तीन घंटे में यह सर्जरी पूरी हो सकी। अब मरीज खतरे से बाहर बताया जा रहा है।
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मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को 57 वर्षीय व्यक्ति भर्ती हुआ था। जांच पड़ताल के दौरान उसमें ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। यह फंगस नाक से होते हुए जबड़े से लेकर दिमाग की नीचे हड्डी तक पहुंच गई थी। जबड़े के ऊपरी हिस्से की हड्डी को गला दिया था। ऐसे में तत्काल डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन करने का फैसला लिया। मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. रजत मिसुरिया ने जबड़े और चेहरे की सर्जरी कर प्रभावित जबड़े का बड़ा हिस्सा हटा दिया।
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इसके अलावा मरीज के साइनस आदि हिस्सों में मौजूद फंगस को भी डॉक्टरों की टीम ने निकाला। डॉ. रजत ने बताया कि इस तरह का ब्लैक फंगस का पहला ऑपरेशन बुंदेलखंड में हुआ है। यदि मरीज अस्पताल में भर्ती होने में और देरी कर देता हो दिमाग तक फंगस पहुंच सकती थी। फिर उसे बचाना मुश्किल हो जाता।
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अब तक हो चुके 25 भर्ती, 10 ऑपरेशन
मेडिकल कॉलेज के क्रिटिकल केयर इंचार्ज डॉ. रामबाबू ने बताया कि अस्पताल में ब्लैक फंगस के अब तक 25 मरीज भर्ती हो चुके हैं, जबकि दस का ऑपरेशन किया जा चुका है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई देते पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें। समय रहते ऑपरेशन हो जाने पर जान का खतरा नहीं रहता है।