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चौबीस घंटे में एक मिनट भी नहीं सोते इंस्पेक्टर साहब!
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झांसी। थानों में तैनात इंस्पेक्टर साहब चौबीस घंटे में एक मिनट में नहीं सोते। यह बात सुनने में अटपटी जरूर लगेगी। लेकिन थाने की जीडी (जनरल डायरी) यही कह रही है। आजादी के बाद से ही जीडी में कोई बदलाव नहीं हुआ। आज भी आवास में रहने या फिर सोने के समय का जीडी में कोई उल्लेख नहीं होता है। लिखा- पढ़ी में वे 24 घंटे काम करते हैं।
पुलिस प्रपत्र संख्या 2017 ए जीडी एक ऐसा अभिलेख है, इसमें थाने पर होने वाली सभी गतिविधियों को समयानुसार दर्ज करना होता है। रात 12 बजे तारीख बदलने के साथ जीडी का समय शुरू होता है। प्रदेश के थाने अभी भी सन 1861 में बने पुलिस रेगुलेशन एक्ट के तहत चल रहे है। 1973 से थानों में जीडी लिखने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक 24 घंटे ड्यूटी पर रहते हैं। कभी मुल्जिम की सुरागरसी में तो कभी किसी मुकदमे की विवेचना में दिखाया जाता है। यह पुलिसिंग के लिए दिन व रात काम कर रहे हैं। इसमें आमद, रवानगी और थाना कार्यालय में मौजूदगी के अलावा कोई उल्लेख नहीं होता है। आजादी के बाद भी पुलिस अंग्रेजों के बनाए नियम-कानून पर चल रही है। आजादी के बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। आज भी वही उल्लेख होता है, जो अंग्रेजी हुकूमत में होता था।
जीडी में होता है पूरे 24 घंटे का ब्योरा
जीडी में सबसे पहले सुबह चार से छह बजे के बीच नक्शा नौकरी की एंट्री की जाती है। इसमें थानेदार उस दिन थाने में तैनात पुलिसकर्मियों और उनके बीच कार्य विभाजन का ब्योरा लिखते हैं। इसके बाद थानेदार द्वारा थाने का मुआयना लिखा जाता है। इसमें मालखाना से लेकर हवालात और कार्यालय आदि के मुआयने की जानकारी दी जाती है।
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तब रुक जाती है जीडी
कोई घटना होने या किसी संदिग्ध के पकड़े जाने के बाद थाने में उनसे पूछताछ के दौरान जीडी रोक दी जाती है। इसका उद्देश्य मुकदमा लिखने में देरी, इस दौरान होने वाली सेटिंग या ऊपर से आने वाले दबाव से निपटना होता है। कई बार छुट्टी से लौटने में अगर पुलिस कर्मियों को देर होती है तो भी वे मुंशी से कहकर जीडी रुकवा देते हैं। थाने पर लौटने के बाद बीते समय में ही अपनी आमद करा लेते हैं।
जीडी में दर्ज होने वाली प्रमुख गतिविधियां
- पहरा ड्यूटी में परिवर्तन।
- पुलिस कर्मियों की आमद-रवानगी।
- थाना परिसर की साफ -सफाई।
- कोई सूचना सेट से प्रसारित करने।
- एसओ का अभिलेख निरीक्षण।
- कल पुर्जों की मरम्मत का कार्य।
थाने की जीडी में थानेदार की हर गतिविधि का ब्योरा दर्ज होता है। मगर, चौबीस घंटे में उनके सोने का कोई समय इसमें अंकित नहीं होता। इसीलिए सोने को जाने से पहले उनकी थाने पर आमद करा दी जाती है। विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी
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पुलिस प्रपत्र संख्या 2017 ए जीडी एक ऐसा अभिलेख है, इसमें थाने पर होने वाली सभी गतिविधियों को समयानुसार दर्ज करना होता है। रात 12 बजे तारीख बदलने के साथ जीडी का समय शुरू होता है। प्रदेश के थाने अभी भी सन 1861 में बने पुलिस रेगुलेशन एक्ट के तहत चल रहे है। 1973 से थानों में जीडी लिखने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक 24 घंटे ड्यूटी पर रहते हैं। कभी मुल्जिम की सुरागरसी में तो कभी किसी मुकदमे की विवेचना में दिखाया जाता है। यह पुलिसिंग के लिए दिन व रात काम कर रहे हैं। इसमें आमद, रवानगी और थाना कार्यालय में मौजूदगी के अलावा कोई उल्लेख नहीं होता है। आजादी के बाद भी पुलिस अंग्रेजों के बनाए नियम-कानून पर चल रही है। आजादी के बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। आज भी वही उल्लेख होता है, जो अंग्रेजी हुकूमत में होता था।
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जीडी में होता है पूरे 24 घंटे का ब्योरा
जीडी में सबसे पहले सुबह चार से छह बजे के बीच नक्शा नौकरी की एंट्री की जाती है। इसमें थानेदार उस दिन थाने में तैनात पुलिसकर्मियों और उनके बीच कार्य विभाजन का ब्योरा लिखते हैं। इसके बाद थानेदार द्वारा थाने का मुआयना लिखा जाता है। इसमें मालखाना से लेकर हवालात और कार्यालय आदि के मुआयने की जानकारी दी जाती है।
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तब रुक जाती है जीडी
कोई घटना होने या किसी संदिग्ध के पकड़े जाने के बाद थाने में उनसे पूछताछ के दौरान जीडी रोक दी जाती है। इसका उद्देश्य मुकदमा लिखने में देरी, इस दौरान होने वाली सेटिंग या ऊपर से आने वाले दबाव से निपटना होता है। कई बार छुट्टी से लौटने में अगर पुलिस कर्मियों को देर होती है तो भी वे मुंशी से कहकर जीडी रुकवा देते हैं। थाने पर लौटने के बाद बीते समय में ही अपनी आमद करा लेते हैं।
जीडी में दर्ज होने वाली प्रमुख गतिविधियां
- पहरा ड्यूटी में परिवर्तन।
- पुलिस कर्मियों की आमद-रवानगी।
- थाना परिसर की साफ -सफाई।
- कोई सूचना सेट से प्रसारित करने।
- एसओ का अभिलेख निरीक्षण।
- कल पुर्जों की मरम्मत का कार्य।
थाने की जीडी में थानेदार की हर गतिविधि का ब्योरा दर्ज होता है। मगर, चौबीस घंटे में उनके सोने का कोई समय इसमें अंकित नहीं होता। इसीलिए सोने को जाने से पहले उनकी थाने पर आमद करा दी जाती है। विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी