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सरकारी जमीन से चलती थी काली 'सरकार': नाबालिगों को रखता था सेवादार, 30,000 के विवाद ने खोली हिस्ट्रीशीटर की पोल
Tue, 13 Oct 2026 01:31 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 13 Oct 2026 01:31 PM IST
सार
झांसी में सरकारी जमीन पर कब्जा कर काली सरकार ने आश्रम बना लिया था। हरदोई का हिस्ट्रीशीटर 25 हजार वर्ग फीट जमीन पर दो साल से आश्रम बनवाने में जुटा था। स्थानीय लोग पहले भी शिकायत कर चुके थे। रसूख के चलते अब तक जांच नहीं हुई।
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Hardoi History-Sheeter
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
हरदोई का हिस्ट्रीशीटर प्रदीप शुक्ला उर्फ नटरोज झांसी के लहचूरा एवं मऊरानीपुर इलाके में काली सरकार के भेष में दो दशक से अधिक समय से छुपकर रह रहा था। मऊरानीपुर के चितावन ग्राम पंचायत के कांजा मौजा में आश्रम बनाने की खातिर उसने करीब 25 हजार वर्ग फीट सरकारी जमीन भी कब्जा ली।
यहां मंदिर समेत आश्रम का निर्माण करा रहा था। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत भी थी, लेकिन उसके रसूख के चलते प्रशासन जांच करने से हिचकिचा रहा था। उसके शिष्यों में मप्र के मंत्री तक शामिल थे। उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके दूसरे कारनामों की भी जांच शुरू हो गई है।
हरदोई निवासी प्रदीप शुक्ला पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर होने के बाद से झांसी में छिपकर रहने लगा। पुलिस से बचने की खातिर पहचान भी बदल ली। खुद को काली सरकार बताते हुए यहां दरबार लगाने लगा। पर्ची निकालकर मऊरानीपुर, लहचूरा समेत आसपास के लोगों को उनका भविष्य बताने के साथ ही बीमारी एवं परेशानी दूर करने का भी भरोसा दिलाता था।
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यहां मंदिर समेत आश्रम का निर्माण करा रहा था। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत भी थी, लेकिन उसके रसूख के चलते प्रशासन जांच करने से हिचकिचा रहा था। उसके शिष्यों में मप्र के मंत्री तक शामिल थे। उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके दूसरे कारनामों की भी जांच शुरू हो गई है।
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हरदोई निवासी प्रदीप शुक्ला पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर होने के बाद से झांसी में छिपकर रहने लगा। पुलिस से बचने की खातिर पहचान भी बदल ली। खुद को काली सरकार बताते हुए यहां दरबार लगाने लगा। पर्ची निकालकर मऊरानीपुर, लहचूरा समेत आसपास के लोगों को उनका भविष्य बताने के साथ ही बीमारी एवं परेशानी दूर करने का भी भरोसा दिलाता था।
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करीब दो साल से उसने कुरैंचा को अपना ठिकाना बनाया था। यहां तालाब के पास की कुछ जमीन पट्टा धारकों की है, राजस्व रिकॉर्ड में उसका नाम नहीं है लेकिन, उसने करीब 25 हजार वर्ग फीट सरकारी जमीन पर कब्जा जमा लिया। ग्राम प्रधान राहुल दांगी का कहना है कि यह पूरी जमीन सरकारी है। एसडीएम मनोज कुमार के मुताबिक, सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत की जांच कराई जाएगी।
नाबालिगों को रखता था सेवादार
काली बाबा की गिरफ्तारी के बाद सोमवार को उसके आश्रम में सन्नाटा पसरा रहा। आश्रम के मुख्य गेट में ताला बंद रहा। सुरक्षा के लिए आश्रम के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगे थे। अंदर कंट्रोल रूम से हर गतिविधि की निगरानी रखी जाती है। उसकी गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाली बात भी सामने आई।
काली बाबा की गिरफ्तारी के बाद सोमवार को उसके आश्रम में सन्नाटा पसरा रहा। आश्रम के मुख्य गेट में ताला बंद रहा। सुरक्षा के लिए आश्रम के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगे थे। अंदर कंट्रोल रूम से हर गतिविधि की निगरानी रखी जाती है। उसकी गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाली बात भी सामने आई।
आश्रम के बाहर उसके कुछ सेवादार मिले, लेकिन उन्होंने किसी तरह की बात करने से इन्कार कर दिया। गांव के लोग भी कुछ बोलने को राजी नहीं हु। हालांकि, कुछ लोगों ने बताया कि काली बाबा आश्रम में नाबालिग को ही सेवादार बनाता था। तीन नाबालिग उसके सबसे अधिक विश्वास पात्र हैं।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस के पहुंचने पर काली बाबा उसे ही आश्रम की चाभी सौंप गया। उनका कहना है वाहन आदि की व्यवस्था भी उसी नाबालिग सेवादार के जिम्मे है। गिरफ्तारी के बाद से वह तीनों भी नजर नहीं आ रहे हैं।
महज 30 हजार रुपये के विवाद ने खोली पोल
दशकों से छुपकर रह रहे प्रदीप उर्फ काली सरकार की पोल महज 30 हजार रुपये को लेकर हुए विवाद की वजह से खुल गई। मऊरानीपुर निवासी राजेंद्र जोशी से 4 अक्तूबर को प्रदीप उर्फ काली सरकार का विवाद हो गया था। राजेंद्र के मुताबिक उसने काली सरकार को 30 हजार रुपये दिए थे।
दशकों से छुपकर रह रहे प्रदीप उर्फ काली सरकार की पोल महज 30 हजार रुपये को लेकर हुए विवाद की वजह से खुल गई। मऊरानीपुर निवासी राजेंद्र जोशी से 4 अक्तूबर को प्रदीप उर्फ काली सरकार का विवाद हो गया था। राजेंद्र के मुताबिक उसने काली सरकार को 30 हजार रुपये दिए थे।
पैसा वापस करने के बजाये काली सरकार पर्ची बनवाने के लिए उस पर दबाव बना रहा था। पर्ची बनवाने से इंकार करने पर काली सरकार ने 20 दिन में उसके परिवार के नष्ट हो जाने की धमकी दी। विवाद बढ़ने पर राजेंद्र ने एसएसपी से उसकी शिकायत की। इसके बाद पुलिस की जांच में काली सरकार बनकर बैठे प्रदीप की पोल खुल गई।
इसके अलावा झांसी में भी उसका अक्सर ही विवाद होता रहता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्ष 2011 में मऊरानीपुर स्थित गेस्ट हाउस से तांत्रिक क्रियाओं समेत दर्द की दवाएं देने लगा था। यहां विवाद के बाद उसके समर्थकों से मारपीट हो गई।
इस वजह से उसे यह जगह छोड़कर जाना पड़ा। लहचूरा में धवाकर गांव निवासी अजय सिंह परिहार के फर्म हाउस में तीन महीने रहने के बाद वहां भी उसका विवाद हो गया। इस वजह से उसे यहां से भी जाना पड़ा।
वह खदरका, मारकुआं और बम्होरी में रहा। आसपास के लोगों के विरोध करने की वजह से उसे इन जगहों को भी छोड़ना पड़ा। इसके बाद दोबारा वह मऊरानीपुर आया। गोपालगंज में राजू साहू के मकान में 8 माह रहा। यहां भी संदिग्ध गतिविधियों के चलते उसे जाना पड़ा।