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आत्मनिर्भर भारत: आगे नहीं आया कोई उद्यमी

Mon, 28 Sep 2020 01:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 01:33 AM IST
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food procesing
झांसी। आत्मनिर्भर भारत के जरिए उद्यमियों को फूड प्रोसेसिंग जैसी नई विधाओं में आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने ऋण सहूलियत देने की बात कही लेकिन, इनमें कई योजनाएं फाइलों से बाहर ही नहीं निकली हैं। फूड प्रोसेसिंग के लिए बुंदेलखंड में उद्यमियों को तीस लाख रुपये तक मदद की जानी थी लेकिन, इसके लिए कोई भी उद्यमी अभी तक सामने नहीं आया है।
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केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के जरिए लघु उद्यमियों को फायदा पहुंचाने की योजना बनाई। सरकार का मकसद था इसके जरिए देशभर में 9 लाख से अधिक कुशल एवं अर्धकुशल वर्ग में रोजगार तैयार किए जा सकें। सरकार ने उद्यमियों को लुभाने के लिए बैंक ऋण में कई सारी सहूलियत देने की बात कही। डीपीआर तैयार करने में असानी हो सके इसके लिए हर संभव मदद की पेशकश की। कृषि उत्पादक समूह के अलावा स्वयं सहायता समूह को भी जोड़ने की कोशिश हुई। एफपीओ को उपकरणों की खरीद के अलावा फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में काम करने वाले स्वयं सहायता समूहों को चालीस हजार रुपये की प्रारंभिक पूंजी देने की भी बात योजना में कही गई।
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ब्रांडिंग के लिए विपणन के लिए पचास फीसदी धनराशि भी दी जानी थी। इसका लाभ न्यूनतम एक वर्ष से अधिक समय एवं दस से कम कर्मचारियों के साथ काम करने वाली इकाइयां हासिल कर सकती हैं। इनको अधिकतम तीस लाख रुपये तक मदद मिल सकती है। इसमें सब्सिडी का भी प्रावधान है लेकिन, इस सबके बावजूद उद्यमी आगे ही नहीं आए। तीन माह बाद भी महज एक आवेदन ही अभी तक विभाग को मिला है। वहीं, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण के उपनिदेशक भैरम सिंह का कहना है योजना से जुड़े प्रावधान पूरे कराए जा रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही लोगों को इसका फायदा मिलेगा।
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अब तक नहीं तैनात हुए रिर्सोस पर्सन
सरकार ने नव उद्यमियों को मदद के लिए रिर्सोस पर्सन तैनात करने की बात कही थी लेकिन, हैरानी की बात यह कि अभी तक इनकी भी तैनाती नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि रिर्सोस पर्सन के लिए कोई आवेदक ही सामने नहीं आया। उनका कहना है कि दो बार तिथि बढ़ाने के बावजूद सिर्फ अभी आवेदक ही आया है। इन रिर्सोस पर्सन को एक प्रोजेक्ट पर करीब बीस हजार रुपये भी दिए जाने हैं।
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