फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Father nurtured dreams in the fields; daughter won medals in swimming.

Jhansi News: पिता ने खेतों में सींचे सपने, बेटी ने तैराकी में जीते पदक

Sun, 11 Oct 2026 01:58 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 01:58 AM IST
विज्ञापन
Father nurtured dreams in the fields; daughter won medals in swimming.
झांसी। पिता खेतों में मेहनत कर परिवार के सपनों को सींचते रहे और बेटी ने तैराकी के पूल में अपनी प्रतिभा के दम पर कामयाबी की नई राह बना ली। किसान परिवार में पली-बढ़ी 16 वर्षीय जिया यादव ने तैराकी में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने के बाद जिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। अब उनका लक्ष्य देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना है।
विज्ञापन

नवरात्र के अवसर पर ‘बेमिसाल बेटियां’ अभियान के तहत ऐसी बेटियों की कहानियां प्रकाशित की जा रही हैं, जिन्होंने मेहनत और लगन से अपनी अलग पहचान बनाई है। जिया की कहानी भी इसी हौसले की मिसाल है। उनकी सफलता के पीछे लगातार अभ्यास, खेल के प्रति समर्पण और परिवार का सहयोग है।
विज्ञापन

आठ साल की उम्र में शुरू किया सफर
जिया के पिता विजय यादव किसान हैं। खेतों में मेहनत करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन बेटी के सपनों को आगे बढ़ाना भी उनके लिए उतना ही महत्वपूर्ण रहा। जिया ने छोटी उम्र में ही तैराकी सीखना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे पानी में अभ्यास करने का शौक उनका लक्ष्य बन गया। जिला स्तर से शुरू हुआ सफर राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचा।
विज्ञापन
विज्ञापन

तैराकी ऐसा खेल है, जिसमें सफलता के लिए नियमित अभ्यास, शारीरिक क्षमता, अनुशासन और तकनीक पर लगातार काम करना पड़ता है। जिया ने इन चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी प्रतिभा निखारी। उन्होंने जूनियर वर्ग के साथ सीनियर वर्ग की प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया और कई पदक अपने नाम किए।

बैकस्ट्रोक में दिखाई प्रतिभा
जिया 50 और 100 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धाओं की तैराक हैं। इस स्पर्धा में गति के साथ पानी में शरीर का संतुलन, सही तकनीक और लय बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी क्षमता साबित की। राष्ट्रीय स्तर पर भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी ने उनके अनुभव को और व्यापक बनाया। जिया फिलहाल ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में अभ्यास कर रही हैं। उनका प्रयास है कि नियमित प्रशिक्षण और बेहतर प्रदर्शन के दम पर आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करें।


परिवार बना ताकत
चार भाई-बहनों में जिया दूसरे स्थान पर हैं। उनकी छोटी बहन वंशिका भी अच्छी तैराक हैं और जिला स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। इससे परिवार में खेल के प्रति बढ़ते लगाव का पता चलता है। जिया की उपलब्धियां केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम नहीं हैं। उनके पीछे परिवार का भरोसा और सहयोग भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed