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बिजली घोटाला: ट्रांसफार्मर के साथ नहीं लगे मिले थे इलेक्ट्रॉनिक मीटर
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ट्रांसफार्मर के साथ नहीं लगे मिले थे इलेक्ट्रॉॅनिक मीटर
झांसी। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत प्रदेश के बारह जिलों मेें ट्रांसफार्मर व इलेक्ट्रॉॅनिक मीटर लगाने का काम किया गया था। जांच के दौरान कई कार्यों में तमाम खामियां मिली थीं। सतर्कता विभाग द्वारा की गई जांच में घोटाले की परतें उखड़ने के बाद शिकंजा कसा गया।
वर्ष 2005 में बुंदेलखंड समेत प्रदेश के 12 जिलों में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का शुभारंभ हुआ था। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के खंभे लगाना, तार खींचना, ट्रांसफार्मर पर मीटर लगाना समेत कई कार्य हुए थे। जांच के दौरान सामने आया कि झांसी में 144 ग्रामों का विद्युतीकरण किया गया था, इसमें से 23 ग्रामों का भौतिक सत्यापन किया गया। इसमें ग्राम सिजौरा, कनौरा, सितौरा, बसरिया का भौतिक सत्यापन उपखंड अधिकारी सौरभ निगम व अवर अभियंता सोहेल सिद्दीकी के साथ किया गया। ग्राम बसरिया में एक इलेक्ट्रॉनिक मीटर ट्रांसफार्मर के साथ पाया गया, जबकि तीन ट्रांसफार्मर लगे थे। अन्य गांवों में किसी भी ट्रांसफार्मर के साथ इलेक्ट्रॉॅनिक मीटर नहीं पाए गए। ग्राम डिकौली, गौंती, इटौैरा, रानापुरा का भौतिक सत्यापन एसडीओ रमेश कुमार व र्जेई अशोक कुमार वर्मा ने किया। योजना के दौरान गांव में जितने भी ट्रांसफार्मर लगाए गए, वहां निरीक्षण के दौरान किसी भी गांव में ट्रांसफार्मर के साथ इलेक्ट्रॉॅनिक मीटर व बॉक्स नहीं मिला।
बकायन, बमनुवां के साथ मंगूसा, बाबई, सुकुपुरा, कायला, सरवा, पठारी, गढमऊ, लेवा, दिनेरा, फतेहपुर, कुकुरगांव, दिनेरी, पालर गांव मेें भी इलेक्ट्रॉॅनिक मीटर व बॉक्स नहीं मिले। वहीं, ग्राम कायला, सुखूपुरा, बाबई, सरवा गौती मेें मानक के अनुरूप ग्राउंटिंग नहीं पाई गई। साथ ही खंभों के नीचे स्टोन पैड भी नहीं मिले।
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क्लोेजर रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 167 गांव डीपीआर के अनुसार विद्युतीकरण के लिए चिह्नित किए गए थे। बताया गया है कि 18 गांवों तो तत्कालीन विद्युतीकरण की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए योजना में शामिल किए गए। 33 गांव ऐसे पाए गए थे, जो पूर्व से ही तत्कालीन विद्युतीकरण थे।
अभिलेखों के अनुसार झांसी मेें 9505 विद्युत खंभों का प्रयोग हुआ। थर्ड पार्टी की री ऑडिट रिपोर्ट एवं भौतिक सत्यापन से यह सामने आया कि करीब 50 प्रतिशत खंभों में मानकों अनुरूप अनुरूप ग्राउंटिंग व कंक्रीटिंग का कार्य नहीं किया गया।
दरों में हुआ गड़बड़झाला
ग्राउंटिंग की दर रुपये 505.48 प्रति खंभा दर्शायी गई। इस प्रकार यदि 50 प्रतिशत को आधार मान लिया जाए तो यह रकम 24,02,04,096 होती है तथा 4752 खंभों 89.20 रुपये के हिसाब से स्टोन पैड न होने पर यह रकम 4,23,978.4 रुपये होती है। भौतिक सत्यापन में 23 ग्रामोें में 87 प्रतिशत गांवों में ट्रांसफार्मर के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीटर व बॉक्स नहीं पाए गए। अभिलेेखों के अनुसार जनपद झांसी में 730 ट्रांसफार्मर उक्त योजना में लगाए गए थे। दर 2509.58 रुपये के हिसाब से 1,59,3834.258 होती है। इस प्रकार विभिन्न कार्यों के लिए 44,19,853.618 रुपये का भुगतान किया गया।
यहां भी हेरफेर
बताया गया है कि योजना से जुड़े अवर अभियंताओें द्वारा मापन पुस्तिकाएं तैयार की गई थीं। सभी कार्यों को मानक अनुरूप दिखाकर भुगतान की नियमानुसार संस्तुति की थी। जबकि, मापन पुस्तिकाओं में जो कार्य मानक के अनुरूप नहीं थे या जो उपकरण नहीं लगाए थे उन सभी का डिडक्शन दिखाना चाहिए था, जो नहीं दिखाया गया।
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झांसी। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत प्रदेश के बारह जिलों मेें ट्रांसफार्मर व इलेक्ट्रॉॅनिक मीटर लगाने का काम किया गया था। जांच के दौरान कई कार्यों में तमाम खामियां मिली थीं। सतर्कता विभाग द्वारा की गई जांच में घोटाले की परतें उखड़ने के बाद शिकंजा कसा गया।
वर्ष 2005 में बुंदेलखंड समेत प्रदेश के 12 जिलों में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का शुभारंभ हुआ था। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के खंभे लगाना, तार खींचना, ट्रांसफार्मर पर मीटर लगाना समेत कई कार्य हुए थे। जांच के दौरान सामने आया कि झांसी में 144 ग्रामों का विद्युतीकरण किया गया था, इसमें से 23 ग्रामों का भौतिक सत्यापन किया गया। इसमें ग्राम सिजौरा, कनौरा, सितौरा, बसरिया का भौतिक सत्यापन उपखंड अधिकारी सौरभ निगम व अवर अभियंता सोहेल सिद्दीकी के साथ किया गया। ग्राम बसरिया में एक इलेक्ट्रॉनिक मीटर ट्रांसफार्मर के साथ पाया गया, जबकि तीन ट्रांसफार्मर लगे थे। अन्य गांवों में किसी भी ट्रांसफार्मर के साथ इलेक्ट्रॉॅनिक मीटर नहीं पाए गए। ग्राम डिकौली, गौंती, इटौैरा, रानापुरा का भौतिक सत्यापन एसडीओ रमेश कुमार व र्जेई अशोक कुमार वर्मा ने किया। योजना के दौरान गांव में जितने भी ट्रांसफार्मर लगाए गए, वहां निरीक्षण के दौरान किसी भी गांव में ट्रांसफार्मर के साथ इलेक्ट्रॉॅनिक मीटर व बॉक्स नहीं मिला।
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बकायन, बमनुवां के साथ मंगूसा, बाबई, सुकुपुरा, कायला, सरवा, पठारी, गढमऊ, लेवा, दिनेरा, फतेहपुर, कुकुरगांव, दिनेरी, पालर गांव मेें भी इलेक्ट्रॉॅनिक मीटर व बॉक्स नहीं मिले। वहीं, ग्राम कायला, सुखूपुरा, बाबई, सरवा गौती मेें मानक के अनुरूप ग्राउंटिंग नहीं पाई गई। साथ ही खंभों के नीचे स्टोन पैड भी नहीं मिले।
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क्लोेजर रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 167 गांव डीपीआर के अनुसार विद्युतीकरण के लिए चिह्नित किए गए थे। बताया गया है कि 18 गांवों तो तत्कालीन विद्युतीकरण की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए योजना में शामिल किए गए। 33 गांव ऐसे पाए गए थे, जो पूर्व से ही तत्कालीन विद्युतीकरण थे।
अभिलेखों के अनुसार झांसी मेें 9505 विद्युत खंभों का प्रयोग हुआ। थर्ड पार्टी की री ऑडिट रिपोर्ट एवं भौतिक सत्यापन से यह सामने आया कि करीब 50 प्रतिशत खंभों में मानकों अनुरूप अनुरूप ग्राउंटिंग व कंक्रीटिंग का कार्य नहीं किया गया।
दरों में हुआ गड़बड़झाला
ग्राउंटिंग की दर रुपये 505.48 प्रति खंभा दर्शायी गई। इस प्रकार यदि 50 प्रतिशत को आधार मान लिया जाए तो यह रकम 24,02,04,096 होती है तथा 4752 खंभों 89.20 रुपये के हिसाब से स्टोन पैड न होने पर यह रकम 4,23,978.4 रुपये होती है। भौतिक सत्यापन में 23 ग्रामोें में 87 प्रतिशत गांवों में ट्रांसफार्मर के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीटर व बॉक्स नहीं पाए गए। अभिलेेखों के अनुसार जनपद झांसी में 730 ट्रांसफार्मर उक्त योजना में लगाए गए थे। दर 2509.58 रुपये के हिसाब से 1,59,3834.258 होती है। इस प्रकार विभिन्न कार्यों के लिए 44,19,853.618 रुपये का भुगतान किया गया।
यहां भी हेरफेर
बताया गया है कि योजना से जुड़े अवर अभियंताओें द्वारा मापन पुस्तिकाएं तैयार की गई थीं। सभी कार्यों को मानक अनुरूप दिखाकर भुगतान की नियमानुसार संस्तुति की थी। जबकि, मापन पुस्तिकाओं में जो कार्य मानक के अनुरूप नहीं थे या जो उपकरण नहीं लगाए थे उन सभी का डिडक्शन दिखाना चाहिए था, जो नहीं दिखाया गया।